नागपुर/भोपाल। देश के पूर्व अंतरराष्ट्रीय हैंडबाल खिलाड़ी एवं जाने-माने क्रिकेटर आर.के. रायडु को हाल ही में नागपुर में पार्थशर समाचार देशोन्नति द्वारा खेलों में 50 वर्ष विशेष योगदान के लिए विदर्भ गौरव रत्न लाइफटाइम अवार्ड से सम्मानित किया गया। श्री रूपकुमार नायडु ने अपने जीवन के 50 से अधिक वर्ष खेल को समर्पित किये हैं और अब भी कर रहे हैं। श्री नायडु भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) में भी खेलों-खिलाड़ियों को बढ़ावा देने के लिए कई उच्च पदों पर अपनी विशेष भूमिका निभा चुके हैं। इन दिनों वे प्रीमियर हैंडबाल लीग को ऊंचाई पर ले जाने के लिए भी सूर्खियों में हैं। वे गर्वित गुजरात टीम के संस्थापक डायरेक्टर भी हैं।
नागपुर के धन्तोली में जन्मे इस व्यक्ति को खेल विरासत में मिला। उनके पिता एक रणजी ट्रॉफी क्रिकेट खिलाड़ी थे। उन्होंने अपनी शिक्षा सोमलवार हाई स्कूल, शिवाजी साइंस इंस्टिट्यूट और इंस्टिट्यूट ऑफ़ साइंस से पूरी की और बचपन से ही खेल की दुनिया में कदम रखा। क्रिकेट से कैरियर की शुरुआत करने वाला यह व्यक्ति 15 वर्षों तक नागपुर की टॉप इंडियन जिम का स्टार प्लेयर रहा, लेकिन उनके बड़े भाई राजकुमार नाइडु के हैंड बॉल जूनियर वर्ल्ड कप में चयन के बाद उन्होंने भी हैंड बॉल में अपना भाग्या आजमाया। 1976 में महज 16 वर्ष की उम्र में उन्होंने अपना पहला राष्ट्रीय जूनियर टूर्नामेंट खेला। 1919 में उन्होंने चीन में आयोजित दूसरी एशियाई चैम्पियनशिप में भाग लिया। इसके बाद 1981 में जर्मनी और 1982 में दिल्ली एशियाड में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व किया। 1986 में वे हांगकांग जाने वाली भारतीय हेंडबॉल टीम के कप्तान बने। उनके नेतृत्व ने नागपुर युनिवर्सिटी को पांच बार ऑल इंडिया चैम्पियनशिप जिताने में अहम भूमिका निभाई।
साई निदेशक के रूप में भी खिलाड़ियों को बढ़ावा दे चुके हैं
B.S.S.C. की पढ़ाई के बाद उन्होंने Bank of Maharashtra में काम किया, लेकिन खेल के प्रति समर्पण ने उन्हें भारतीय खेल प्राधिकरण यानि साई तक ले गया। वे साई में सहायक निदेशक से लेकर खेल मुख्य निदेशक तक पहुंचे और मुंबई, दिल्ली, हैदराबाद, भोपाल और गांधी नगर, लद्दाख और नागपुर में कार्यरत रहे। अपने कार्यकाल में इन्होंने गोपीचंद्र, मैरीकॉम, लिंबाराम और वंदना कटारिया जैसे दर्जनों अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों को संवारने में भी मदद की। 2010 के कॉमनवेल्थ गेम्स में उनके प्रयासों से सरकार ने 678 करोड़ रुपए खेल प्रशिक्षण के लिए स्वीकृत किए। उन्होंने भोपाल और गांधीनगर में अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं विकसित की।

पैरा खेलों में भी विशेष योगदान दिया
देश के लिए पैरा खेलों में भी श्री रायडु का विशेष योगदान रहा है। 2016 में दुबई में आयोजित पैरा एशियन गेम्स में उन्हें भारत का इंचार्ज नियुक्त किया गया। 2017 में पोलैंड में वर्ल्ड पैरा गेम्स में आयरलैंड में वर्ल्ड पैरा गेम्स में उन्होंने भारतीय डेलिगेशन के प्रमुख के रूप में प्रतिनिधित्व किया। 2018 में उनके प्रयासों से गांधीनगर गुजरात में दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए इंटरनेशनल ट्रेंनिंग सेंटर को मंजूरी मिली। जिसके लिए 100 करोड़ की विशेष ग्रांड स्वीकृत हुई। 2018 में लद्दाख में 6 महीने तक नियुक्ति के दौरान उन्होंने आइस हॉकी सहित कई खेलों के लिए एक विशेष योजना तैयार की। जिसे खेलो इंडिया में शामिल किया गया। आज वहां 500 से अधिक बच्चे प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं और हॉस्टल सुविधाओं का लाभ ले रहे हैं। भारतीय हैंडबॉल को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए उन्होंने प्रीमियर हैंडबॉल लीग की शुरुआत करने में अहम योगदान दिया और गर्वित गुजरात टीम के संस्थापक डायरेक्टर बने। आगे उनका सपना है कि नागपुर में हैंडबॉल का अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण केंद्र बनाया जाए जिसके लिए वे प्रयासरत हैं। 65 वर्ष की उम्र में वे आज भी खेलों-खिलाड़ियों के लिए समर्पित है।

