मुंबई. भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने घरेलू क्रिकेट के प्लेइंग कंडीशंस में अहम बदलाव किया है। अब मल्टी-डे घरेलू मैचों (रणजी ट्रॉफी, दलीप ट्रॉफी, सीके नायडू ट्रॉफी आदि) में अगर किसी खिलाड़ी को मैदान पर गंभीर चोट लगती है और वह आगे नहीं खेल सकता, तो टीम को रिप्लेसमेंट खिलाड़ी उतारने की अनुमति होगी। अब तक केवल कन्कशन रिप्लेसमेंट (सिर पर चोट लगने की स्थिति) की ही अनुमति थी, लेकिन पंत और वोक्स जैसी हालिया चोटों को देखते हुए यह बदलाव किया गया है। नए नियम के अनुसार रिप्लेसमेंट केवल टॉस के समय दी गई सब्स्टीट्यूट लिस्ट से चुना जाएगा और वही भूमिका निभाने वाला खिलाड़ी होना चाहिए। विकेटकीपर की स्थिति में यदि सब्स्टीट्यूट में कोई विकल्प न हो, तो बाहर से कीपर बुलाने की अनुमति मिलेगी।
इस फैसले पर खिलाड़ियों की राय बंटी हुई है। गौतम गंभीर ने कहा कि अगर चोट गंभीर है तो रिप्लेसमेंट जरूरी है, इसमें कोई बुराई नहीं है। वहीं इंग्लैंड कप्तान बेन स्टोक्स ने इसे बिल्कुल मजाक करार दिया और कहा कि चोट भी खेल का हिस्सा है। नया नियम अभी केवल मल्टी-डे घरेलू क्रिकेट में लागू होगा। विजय हजारे ट्रॉफी और सैयद मुश्ताक अली जैसे सफेद गेंद टूर्नामेंट में यह लागू नहीं होगा। IPL में इसे लागू करने पर फिलहाल कोई फैसला नहीं लिया गया है।
नियम की मुख्य बातें
चोट खेल के दौरान और मैदान में लगी होनी चाहिए।
अंपायर और मैच रेफरी गंभीरता का आकलन करेंगे।
टीम मैनेजर को चोट का विवरण और सब्स्टीट्यूट का नाम लिखित रूप में देना होगा।
रिप्लेसमेंट खिलाड़ी को तभी अनुमति मिलेगी जब यह टीम को अनुचित लाभ न पहुंचाए।
एक बार रिप्लेसमेंट मान्य होने पर घायल खिलाड़ी दोबारा मैदान पर नहीं लौट सकेगा।

