नई दिल्ली: शुभमन गिल ने जैसे ही टेस्ट क्रिकेट में भारतीय टीम की कप्तानी संभाली, उनके प्रदर्शन में जबरदस्त बदलाव देखने को मिला है। ऐसा प्रतीत होता है कि नेतृत्व की ज़िम्मेदारी ने उनके खेल को और भी निखार दिया है। इंग्लैंड के खिलाफ विदेशी धरती पर कप्तान के रूप में उन्होंने जो प्रदर्शन किया, वह सराहनीय था। गिल ने उस सीरीज़ में पांच टेस्ट मैचों में कुल 754 रन बनाए थे। अब वेस्टइंडीज के खिलाफ चल रही टेस्ट सीरीज़ में भी उन्होंने उसी शानदार फॉर्म को बरकरार रखा है। मौजूदा मुकाबले में उन्होंने न सिर्फ टीम को मज़बूत स्थिति में पहुंचाया, बल्कि व्यक्तिगत तौर पर भी एक अहम उपलब्धि हासिल की। गिल ने टेस्ट करियर का अपना आठवां अर्धशतक पूरा किया, जो उनके लिए बतौर कप्तान भारत में और कुल मिलाकर कप्तानी में पहला हाफ सेंचुरी है। इससे पहले उन्होंने चारों बार शतक ही जड़े थे। इसके साथ ही उन्होंने अंतरराष्ट्रीय टेस्ट क्रिकेट में 3000 रन का आंकड़ा छूते हुए एक खास ‘तिहरा शतक’ भी अपने नाम किया।
भारत का स्कोर जब 161 रन था तब शुभमन गिल ने चौका लगाकर भारत को वेस्टइंडीज के 162 रनों से पार पहुंचाते हुए बढ़त दिलाई। इसके अलावा उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में अपने 300 चौके भी पूरे कर लिए। भारतीय कप्तान शुभमन गिल ने इंग्लैंड दौरे पर चार शतक लगाए थे। हालांकि बतौर कप्तान वह अपने पांचवें टेस्ट शतक से चूक गए और 50 रन बनाकर वेस्टइंडीज के कप्तान रॉस्टन चेज का शिकार बने। साल 2025 में शुभमन गिल अभी तक 837 बना चुके हैं। वहीं वह इस साल विश्व टेस्ट चैंपियनशिप में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी भी हैं।
कप्तानी ने बदली गिल की तकदीर!
शुभमन गिल को कप्तानी मिलने के बाद उनके बल्लेबाजी करियर में बड़ा बदलाव आया है, यह कहना बिल्कुल सही होगा। उन्होंने कप्तानी की शुरुआत इंग्लैंड सीरीज में जबरदस्त प्रदर्शन से की थी। फिर भारत में बतौर कप्तान अपने पहले मैच में भी उन्होंने प्रभावशाली पारी खेली और अपना अर्धशतक पूरा किया, जिससे उनके शानदार फॉर्म का पता चला। हालांकि, इस पारी को वह शतक में तब्दील नहीं कर पाए। अब तक बतौर कप्तान गिल ने कुल 6 टेस्ट मैच खेले हैं, जिनमें उन्होंने 804 रन बनाए हैं, जिसमें 4 शतक और एक अर्धशतक शामिल है। यह पहली बार था जब उन्होंने कप्तानी में 50 रन बनाकर शतक तक का सफर पूरा नहीं किया।
शुभमन गिल ने अपने टेस्ट करियर की शुरुआत रोहित शर्मा के साथ ओपनिंग करते हुए की थी। लेकिन यशस्वी जायसवाल के टीम में शामिल होने के बाद गिल को नंबर 3 पर खेलने का मौका मिला, जहाँ उन्होंने चेतेश्वर पुजारा की जगह संभाली। इसके बाद जब रोहित शर्मा ने टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लिया और गिल टीम के कप्तान बने, तब उन्होंने नंबर 4 की भूमिका को मजबूती से अपनाया। इस पोजीशन पर भारतीय टीम के लिए पहले दिग्गज बल्लेबाज विराट कोहली ने भी लंबे समय तक प्रदर्शन किया है। वहीं, सचिन तेंदुलकर भी व्हाइट-बॉल क्रिकेट में ओपनिंग करते थे, लेकिन टेस्ट मैचों में उन्होंने नंबर 4 पर बल्लेबाजी की है।

