एनएसटी न्यूज, भोपाल। मध्य प्रदेश के भोपाल के 12 वर्षीय शतरंज खिलाड़ी माधवेन्द्र प्रताप शर्मा लगातार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन कर रहे हैं। थाईलैंड में हुई एशियन यूथ शतरंज चैंपियनशिप में उन्होंने अंडर-12 वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर खिताब अपने नाम किया और फीडे मास्टर बनने की उपलब्धि हासिल की। इसके साथ ही वह मध्य प्रदेश के सबसे कम उम्र के फीडे मास्टर बन गए हैं। हाल ही में मलेशिया में आयोजित कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में भी उन्होंने स्वर्ण पदक जीता था।

बातचीत में माधवेन्द्र ने अपने सपनों और चुनौतियों को खुलकर साझा किया। उन्होंने कहा कि उनका अगला लक्ष्य नेशनल जूनियर की तैयारी करना है। उसके बाद वे यूरोप जाकर इंटरनेशनल मास्टर बनने की राह पर आगे बढ़ना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि यूरोप में लगातार मजबूत प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ खेलना जरूरी होता है, लेकिन इसके लिए उन्हें आर्थिक सहयोग की जरूरत है। उन्होंने उम्मीद जताई कि कोई न कोई प्रायोजक जल्द आगे आएगा, ताकि वे अपने करियर को सही दिशा दे सकें।

माधवेन्द्र ने बताया कि थाईलैंड की प्रतियोगिता उनके लिए आसान नहीं थी। स्पर्धा शुरू होने से पहले उनका लैपटॉप खराब हो गया, जिससे तैयारी में बड़ी दिक्कत आई। उन्होंने कहा कि आज के समय में शतरंज तैयारी पूरी तरह तकनीक पर निर्भर करती है, ऐसे में लैपटॉप टूटना बड़ा झटका था। इसके बावजूद उन्होंने छह जीत और तीन ड्रॉ के साथ 7.5 अंक बनाते हुए पहला स्थान हासिल किया। स्टेशन पर लौटने पर उनका भव्य स्वागत हुआ। माता पिता, परिवार, दोस्त और शतरंज प्रेमी तिरंगा लेकर ढोल-नगाड़ों के साथ पहुंचे। उनके दादा, जिन्होंने बचपन में उन्हें शतरंज सिखाया था, खुशी से झूमते नजर आए। माधवेन्द्र का कहना है कि उनका सपना सिर्फ ग्रांडमास्टर बनना नहीं है, बल्कि आने वाले समय में विश्व विजेता बनकर देश का नाम और ऊंचा करना है। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें उचित सहयोग मिला, तो वे इस लक्ष्य से ज्यादा दूर नहीं हैं।

