सिंगापुर. भारत का पारंपरिक खेल खो-खो अब देश की सीमाओं से बाहर निकलकर दुनियाभर में पहचान बना रहा है। इसी कड़ी में सिंगापुर में पहली बार खो-खो का एक खास आयोजन हुआ, जिसमें सिंगापुर और मलेशिया की टीमों के बीच प्रदर्शनी मैच खेला गया। यह आयोजन एशियन खो-खो फेडरेशन और खो-खो एसोसिएशन ऑफ सिंगापुर ने मिलकर किया। मैच सिंगापुर के जुरोंग वेस्ट सेकेंडरी स्कूल में हुआ। सिंगापुर की टीम सिर्फ तीन महीने पहले बनी है, लेकिन उसने मलेशिया की अनुभवी टीम के सामने शानदार खेल दिखाया। दिनभर चले इस कार्यक्रम में बच्चों के लिए खो-खो की ट्रेनिंग, थ्योरी प्रेजेंटेशन और मैत्री मैच भी हुए। 180 से ज्यादा बच्चों ने इन गतिविधियों में हिस्सा लिया। उन्हें खेल के नियम, चालें और रणनीति सिखाई गईं।खो-खो फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष सुधांशु मित्तल ने कहा कि आज का दिन खो-खो के इतिहास में ऐतिहासिक है। यह खेल अब केवल भारत तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे एशिया में फैलेगा।
एशियन खो-खो फेडरेशन के अध्यक्ष अस्लाम शेर खान ने कहा कि यह सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि युवा प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने और नई पहचान दिलाने का मौका है। सह-सचिव क्षितिज अग्रवाल ने बताया कि चार स्कूलों की टीमें शामिल हुईं और छात्रों ने काफी जोश से खेला।

