सरकारी फंड लेने वाले खेल संगठनों पर ही लागू होंगे नए नियम, BCCI पर नहीं
नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) अब भी सूचना के अधिकार (RTI) के दायरे में नहीं आएगा। खेल मंत्रालय द्वारा संसद में पेश किए गए नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस बिल 2025 में स्पष्ट किया गया है कि केवल वे खेल संगठन RTI के अंतर्गत आएंगे जो सरकारी अनुदान या सहायता प्राप्त करते हैं। चूंकि BCCI एक निजी संस्था है और सरकार से कोई आर्थिक सहायता नहीं लेता, इसलिए यह बिल उस पर लागू नहीं होगा। बिल के क्लॉज 15(2) में पहले कहा गया था कि मान्यता प्राप्त सभी खेल संगठन RTI के अंतर्गत आएंगे, लेकिन अब इसमें संशोधन कर दिया गया है। संशोधित प्रावधान में स्पष्ट किया गया है कि केवल उन्हीं संगठनों को RTI के तहत सार्वजनिक प्राधिकरण माना जाएगा जो सरकारी फंड या सुविधाएं प्राप्त करते हैं। हालांकि, मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि सरकारी मदद सिर्फ पैसों तक सीमित नहीं है। अगर किसी खेल संस्था को आयोजन के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर या दूसरी सरकारी सुविधा मिलती है, तो वह भी RTI के दायरे में लाई जा सकती है। फिर भी, BCCI पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, क्योंकि वह लंबे समय से सरकारी अनुदान नहीं लेता और खुद को RTI के दायरे में लाने का लगातार विरोध करता रहा है।
खेल मंत्री मनसुख मंडाविया ने 23 जुलाई को यह बिल लोकसभा में पेश किया था। इसमें नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस बॉडी, नेशनल स्पोर्ट्स बोर्ड, खेल चुनाव पैनल और स्पोर्ट्स ट्रिब्यूनल जैसी संस्थाओं के गठन का प्रस्ताव है। संसद में इस बिल को GPC (जनरल पर्पज़ कमिटी) के पास भेजने की मांग भी उठी है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए BCCI के उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने कहा कि वे पहले इस बिल का अध्ययन करेंगे और फिर इस पर विचार व्यक्त करेंगे। इससे पहले भी सरकार BCCI को RTI के दायरे में लाने की कोशिश कर चुकी है, लेकिन बोर्ड ने हमेशा इसे स्वतंत्र संस्था बताते हुए इससे बाहर रहने की बात कही है।

