नई दिल्ली : जितेश शर्मा को जब भारत की टी20 विश्व कप टीम से बाहर किया गया तो उन्हें बड़ा झटका लगा था, लेकिन अब उन्हें लगता है कि यह निराशा उस एहसास के सामने बहुत छोटी है कि वह अपने पिता के आखिरी दिनों में उनके साथ रह पाए। जीवन के इतने बड़े नुकसान के आगे क्रिकेट से जुड़ी मायूसी जल्द ही फीकी पड़ गई। एक फरवरी को उनके पिता मोहन शर्मा का संक्षिप्त बीमारी के बाद निधन हो गया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जितेश ने पीटीआई को दिए इंटरव्यू में कहा, “जब मुझे चयन न होने की खबर मिली तो मैं थोड़ा निराश हुआ था। आखिर मैं भी इंसान हूं, मुझे भी दुख और बुरा लग सकता है। लेकिन समय के साथ-साथ वह दुख कम होता गया।”
वैश्विक टूर्नामेंट से बाहर होने का भावनात्मक बोझ जल्द ही एक कहीं बड़ी निजी चुनौती में बदल गया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार जितेश ने कहा, ‘ बाद में मेरे पिता बीमार पड़ गए और एक फरवरी को उनका देहांत हो गया। तो मैं सात दिन तक उनके साथ था। मेरे पिता को विश्व कप से अधिक मेरी जरूरत थी। उसके बाद मुझे किसी के लिए या अपने लिए भी कोई दुख या कोई अफसोस नहीं हुआ। मैं नाराज या कुछ भी नहीं हूं। मैं शुक्रगुजार था कि भगवान ने मुझे सात दिन तक अपने पिता के साथ रहने का मौका दिया। मैं उनका ख्याल रख पाया। और मुझे घर पर टीवी पर विश्व कप देखने में मजा आया। यह बहुत अलग अहसास है। मैं लड़कों के लिए बहुत खुश था।’
संघर्ष के बीच जिम्मेदारी बनी जिंदगी की सच्चाई
अपने पिता के जाने के बाद सबसे बड़े बेटे होने की जिम्मेदारी जितेश शर्मा की जिंदगी की एक अहम सच्चाई बन गई है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा, “मैं उस बात को भूल नहीं सकता और न ही भूलना चाहता हूं, क्योंकि अब वह हमारे बीच नहीं हैं। जब आप अपने पिता को खो देते हैं तो कुछ दिनों बाद एहसास होता है कि अब बड़े बेटे के तौर पर परिवार में फैसले लेने की जिम्मेदारी आप पर आ गई है।”
वह मेरी जिंदगी के हीरो हैं
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार जितेश ने कहा, ‘बस इतना ही नहीं आपको अपनी मां, भाई और परिवार का ख्याल रखना है इसलिए मैं ऐसा इंसान हूं जो उन्हें अपनी भावनाएं नहीं दिखा सकता और उनके सामने कमजोर नहीं हो सकता।’ जितेश ने कहा कि उन्होंने अपने करियर को आगे बढ़ाते हुए दुख के साथ जीना सीख लिया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा, ‘मैंने अभ्यास के दौरान उस दुख और उस खोखलेपन को झेलना सीख लिया है। क्योंकि मैं कितना भी चाहूं मैं उस चीज को भूल नहीं सकता। क्योंकि वह तुम्हारे पिता हैं। वह मेरी जिंदगी के हीरो हैं।’
जाओ और अभ्यास करो
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार जितेश ने कहा, ‘अगर वह आज जिंदा होते तो वह मेरे से कहते कि जाओ और अभ्यास करो। मेरी चिंता मत करो। इसलिए मैं हमेशा यह बात अपने दिमाग में रखता हूं कि अगर मैं दुख या दर्द में होता तो वह मुझे क्या कहते? मुझे लगता है कि वह मुझे जाकर मैच खेलने का सुझाव देते। और मुझे इस पर बहुत गर्व है।’
निजी मुश्किलों के बाद मैदान पर वापसी के लिए चाहिए मजबूत हौसला
जितेश ने टीम के साथी रिंकू सिंह का जिक्र करते हुए कहा कि वह समझते हैं कि निजी मुश्किलों के बाद मैदान पर लौटने के लिए कितनी भावनात्मक ताकत चाहिए होती है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा, “यही वह चीज है जो रिंकू ने भी महसूस की होगी, तभी वह दोबारा मैदान पर लौट पाए। और सच कहूं तो यह बहुत बड़ी बात है।”
विराट कोहली से मिली आगे बढ़ने की प्रेरणा
टीम में संजू सैमसन और इशान किशन जैसे विकेटकीपर बल्लेबाजों की मौजूदगी पर जितेश शर्मा ने कहा कि वह इसे अलग नजरिए से देखते हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उनके मुताबिक, क्यों न टीम में दो विकेटकीपर एकादश में हों और तीसरा खिलाड़ी फिनिशर की भूमिका निभाए। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा, “बिल्कुल ऐसा भी हो सकता है, क्यों नहीं?” जितेश ने रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु में विराट कोहली को करीब से देखने के अनुभव के बारे में भी बात की। उन्होंने माना कि भारत के पूर्व कप्तान के जज्बे और जुनून की बराबरी करना आसान नहीं है, लेकिन उनसे काफी प्रेरणा मिलती है।

