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Saturday, March 14, 2026

इंग्लैंड क्रिकेट को बड़ा झटका: पूर्व तेज गेंदबाज का निधन, करियर में 600 से ज्यादा विकेट

नई दिल्ली : इंग्लैंड क्रिकेट के लिए एक दुखद खबर सामने आई है। इंग्लैंड के पूर्व तेज गेंदबाज केन शटलवर्थ का 80 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। शटलवर्थ ने साल 1970 में इंग्लैंड के लिए टेस्ट डेब्यू किया था और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ब्रिसबेन में खेले गए अपने पहले ही मैच में शानदार प्रदर्शन करते हुए 5 विकेट हासिल किए थे। हालांकि, उनका अंतरराष्ट्रीय करियर एक साल से भी कम समय तक चला और वे 1971 में टीम से बाहर हो गए। मैदान पर उनकी तेज धार वाली गेंदबाजी लंबे समय तक घरेलू क्रिकेट में छाप छोड़ती रही।

केन शटलवर्थ ने अपना आखिरी टेस्ट मैच जून 1971 में पाकिस्तान के खिलाफ बर्मिंघम में खेला। इंग्लैंड के लिए उन्होंने कुल 5 टेस्ट मैचों में शिरकत की और इस दौरान 35.58 की औसत से 35 विकेट अपने नाम किए। टेस्ट करियर के अलावा उन्होंने सिर्फ एक वनडे इंटरनेशनल खेला, जो जनवरी 1971 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मेलबर्न में हुआ था। उस मुकाबले में उन्होंने एक विकेट हासिल किया। भले ही उनका अंतरराष्ट्रीय करियर छोटा रहा, लेकिन अपने शुरुआती प्रदर्शन से उन्होंने क्रिकेट जगत का ध्यान खींचा था।

फर्स्ट क्लास क्रिकेट में झटके 600 से ज्यादा विकेट

13 नवंबर 1944 को लंकाशायर के सेंट हेलेन्स में जन्में केन शटलवर्थ का फर्स्ट क्लास करियर बेहद लंबा और प्रभावशाली रहा। उन्होंने 1964 से 1980 तक फर्स्ट क्लास क्रिकेट खेलते हुए 239 मैचों में 623 विकेट चटकाए और साथ ही 2,589 रन भी बनाए। वहीं, लिस्ट-ए क्रिकेट में उनका प्रदर्शन भी उल्लेखनीय रहा, जहां उन्होंने 129 मैचों में 174 विकेट अपने नाम किए और 374 रन का योगदान दिया। इंग्लैंड के लिए भले ही उनका अंतरराष्ट्रीय करियर छोटा रहा, लेकिन घरेलू क्रिकेट में उनकी पहचान एक घातक गेंदबाज के रूप में हमेशा बनी रही।

केन शटलवर्थ ने अपने फर्स्ट क्लास करियर में लंकाशायर और लीसेस्टरशायर का प्रतिनिधित्व किया। लंकाशायर की ओर से खेलते हुए उन्होंने 22.92 की औसत से 484 विकेट चटकाए, जबकि करियर के अंतिम चरण में लीसेस्टरशायर के लिए 99 विकेट अपने नाम किए। उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 1968 में एसेक्स के खिलाफ लेटन में देखने को मिला, जब उन्होंने मात्र 41 रन देकर 7 विकेट हासिल किए। उसी सीजन उन्होंने कुल 73 फर्स्ट क्लास विकेट झटके। इसके दो साल बाद 1970 में उन्होंने 21 से कुछ ज्यादा के औसत से 74 विकेट लेकर अपने प्रदर्शन को और निखारा और इंग्लिश घरेलू क्रिकेट में अपनी मजबूत पहचान बनाई।

खिलाड़ी से अंपायर तक का सफर

1970 के दशक में जब वनडे क्रिकेट ने रफ्तार पकड़ी, तब केन शटलवर्थ की गेंदबाजी ने लंकाशायर की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने टीम को 1970, 1971 और 1972 में जिलेट कप की हैट्रिक जीत दिलाने में अहम योगदान दिया, वहीं 1969 और 1970 में दो संडे लीग खिताब जीतने में भी अपनी छाप छोड़ी। ट्रेंट ब्रिज में 1972 में उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देखने को मिला, जब उन्होंने महान बल्लेबाज गैरी सोबर्स का विकेट चटकाते हुए महज 13 रन देकर 5 विकेट लिए। साल 1975 में लीसेस्टरशायर से जुड़ने के बाद उन्होंने स्टैफोर्डशायर में लीग क्रिकेट खेलकर अपने करियर का समापन किया और इसके कुछ साल बाद फर्स्ट क्लास अंपायर के रूप में मैदान पर वापसी की। उनके योगदान को देखते हुए साल 2021 में उन्हें लंकाशायर हॉल ऑफ फेम में शामिल किया गया।

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