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Tuesday, March 10, 2026

पेरिस ओलिंपिक विवाद के बाद वर्ल्ड बॉक्सिंग का बड़ा फैसला, महिला मुक्केबाजों के लिए अनिवार्य हुआ जेंडर टेस्ट, फेल होने पर टूर्नामेंट में नहीं मिलेगी एंट्री

नई दिल्ली। वर्ल्ड बॉक्सिंग ने बड़ा फैसला लेते हुए महिला मुक्केबाजों के लिए जेंडर टेस्ट अनिवार्य कर दिया है। संगठन ने साफ कहा है कि बिना टेस्ट पास किए अब कोई भी बॉक्सर अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं ले सकेगी। इसकी शुरुआत 4 से 14 सितंबर तक इंग्लैंड के लिवरपुल में होने वाली वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप से होगी। यह टेस्ट पॉलिमरेज चेन रिएक्शन (PCR) या जेनेटिक स्क्रीनिंग के जरिए किया जाएगा, जिसमें Y क्रोमोसोम की मौजूदगी या गैरमौजूदगी की जांच की जाएगी। अगर किसी महिला खिलाड़ी में Y क्रोमोसोम पाया गया तो उसे महिला वर्ग में खेलने की अनुमति नहीं मिलेगी। वर्ल्ड बॉक्सिंग अध्यक्ष बोरिस वान डेर वोर्स्ट ने कहा कि “हम सभी व्यक्तियों की गरिमा का सम्मान करते हैं, लेकिन बॉक्सिंग जैसे खेल में खिलाड़ियों की सुरक्षा और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा बनाए रखना हमारी जिम्मेदारी है।”

यह नियम हाल ही में हुए पेरिस ओलिंपिक 2024 के विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है। ओलिंपिक में अल्जीरिया की मुक्केबाज इमान खलीफ के जेंडर पर सवाल उठे थे। उन्होंने 66 किलो वेट कैटेगरी में गोल्ड मेडल जीता था, लेकिन प्रतिद्वंद्वी ने मुकाबले से हटते हुए आरोप लगाया था कि उनके सामने “पुरुष खिलाड़ी” उतारे गए हैं। इसके बाद मामला काफी विवादों में रहा। अब वर्ल्ड बॉक्सिंग ने इस तरह के विवाद से बचने के लिए यह कदम उठाया है। बता दें कि एथलेटिक्स में भी 1 सितंबर 2025 से यह नियम लागू हो रहा है, और टोक्यो में होने वाली वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में खिलाड़ी बिना टेस्ट पास किए हिस्सा नहीं ले पाएंगे।

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