नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट टीम ने इंग्लैंड के खिलाफ चौथा टेस्ट रोमांचक हालात में ड्रॉ कराया। एक समय ऐसा लग रहा था कि टीम इंडिया यह मुकाबला हार सकती है, लेकिन गिल की कप्तानी में टीम ने शानदार वापसी की। जडेजा और वाशिंगटन सुंदर की साहसी बल्लेबाज़ी ने टीम को हार से बचा लिया। इंग्लैंड ने जब पहली पारी में 311 रन की लीड ले ली थी और बेन स्टोक्स के खेमे में खुशी ही खुशी थी कि हम ये मैच शायद पारी से जीत लेंगे, लेकिन गिल, राहुल, जडेजा और सुंदर की बल्लेबाजी ने अंग्रेजों की खुशियों को मातम में बदल दिया।
भारतीय टीम को करना था निर्णायक वार, चूक गए
मैच के बाद बेन स्टोक्स ने तंज कसते हुए कहा कि भारतीय टीम ने 10-15 रन ज्यादा बना भी लिए तो उससे फर्क नहीं पड़ा। उनका इशारा इस बात पर था कि भारत मैच जीतने की स्थिति में नहीं था, इसलिए रन बढ़ाने का कोई फायदा नहीं हुआ। ये उनकी घटिया मानसिकता को जताता है कि आप अगर बैकफुट पर हैं तो रंग बदल लो और खुद का बचाव कर लो। ये सही तो कहीं से भी नहीं है। स्टोक्स के अपने गेंदबाजों की चिंता हो रही थी जो गेंदबाजी करते-करते हांफ रहे थे और विकेट मिल नहीं रहा था। उन्हें लग रहा था कि अगर वो और ज्यादा गेंदबाजी करेंगे तो पता नहीं आगे क्या होगा।
स्टोक्स की रणनीति पर उठे सवाल
पहली पारी में इंग्लैंड ने जबरदस्त बल्लेबाज़ी करते हुए 669 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया। पहली पारी में भारतीय गेंदबाजों ने 157.1 ओवर गेंदबाजी की और उन्होंने तरस नहीं दिखाई। वो तब तक खेलते रहे जब तक की उनसे सभी बल्लेबाज आउट नहीं हो गए। अब दूसरी पारी में जब उनके गेंदबाजों ने 143 ओवर ही फेंके तब उनकी जान सूखने लगी और वो भारत के सामने ड्रॉ की भीख मांगने लगे।
इंग्लैंड को और रगड़ना चाहिए था
भारतीय टीम ने यहां एक रणनीतिक गलती कर दी। उन्हें पांचवें दिन पूरे दिन बल्लेबाजी करते हुए इंग्लैंड के गेंदबाजों को थकाना चाहिए था। इससे न सिर्फ मैच में मानसिक बढ़त मिलती, बल्कि अगला टेस्ट शुरू होने से पहले इंग्लिश गेंदबाजों पर दबाव भी बनता। थकी हुई गेंदबाज़ी लाइन-अप के सामने भारत के पास सीरीज में वापसी का बड़ा मौका बन सकता था। टीम इंडिया ने रहम दिखाकर और पहले ही मैच को ड्रॉ मानते हुए पारी को समाप्त नहीं करना चाहिए था। बेन स्टोक्स को सबक सिखाने की जरूरत थी और शायद यहां हम चूक गए। ये अंग्रेज रहम के काबिल तो बिल्कुल भी नहीं थे।


