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Tuesday, March 10, 2026

ISSF World Cup: सिमरनप्रीत ने दिलाया स्वर्ण पदक, मनु भाकर नहीं कर पाईं प्रभावित

नई दिल्ली: दोहा में जारी ISSF वर्ल्ड कप में भारत का शानदार प्रदर्शन जारी है और अब देश के खाते में कुल 6 पदक दर्ज हो चुके हैं। रविवार का दिन भारतीय शूटिंग के लिए खास रहा, जब युवा निशानेबाज़ सिमरनप्रीत कौर बरार ने बेहद कड़े और दबाव भरे मुकाबले में शानदार प्रदर्शन करते हुए महिलाओं की 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा में स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इसी के साथ उन्होंने देश को इस प्रतियोगिता का एक और गोल्ड दिलाया। दूसरी ओर, भारत के 50 मीटर राइफल थ्री पोज़ीशन विशेषज्ञ ऐश्वर्य प्रताप सिंह तोमर ने अपने पहले ही ISSF वर्ल्ड कप फाइनल में गजब का प्रदर्शन करते हुए रजत पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया। इन दोनों उपलब्धियों ने भारतीय दल के मनोबल को और ऊँचा किया है तथा भारत के पदक tally को मजबूती से आगे बढ़ाया है।

इसके साथ ही विश्व चैंपियनशिप की 25 मीटर रैपिड-फायर पिस्टल स्पर्धा के रजत पदक विजेता अनीश भानवाला ने भी बेहतरीन फॉर्म जारी रखते हुए इस बार दूसरा स्थान हासिल किया। उनकी इस उपलब्धि ने भारत की पदक संख्या को और मजबूत करते हुए कुल छह पदकों तक पहुँचा दिया है, जिनमें दो स्वर्ण, तीन रजत और एक कांस्य शामिल हैं। इस दमदार प्रदर्शन की बदौलत भारत ने दूसरे दिन भी अपनी लय बनाए रखी और पदक तालिका में चीन के बाद दूसरा स्थान सुरक्षित रखा। शीर्ष पर मौजूद चीन के नाम अब तक तीन स्वर्ण, दो रजत और तीन कांस्य पदक हैं, जिससे मुकाबला बेहद रोमांचक बना हुआ है।

मनु भाकर रहीं संघर्षरत, प्रशंसकों को किया निराश

महिलाओं की थ्री पोजीशन स्पर्धा में सिफत कौर सामरा और महिलाओं की 25 मीटर पिस्टल में मनु भाकर क्वालिफिकेशन चरण से आगे नहीं बढ़ पाईं। सिफत ने अपनी रिले में 584 का स्कोर किया और 10वें स्थान पर रहीं, जबकि मनु 581 के स्कोर के साथ अपने नौवें स्थान पर रहीं। 25 मीटर रैपिड फायर पिस्टल में अनीश ने मौजूदा विश्व चैंपियन फ्रांस के क्लेमेंट बेसागुएट के साथ तनावपूर्ण शूट-ऑफ में जीत हासिल करके खुद को स्वर्ण पदक की दौड़ में बनाए रखा। चीन के पेरिस ओलंपिक चैंपियन ली यूहोंग ने 33 अंक के साथ स्वर्ण पदक जीत लिया जबकि अनीष ने 31 अंक से रजत पदक जीता। बेसागुएट तीसरे स्थान पर रहे और ओलंपियन विजयवीर सिद्धू उनके पीछे चौथे स्थान पर रहे।

बलिदान से सफलता तक—सिमरनप्रीत का चमकता सफर

आपको बता दें कि इस वर्ल्ड कप में स्वर्ण पदक जीतने वाली सिमरनप्रीत कौर बरार पहले भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुकी हैं। इससे पहले उन्होंने लीमा वर्ल्ड कप में रजत पदक अपने नाम किया था। उनकी सफलता के पीछे परिवार का बड़ा योगदान रहा है—खासकर उनके पिता का, जिन्होंने अपनी बेटी के सपनों को पूरा करने के लिए सरकारी नौकरी तक छोड़ दी, और यह त्याग उनके सफर का सबसे महत्वपूर्ण आधार बना। फाइनल में सिमरनप्रीत ने जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए 41 का शानदार स्कोर बनाया, जो न केवल उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि रही, बल्कि उन्होंने विश्व जूनियर रिकॉर्ड की बराबरी भी कर डाली। इस स्वर्णिम जीत ने उनके माता-पिता का सिर गर्व से ऊँचा कर दिया और साबित कर दिया कि उनके पिता का किया गया बलिदान सचमुच फलदायक रहा।

फाइनल में क्या बदला खेल? सिमरनप्रीत का कमाल

आठ निशानेबाज़ों के लिए आयोजित फाइनल में भारत की दो खिलाड़ियों ने क्वालीफाई किया, लेकिन उनका प्रदर्शन अलग-अलग रहा। ईशा सिंह, जिन्होंने क्वालिफिकेशन में 585 अंक बनाकर चौथे स्थान से फाइनल में प्रवेश किया था, निर्णायक मुकाबले में लय बनाए नहीं रख सकीं और अंततः सातवें स्थान पर रहीं। दूसरी ओर, ओलंपिक में दो कांस्य पदक जीत चुकी मनु भाकर की चुनौती क्वालिफिकेशन दौर में ही खत्म हो गई। उन्होंने 581 का स्कोर बनाया और नौवें स्थान पर रहते हुए फाइनल के लिए क्वालीफाई नहीं कर पाईं। वहीं, 21 वर्षीय सिमरनप्रीत, जिन्होंने क्वालिफिकेशन में 585 अंक जुटाकर पाँचवें स्थान से फाइनल में जगह बनाई, ने शानदार वापसी करते हुए आगे चलकर स्वर्ण जीतकर भारत का मान बढ़ाया।

फाइनल की शुरुआत सिमरनप्रीत के लिए उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। पहले पाँच शॉट की शुरुआती सीरीज़ में वह तीन निशाने चूक गईं, जिसके चलते वह सीधे आठवें यानी अंतिम स्थान पर खिसक गईं। लेकिन यहीं से कहानी पलटने लगी—दबाव के बीच सिमरनप्रीत ने अपना आत्मविश्वास वापस पाया और शानदार वापसी करते हुए लगातार तीन परफेक्ट ‘5’ के शॉट दागे। उनकी इस दमदार लय ने मुकाबले की तस्वीर बदल दी और उन्होंने चीन की शीर्ष निशानेबाज़ तथा मौजूदा 10 मीटर एयर पिस्टल विश्व चैंपियन याओ कियानक्सुन (36 अंक, रजत) को भी पीछे छोड़ दिया। साथ ही जर्मनी की पूर्व विश्व चैंपियन डोरेन वेनेकैंप, जिन्हें अंत में कांस्य मिला, भी सिमरनप्रीत की उभरती हुई रफ्तार का सामना नहीं कर सकीं। शानदार संयम और सटीक निशानेबाज़ी की बदौलत सिमरनप्रीत फाइनल की सबसे बड़ी स्टार बनकर उभरीं।

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