नई दिल्ली : विश्व मुक्केबाजी संगठन के निवर्तमान अध्यक्ष बोरिस वान डेर वोर्स्ट ने खुलासा किया है कि संगठन विश्व स्तर पर होने वाले मुक्केबाजी मुकाबलों की समीक्षा के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल की संभावना का मूल्यांकन कर रहा है। उनके अनुसार, यह तकनीक लागू होने पर जूरी की भूमिका समाप्त भी हो सकती है। उन्होंने स्वीकार किया कि विवादास्पद स्कोरिंग प्रणाली से जुड़ी चुनौतियाँ 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक में इस खेल का संचालन करने वाले नए संगठन के सामने सबसे बड़ी परीक्षा होंगी।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार वैन डेर वोर्स्ट ने चल रहे विश्व मुक्केबाजी कप फाइनल के दौरान पत्रकारों से बातचीत में कहा कि “सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि हर मुकाबले के अंत में वास्तव में सर्वश्रेष्ठ मुक्केबाज का ही हाथ उठे। प्रतियोगिता की निष्ठा अब भी इस खेल की प्रमुख चिंता है, खासकर तब जब फैसलों में जूरी की भूमिका शामिल होती है।”
एआई के उपयोग पर गहन मूल्यांकन
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार एआई के इस्तेमाल पर बात करते हुए वोर्स्ट ने आगे कहा कि “हम मुकाबलों की समीक्षा के लिए एआई जैसी आधुनिक तकनीक के उपयोग की दिशा में काम कर रहे हैं, ताकि प्रशंसकों और मुक्केबाजों का सिस्टम पर भरोसा फिर से कायम किया जा सके। इस प्रक्रिया पर फिलहाल काम जारी है और मैं सिर्फ इतना कह सकता हूँ कि हम इस समय इसके संभावित उपयोग का मूल्यांकन कर रहे हैं।”
स्कोरिंग प्रणाली पर उठे सवाल
चाहे पिछला संगठन अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाजी संघ (आईबीए) हो या वर्तमान संस्था मुक्केबाजी के लिए स्कोरिंग दिक्कत का विषय बना हुआ है। ऐसा माना जा रहा है कि विश्व मुक्केबाजी को अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति से पूर्ण मान्यता दिलाने के लिए इसे सुलझाना एक प्रमुख मुद्दा है।
रैंकिंग प्रणाली
प्रतिस्पर्धा के स्तर को और बेहतर बनाने के उद्देश्य से विश्व मुक्केबाजी ने हाल ही में नई रैंकिंग प्रणाली लागू की है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि शीर्ष मुक्केबाज किसी बड़े टूर्नामेंट के शुरुआती दौर में नहीं, बल्कि बाद के चरणों में एक-दूसरे से मुकाबला करें। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार वान डेर वोर्स्ट ने बताया कि “रैंकिंग अंक रखने का मकसद यह है कि मुक्केबाजों को बड़े आयोजनों से पहले उचित वरीयता और रैंकिंग मिल सके, जिससे दो सबसे मजबूत खिलाड़ी पहले दौर में आमने-सामने न आएं।”
रैंकिंग से तय होगी खिलाड़ियों की वरीयत
भारत की दिग्गज मुक्केबाज निखत जरीन को ओलंपिक में वरीयता न मिलने का खामियाजा उठाना पड़ा, क्योंकि दो विश्व खिताब जीतने के बावजूद वह गैर-वरीयता प्राप्त थीं और पेरिस ओलंपिक के दूसरे दौर में उनका सामना चीन की स्वर्ण पदक विजेता वू यू से हो गया। विश्व मुक्केबाजी द्वारा शुरू की गई वर्तमान रैंकिंग प्रणाली के तहत अब एक सत्र में सभी टूर्नामेंटों में मुक्केबाजों के प्रदर्शन के आधार पर उनकी रैंकिंग तय होगी और इसी रैंकिंग से उन्हें भविष्य की प्रतियोगिताओं में वरीयता मिलेगी।
लॉस एंजिल्स ओलंपिक: क्वालीफिकेशन कैसे होगा तय?
यह पूछे जाने पर कि क्या क्वालीफिकेशन के लिए रैंकिंग अंकों का उपयोग किया जाएगा, मीडिया रिपोर्ट के अनुसार वैन डेर वोर्स्ट ने कहा कि “फिलहाल लॉस एंजिल्स ओलंपिक की क्वालीफिकेशन प्रक्रिया को अंतिम रूप नहीं दिया गया है। हम यह आकलन कर रहे हैं कि कौन-सी प्रणाली सबसे उपयुक्त होगी और इस पर अगले वर्ष निर्णय लिया जाएगा। अभी के लिए हमारा रुझान महाद्वीपीय और विश्व क्वालीफायर के संयोजन को जारी रखने का है।”

