नई दिल्ली : एशियन मुक्केबाजी चैंपियनशिप से पहले भारतीय टीम के चयन को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। भारतीय सेना और भारतीय नौसेना के बीच चल रही इस खींचतान ने ‘फेयर सिलेक्शन या फेवर’ की बहस को और तेज कर दिया है। खासतौर पर तब, जब बेहतर रिकॉर्ड के बावजूद नौसेना के एक मुक्केबाज को टीम से बाहर कर दिया गया। आरोपों के बीच चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। नौसेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने उलानबटोर में होने वाले इस टूर्नामेंट के लिए टीम चयन में आर्मी के बॉक्सरों को प्राथमिकता दिए जाने पर भी आपत्ति जताई है, जिससे यह विवाद और गहरा गया है।
भारतीय टीम में आर्मी का दबदबा, 10 में से 9 खिलाड़ी सेना के
28 मार्च से 11 अप्रैल तक होने वाली एशियन चैंपियनशिप के लिए 10 सदस्यीय भारतीय टीम में आर्मी के नौ मुक्केबाज शामिल हैं। दसवां मुक्केबाज राजस्थान का है। वह रक्षा सेवाओं से नहीं हैं। 70 किलोग्राम भार वर्ग में नौसेना के हितेश गुलिया, सेना के दीपक से हार गए।
सचिव (खेल) हरि रंजन राव को लिखे एक पत्र में कर्मियों से जुड़े मामलों के प्रभारी एक वाइस एडमिरल ने आरोप लगाया है कि बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (BFI) की ओर से नियुक्त चयन समिति में दो सदस्य ‘एक ही संगठन’ के थे, जिनके एथलीट चयन के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे थे।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ‘इस बात ने ‘हितों के टकराव’ और ‘निष्पक्षता की कथित कमी’ को लेकर चिंताएं खड़ी कर दी हैं। हितेश गुलिया ने पिछले साल की इंटर-सर्विसेज चैंपियनशिप के साथ-साथ 2026 के नेशनल में भी दीपक को मात दी थी। वाइस एडमिरल ने BFI की चयन प्रक्रिया पर चिंता व्यक्त की है।
चयन प्रक्रिया पर विवाद, वाइस एडमिरल ने मांगी वीडियो रिकॉर्डिंग
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार वाइस एडमिरल ने अपने पत्र में लिखा कि साबित हुई श्रेष्ठता और अंतरराष्ट्रीय मेडल रिकॉर्ड के बावजूद हितेश गुलिया को दीपक से नीचे रखा गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि चयन प्रक्रिया में ‘ओपन सिलेक्शन ट्रायल’ की कमी रही, जिससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं। इसके साथ ही उन्होंने मुकाबलों की वीडियो रिकॉर्डिंग उपलब्ध न होने का मुद्दा भी उठाया। वाइस एडमिरल ने खेल सचिव से इस मामले में दखल देने और पूरी चयन प्रक्रिया की समीक्षा करने पर विचार करने का अनुरोध किया है, ताकि निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सके।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ‘…राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में प्रदर्शन के साथ-साथ हेड टू हेड नतीजों को भी उचित महत्व दिया जाना चाहिए।’ उन्होंने इस बात की ओर इशारा किया कि 2024 पेरिस ओलंपिक से पहले खिलाड़ियों के इसी तरह से किए गए मूल्यांकन का ही नतीजा था कि भारतीय मुक्केबाजी टीम बिना पदक लौटी थी। हालांकि, बीएफआई (BFI) के कार्यकारी निदेशक कर्नल अरुण मलिक ने आरोपों से इनकार किया।
कर्नल अरुण मलिक ने आरोपों को किया खारिज
कर्नल अरुण मलिक ने दावा किया कि पुरुषों के मुख्य कोच CA कटप्पा के अलावा, आर्मी से कोई भी चयन समिति का हिस्सा नहीं था। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अरुण मलिक ने बताया, ‘चयन समिति में आर्मी से कोई भी नहीं है। यहां तक कि कटप्पा भी कई साल पहले रिटायर हो चुके हैं।’ मीडिया रिपोर्ट के अनुसार कर्नल अरुण मलिक ने कहा कि पुरुषों के हेड कोच ने बीजिंग ओलंपिक के कांस्य पदक विजेता विजेंदर सिंह के साथ भी काम किया है। कटप्पा का यह तीसरा कार्यकाल है। अरुण मलिक ने कहा, ‘आप यह नहीं कह सकते कि अगर कोच आर्मी से है तो हम उसे चयन समिति में नहीं रख सकते।’
कटप्पा ने इस मुद्दे पर पूछे गए सवालों का कोई जवाब नहीं दिया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अरुण मलिक ने कहा कि हितेश गुलिया और दीपक के बीच ज्यादा फर्क नहीं है और फेडरेशन के हित में यही है कि उपलब्ध सबसे बेहतरीन मुक्केबाज को चुना जाए। अरुण मलिक ने कहा, ‘अगर मैं और मेरी टीम सिर्फ इसलिए औसत दर्जे के लोगों को चुनते हैं, क्योंकि हम किसी खास व्यक्ति को चुनना चाहते हैं, तो यह हमारी बेवकूफी होगी। दीपक ने इस वजन वर्ग में असेसमेंट (मूल्यांकन) के दौरान सभी स्पैरिंग सेशन में हर किसी को पीछे छोड़ दिया।’
BFI का बयान, चयन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और सही
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस बीच भारतीय मुक्केबाजी महासंघ ने बयान जारी कर अपनी चयन प्रक्रिया का बचाव किया और वीडियो रिकॉर्डिंग न होने के आरोपों को खारिज कर दिया। बीएफआई ने स्पष्ट किया कि सभी मुकाबलों की रिकॉर्डिंग ठीक से की गई थी और इन्हें भारतीय खेल प्राधिकरण के साथ साझा भी किया गया। साथ ही बोर्ड ने यह भी कहा कि बाउट की रिकॉर्डिंग को मुक्केबाजों या उनके कैंप के साथ साझा करना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा नहीं है। बीएफआई के अनुसार, मूल्यांकन के दौरान हुई स्पैरिंग बाउट को प्रतिस्पर्धी मुकाबला नहीं माना गया था, बल्कि यह एक संरचित मूल्यांकन प्रक्रिया का हिस्सा था। इसमें किसी विजेता या हारने वाले का फैसला नहीं किया जाता, बल्कि खिलाड़ियों को अलग-अलग प्रदर्शन मानकों पर परखा जाता है।


