भोपाल. पूर्व केंद्रीय मंत्री और भारतीय हॉकी के दिग्गज खिलाड़ी असलम शेर खान ने स्पोर्ट्स टाइम्स से कहा कि ओबैदुल्लाह खान गोल्ड कप टूर्नामेंट, जो एक समय भारतीय हॉकी का गौरव हुआ करता था, आज गुमनामी में खो गया है। 1931 में भोपाल में शुरू हुआ यह टूर्नामेंट न केवल भारत का प्रतिष्ठित हॉकी आयोजन था, बल्कि इसने सैकड़ों खिलाड़ियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई।
असलम शेर खान ने कहा कि यह टूर्नामेंट भोपाल और भारत की हॉकी विरासत का प्रतीक है। “यह वह टूर्नामेंट है जिसने देश को गर्व दिलाया, और हमें अपने खिलाड़ियों पर नाज़ करने का मौका दिया।
असलम शेर खान ने कहा कि आज वह एक अलग, लेकिन उतनी ही जरूरी लड़ाई लड़ रहे हैं – भारतीय हॉकी विरासत को बचाने की। उन्होंने आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश सरकार इस ऐतिहासिक टूर्नामेंट को फिर से शुरू करने में कोई रुचि नहीं दिखा रही है, जबकि इसे संरक्षित करना सरकार की जिम्मेदारी होनी चाहिए थी।
“मैंने भारत के लिए हॉकी के मैदान पर लड़ाई लड़ी है। अब मैं अपने अतीत और हमारी अगली पीढ़ी के लिए लड़ रहा हूं,” उन्होंने कहा। उन्होंने साफ किया कि वह अब इस टूर्नामेंट को सरकारी मदद से नहीं, बल्कि हॉकी प्रेमियों की मदद से फिर से शुरू करना चाहते हैं।
हॉकी प्रेमियों से समर्थन की अपील
असलम शेर खान ने सभी हॉकी प्रेमियों से भावुक अपील करते हुए कहा – “अब इंतजार मत करो। उपेक्षा को और मत सहो। जो लोग इस खेल से प्यार करते हैं, वे इस टूर्नामेंट के असली संरक्षक बनें।”
उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य है कि इस साल के अंत तक इतना फंड इकट्ठा किया जाए जिससे टूर्नामेंट को स्वतंत्र रूप से और सम्मानपूर्वक आयोजित किया जा सके। उन्होंने कहा कि अगर कभी इस खेल ने आपके दिल को छुआ है, अगर आपको ऐशबाग स्टेडियम की भीड़ और गर्व का अहसास याद है, तो मैं आपसे कहता हूं – मेरे साथ खड़े होइए,”
अगर कोई इस पहल में सहयोग करना चाहता है, तो असलम शेर खान ने उन्हें सीधा मैसेज करने का निवेदन किया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि दिया गया हर एक रुपया केवल हॉकी के इस ऐतिहासिक टूर्नामेंट को फिर से जीवित करने में खर्च किया जाएगा।

