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Saturday, March 14, 2026

अमेरिकी झंडा हाथ में और ‘जन गण मन’ की गूंज—अंडर-19 वर्ल्ड कप के पहले मुकाबले में ऐसा क्यों हुआ?

नई दिल्ली : अंडर-19 वर्ल्ड कप 2026 के पहले मुकाबले में गुरुवार, 15 जनवरी को मैदान पर उतरे भारत और अमेरिका के खिलाड़ी एक विशेष समानता रखते थे—वे सभी या तो भारतीय थे या भारतीय मूल के थे। यही वजह थी कि टॉस के बाद जब भारत का राष्ट्रगान बजे, तो अधिकांश अमेरिकी खिलाड़ियों के माता-पिता हाथ में अमेरिका का झंडा लिए ‘जन गण मन’ गाते नजर आए। यह दृश्य जिम्बाब्वे और नामीबिया में हो रहे अंडर-19 वर्ल्ड कप में भारत और दक्षिण एशिया की मजबूत उपस्थिति को उजागर करता है।

अंडर-19 वर्ल्ड कप 2026 में हर तीन क्रिकेटरों में से एक दक्षिण एशिया का है या उसके पूर्वज यहां के हैं। इसमें वे भारतीय और पाकिस्तानी मूल के खिलाड़ी शामिल नहीं हैं, जो तंजानिया जैसे पूर्वी अफ्रीकी देश में रहते हैं। इसमें साउथ अफ्रीका और वेस्टइंडीज में बंधुआ मजदूरों के वंशज भी शामिल नहीं हैं।
ये आंकड़े इस बात को स्पष्ट रूप से दिखाते हैं कि अब क्रिकेट पर उन लोगों का दबदबा है, जिन पर कभी अंग्रेजों का शासन था। टूर्नामेंट में कुल 240 खिलाड़ियों में से 60 खिलाड़ी भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका और बांग्लादेश के हैं। अन्य टीमों में शामिल 32 खिलाड़ी दक्षिण एशियाई मूल के हैं, जिनमें 28 भारत से और दो-दो पाकिस्तान और श्रीलंका से हैं।

ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और इंग्लैंड की टीमों में बढ़ता प्रभाव

पहले आईसीसी के एसोसिएट देशों की टीमों में भारतीय मूल के खिलाड़ियों की संख्या अधिक रहती थी, लेकिन अब उनका प्रभाव ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और इंग्लैंड जैसी प्रमुख टीमों में भी देखने को मिल रहा है। ऑस्ट्रेलिया की टीम में दो भारतीय और श्रीलंकाई मूल के खिलाड़ी हैं, जबकि न्यूजीलैंड में चार खिलाड़ी हैं। यह प्रवृत्ति दर्शाती है कि दक्षिण एशियाई लोग वहां की मुख्यधारा के समाज में बेहतर तरीके से घुल-मिल रहे हैं, जो पहले संभव नहीं था। हाल ही में रिटायर हुए ऑस्ट्रेलिया के उस्मान ख्वाजा ने भी इस संदर्भ में कहा था, “मेरे सभी कोच गोरे ऑस्ट्रेलियाई थे, सभी सेलेक्टर गोरे ऑस्ट्रेलियाई थे और वे मुझे या मेरी संस्कृति को वास्तव में नहीं समझते थे।” ख्वाजा पाकिस्तानी मूल के हैं।

ऑस्ट्रेलिया अंडर-19 टीम में केरल के खिलाड़ी की पहचान

ऑस्ट्रेलिया अंडर-19 टीम के खिलाड़ी जॉन जेम्स के पिता केरल से न्यू साउथ वेल्स जाकर बस गए थे। जेम्स ने बताया कि स्कूल से लेकर न्यू साउथ वेल्स की यूथ टीम में अपने साथियों के बीच हमेशा उन्हें यह महसूस हुआ कि वह पूरी तरह से ऑस्ट्रेलिया का हिस्सा हैं। उनकी बोलचाल भी स्थानीय लोगों जैसी है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार कहा, “मैं खुद को ऑस्ट्रेलियाई की तरह महसूस करता हूँ। यहीं बड़ा हुआ हूँ। मैं घर पर मलयालम बोलता हूँ, लेकिन हर मायने में मैं ऑस्ट्रेलियाई हूँ क्योंकि मैं ऑस्ट्रेलियाई वातावरण में पला-बढ़ा हूँ।”

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