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Friday, March 13, 2026

Commonwealth Games 2030: मेजबानी की दौड़ में भारत, आईओए ने संभाली कमान

नई दिल्ली: राष्ट्रमंडल खेल 2030 की मेजबानी की दिशा में भारत ने बढ़ाया बड़ा कदम कॉमनवेल्थ स्पोर्ट्स कार्यकारिणी से मंजूरी मिलने के बाद भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) ने अब राष्ट्रमंडल खेलों 2030 की मेजबानी को पुख्ता बनाने की तैयारियां शुरू कर दी हैं। 26 नवंबर को भारत को आधिकारिक रूप से मेजबानी मिलने के साथ ही कॉमनवेल्थ गेम्स एसोसिएशन (भारत) और कॉमनवेल्थ गेम्स फेडरेशन (सीजीएफ) के बीच होस्ट कोलेबोरेशन एग्रीमेंट (मेजबान सहयोग समझौता) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। इस समझौते के तहत खेलों पर होने वाले खर्च, राजस्व की साझेदारी और अन्य प्रमुख पहलुओं को तय किया जाएगा। समझौते की रूपरेखा तैयार करने के लिए आईओए ने लेफ्टिनेंट जनरल हरपाल सिंह की अध्यक्षता में नौ सदस्यीय समिति का गठन किया है, जो सभी तकनीकी और प्रशासनिक पहलुओं पर काम करेगी।

प्रायोजक राशि की साझेदारी पर होगी स्पष्ट रूपरेखा

ओलंपिक, एशियाई और राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी में अहम होता है एचसीए समझौता ओलंपिक, एशियाई या राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मेजबान सहयोग समझौता (HCA) होता है। इसी के तहत मेजबान देश और आयोजन समिति के बीच जिम्मेदारियों, वित्तीय साझेदारी और आयोजन की शर्तों को अंतिम रूप दिया जाता है। भारत को 2010 के राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी वर्ष 2003 में जमैका में मिली थी। उस समय कॉमनवेल्थ गेम्स फेडरेशन (सीजीएफ), भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए), भारत सरकार और दिल्ली सरकार के बीच एक विस्तृत समझौता किया गया था। भारत की ओर से तब लगभग 1,800 करोड़ रुपये के खर्च की गारंटी दी गई थी, हालांकि बाद में इन खेलों की वास्तविक लागत 1,115 करोड़ रुपये से अधिक रही। इस राशि में खेलों से इतर इन्फ्रास्ट्रक्चर पर हुआ खर्च शामिल नहीं था।

गुजरात सरकार होगी बड़ी साझेदार

एचसीए में शामिल होंगे कानूनी, व्यवसायिक और परिचालन पहलू मेजबान सहयोग समझौते (एचसीए) का बड़ा हिस्सा गुजरात सरकार, केंद्रीय खेल मंत्रालय और भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) के बीच रहेगा। इस समझौते में कानूनी, व्यवसायिक और परिचालन संबंधी मुद्दों को शामिल किया जाएगा। समिति के अध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल हरपाल सिंह के अनुसार, एचसीए में देश और आईओए के हितों को सर्वोपरि रखा जाएगा तथा यह सुनिश्चित किया जाएगा कि एथलीटों को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। समिति में राजलक्ष्मी सिंह देव, गगन नारंग, कल्याण चौबे, अलकनंदा अशोक, अमिताभ शर्मा, रोहित राजपाल, सहदेव यादव और भूपिंदर सिंह बाजवा को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है।

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