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Wednesday, March 11, 2026

2013 से 2025: भारतीय महिला क्रिकेट का कायापलट

नई दिल्ली. बारह साल पहले 2013 में भारत ने महिला विश्व कप की मेज़बानी की थी, लेकिन तब यह टूर्नामेंट देश की चेतना पर कोई गहरी छाप नहीं छोड़ सका। खिलाड़ी अभ्यास के लिए स्थानीय लड़कों की टीमों से मैच खेलते थे और उन्हें टूर्नामेंट में अक्सर भेदभाव झेलना पड़ता था। वहीं दूसरी ओर विदेशी टीमें फाइव स्टार होटलों में रुकती थीं। उस दौर में खिलाड़ियों को पहचान सिर्फ़ विश्व कप के दौरान ही मिलती थी और मीडिया कवरेज भी बेहद सीमित था।

2013 की मुश्किलें

2013 में महिला खिलाड़ियों की स्थिति बेहद साधारण थी। तिरुश कामिनी ने वेस्टइंडीज़ के ख़िलाफ़ शतक तो लगाया, लेकिन वह सुर्खियों में लंबे समय तक नहीं रह पाईं। मैच फीस बेहद कम थी और डेली अलाउंस इतना कम कि विदेश दौरों में खर्च निकालना मुश्किल हो जाता था। मिताली राज और झूलन गोस्वामी जैसी गिनी-चुनी हस्तियां ही पहचानी जाती थीं। हार का मतलब खिलाड़ियों को अगले ही दिन टैक्सी या ट्रेन से घर लौटना पड़ता था।

बदलाव की शुरुआत

समय के साथ हालात बदलने लगे। 2017 का विश्व कप फ़ाइनल भारतीय महिला क्रिकेट के लिए टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ। इसके बाद जब 2023 में विमेंस प्रीमियर लीग (WPL) शुरू हुई तो महिला क्रिकेट को वह पहचान और ताक़त मिली, जिसकी कमी लंबे समय से थी। WPL 2025 ने दर्शकों का नया रिकॉर्ड बनाया, 3.1 करोड़ दर्शकों तक पहुंच बनाई और टीवी व्यूअरशिप में 142% की वृद्धि दर्ज की।

नई पहचान और नई उम्मीदें

अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। खिलाड़ी बेहतर सुविधाओं में ट्रेनिंग करते हैं और दुनियाभर की लीगों में हिस्सा लेते हैं। क्रांति गौड़, एन श्री चरणी और उमा छेत्री जैसे खिलाड़ी अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों से उभरकर सामने आए हैं। उमा छेत्री असम से भारत की पहली महिला क्रिकेटर बनीं, जबकि क्रांति गौड़ ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर गेंदबाज़ी में अपनी पहचान बनाई। अब महिला खिलाड़ियों को गुमनामी नहीं बल्कि स्टारडम और सम्मान मिल रहा है।

2025 का आत्मविश्वास

आज हरमनप्रीत कौर की कप्तानी में भारतीय महिला टीम सिर्फ़ मुकाबला करने के लिए नहीं बल्कि जीतने के इरादे से मैदान में उतर रही है। खिलाड़ी अब बराबरी का वेतन पा रही हैं, रिकॉर्ड इनामी राशि जीत रही हैं और उनके पास WPL जैसे बड़े मंच हैं। फैन बेस भी तेजी से बढ़ा है। 2013 की साधारण पहचान से लेकर 2025 के आत्मविश्वास और सम्मान तक, भारतीय महिला क्रिकेट ने लंबा सफ़र तय किया है। यह विश्व कप उनके लिए नया इतिहास रचने का सही मौक़ा है।

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