नई दिल्ली : संजू सैमसन… एक ऐसा नाम जो इंटरनेशनल क्रिकेट में अक्सर चर्चा में रहा, लेकिन लगातार मौके शायद ही कभी मिले। भारतीय टीम में उनकी जगह लंबे समय तक पक्की नहीं रही। आईपीएल में राजस्थान रॉयल्स के लिए शानदार कप्तानी, टी20 क्रिकेट में 8 हजार से ज्यादा रन और लगातार दमदार प्रदर्शन के बावजूद, टीम इंडिया की जर्सी में उन्हें मैदान से ज्यादा बेंच पर बैठना पड़ा। ICC मेन्स टी20 वर्ल्ड कप 2026 से पहले भी हालात कुछ अलग नहीं थे, लेकिन इस बार कहानी ने नया मोड़ लिया।
संजू सैमसन का फॉर्म भी लगातार उनका साथ नहीं देता है। उनके क्लास, उनके बैटिंग स्टाइल और उनके टैलेंट पर किसी को कभी शक नहीं रहा, लेकिन उसको साबित करने में कई बार संजू की किस्मत ने धोखा दिया। ऐसा ही टी20 वर्ल्ड कप से पहले देखने को मिल रहा था। 2024 में पूरे टूर्नामेंट में यह खिलाड़ी बेंच पर ही था। इस बार भी हालात ऐसे ही बनते दिख रहे थे। वर्ल्ड कप से ठीक पहले उनकी ओपनिंग पोजीशन और विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी इशान किशन को दे दी गई।
करियर के मोड़ पर संजू का बड़ा जवाब
हर किसी का मानना था कि यह संजू की कहानी का अंत है…। पर किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। भगवान ने संजू के लिए जिंदगी का एक ऐसा खूबसूरत लम्हा संजो कर रखा था जिसकी भनक किसी को नहीं थी। बीच वर्ल्ड कप सुपर 8 के पहले मैच में टीम इंडिया साउथ अफ्रीका से हारती है। फिर सवाल उठते हैं, आलोचना होती है। इसके बाद कोच और कप्तान कॉम्बिनेशन को खंगालते हैं और फिर संजू को आजमाते हैं।
इस तरह एक बार फिर संजू की बतौर ओपनर वापसी होती है। पहले मैच में वह अच्छा स्टार्ट देते हैं और टीम को लंबे अरसे बाद अच्छी ओपनिंग पार्टनरशिप देखने को मिलती है। उसके बाद आता है वो मैच जो शायद संजू की खत्म होती कहानी का अब सबसे खूबसूरत चैप्टर बनकर याद किया जाएगा। वेस्टइंडीज के खिलाफ ओपनिंग से अंत तक 50 गेंद पर 97 रन की पारी और अकेले दम पर भारत को सेमीफाइनल में पहुंचाने वाले चेट्टा ने साबित कर दिया कि क्यों उनकी इतनी फैन फॉलोइंग है।
संजू सैमसन होना आसान नहीं: मौके कम, जज़्बा बड़ा
Sanju Samson की बात करें तो उन्हें भारतीय क्रिकेट के सबसे दुर्भाग्यशाली खिलाड़ियों में गिना जा सकता है। उन्होंने 2015 में अपना टी20 इंटरनेशनल करियर शुरू किया, लेकिन पिछले 11 साल में वह टीम इंडिया के लिए सिर्फ 60 मुकाबले ही खेल सके। 52 पारियों में 1221 रन, 150 से ज्यादा का स्ट्राइक रेट और लगभग 26 का औसत इस बात का प्रमाण है कि इस खिलाड़ी में कितनी काबिलियत है। बावजूद इसके, टीम कॉम्बिनेशन, प्रतिस्पर्धा और परिस्थितियों के दबाव के कारण उनकी जगह कभी भी भारतीय टीम में स्थायी नहीं हो पाई।
संजू सैमसन ने हर बड़े मौके पर भारत के लिए उपयोगी पारियां खेलीं। एशिया कप फाइनल में टॉप ऑर्डर के फेल होने पर संजू ने ही तिलक के साथ पारी को संभाला था। साउथ अफ्रीका दौरे पर वनडे मैच में जब टीम डगमगाई थी तो संजू ने ही शतक लगाकर टीम को जिताया था। अब टी20 वर्ल्ड कप 2026 में जब भारत फंसा था तो संजू आए, संजू चमके और संजू ने टीम इंडिया को सेमीफाइनल में पहुंचा दिया। इस पारी और पिछली कुछ पारियों में अंतर बस इतना था कि वहां संजू साइड हीरो थे लेकिन अब संजू लीड हीरो बनकर सामने आए हैं।
संजू सैमसन ने तमाम दबाव, आलोचनाओं और अस्थिर मौके मिलने के बावजूद सबसे अहम मुकाबले में जिस तरह का मैच विनिंग प्रदर्शन किया, वह उनके शांत और सरल स्वभाव को साफ दिखाता है। बड़े मंच पर 97 रन की नाबाद पारी खेलकर उन्होंने साबित कर दिया कि मानसिक मजबूती क्या होती है। जीत दिलाने वाला चौका लगाने के बाद मैदान पर बैठकर ईश्वर का धन्यवाद करना और ड्रेसिंग रूम में जाकर अपनी किट व बल्ले को प्रणाम करना उनके संस्कार और विनम्रता को दर्शाता है। यही वजह है कि कहा जाता है—संजू होना आसान नहीं है। उन्होंने यह भी दिखा दिया कि संजू जैसा बनना हर किसी के बस की बात नहीं होती।

