नई दिल्ली: इंडिया ए ने सेमीफाइनल में बांग्लादेश ए के खिलाफ पूरे मैच के दौरान शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन निर्णायक सुपर ओवर में टीम लड़खड़ा गई और मुकाबला हाथ से निकल गया। हार के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि सुपर ओवर में बैटिंग के लिए वैभव सूर्यवंशी को क्यों नहीं भेजा गया। वैभव पूरे टूर्नामेंट में भारत के सबसे सफल बल्लेबाज़ रहे थे और उनकी आक्रामक शैली सुपर ओवर के लिए बिल्कुल सही मानी जा रही थी। इसी फैसले पर अब सबसे अधिक चर्चा और आलोचना हो रही है।
भारत ने सुपर ओवर में अपने दोनों विकेट बिना कोई रन बनाए गंवा दिया और बांग्लादेश की टीम को वाइड पर पर एक रन मिल गई और ये टीम फाइनल में पहुंच गई। वैभव अगर सुवर ओवर में आते तो कुछ कमाल हो सकता था, लेकिन उन्हें बैटिंग के लिए क्यों नहीं भेजा गया इसके बारे में टीम के कप्तान जितेश शर्मा ने मैच के बाद प्रेजेंटेशन सेरेमनी में बताया।
हार पर जितेश शर्मा का बड़ा बयान
जितेश शर्मा ने इस फैसले पर खुलकर बात करते हुए कहा कि वैभव सूर्यवंशी और प्रियांश आर्या पावरप्ले ओवरों में तेजी से रन बनाने में माहिर हैं, लेकिन सुपर ओवर जैसी स्थिति में उनकी भूमिका उतनी प्रभावी नहीं मानी गई। कप्तान के अनुसार, आशुतोष शर्मा और रमनदीप सिंह ऐसे बल्लेबाज़ हैं जो डेथ ओवर्स में अपनी पसंदीदा शॉट्स से मैच का रुख पलटने की क्षमता रखते हैं। इसी सोच के तहत टीम मैनेजमेंट और उन्होंने मिलकर यह निर्णय लिया कि सुपर ओवर में उनके साथ बल्लेबाजी करने के लिए आशुतोष शर्मा को भेजा जाए।
जितेश शर्मा ने सेमीफाइनल में मिली हार की पूरी जिम्मेदारी लेते हुए कहा कि सीनियर खिलाड़ी होने के नाते मैच को खत्म करना उनकी ज़िम्मेदारी थी। उन्होंने स्वीकार किया कि यह हार उनके लिए सीखने का मौका है, न कि निराशा का कारण। उन्होंने टीम के युवा खिलाड़ियों की तारीफ करते हुए कहा कि किसी भी दिन यही खिलाड़ी भारत के लिए वर्ल्ड कप भी जीत सकते हैं, क्योंकि टैलेंट के मामले में वे आसमान छू रहे हैं। जितेश के अनुसार, यह हार नहीं बल्कि अनुभव जोड़ने का चरण है। उन्होंने साफ कहा कि इस मुकाबले का निर्णायक मोड़ उनका विकेट गिरना ही था, जिसने मैच की दिशा बदल दी।


