31.6 C
New Delhi
Saturday, March 14, 2026

खिताब खोया, कांस्य के लिए दो बार की चैंपियन से भिड़ंत: पीआर श्रीजेश की बड़ी चुनौती

नई दिल्ली: भारतीय जूनियर हॉकी टीम को मेन्स जूनियर वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में जर्मनी के खिलाफ करारी हार का सामना करना पड़ा। चेन्नई में आयोजित इस टूर्नामेंट में टीम का विश्व चैंपियन बनने का सपना टूटा, लेकिन भारत के लिए अभी भी पदक जीतने का अवसर जीवित है। अब भारतीय टीम कांस्य पदक के लिए अर्जेंटीना से मुकाबला करेगी और तीसरे स्थान पर कब्जा करने की पूरी कोशिश करेगी।

इस मैच में टीम के कोच पीआर श्रीजेश पर बड़ी जिम्मेदारी होगी, क्योंकि उन्हें यह सुनिश्चित करना है कि टीम पुरानी गलतियों से सीख लेकर उन्हें दोहराए बिना खेल सके और देश के लिए मेडल जीत सके। टीम इंडिया बुधवार को अर्जेंटीना के खिलाफ मैदान में उतरेगी। भारत ने जूनियर मेन्स वर्ल्ड कप का खिताब आखिरी बार 2016 में जीतकर चैंपियनशिप में अपना नाम दर्ज किया था। अब नौ साल बाद, पदक जीतने के लिए टीम को मानसिक दबाव में आकर की जाने वाली गलतियों की आदत से पार पाना होगा और संगठित, आत्मविश्वासी खेल दिखाना होगा।

पिछले दो विश्व कप में चौथे स्थान पर रही भारतीय टीम को उन गलतियों को दोहराने से बचना होगा जो सेमीफाइनल में सात बार की चैंपियन जर्मनी के खिलाफ हुईं थीं। भारत को सेमीफाइनल में जर्मनी ने 5-1 से हराया था। भुवनेश्वर में 2021 में और कुआलालम्पुर में 2023 में हुए जूनियर विश्व कप में भारत क्रमश: फ्रांस और स्पेन से 3-1 से हारकर चौथे स्थान पर रहा था।

दो बार की चैंपियन अर्जेंटीना की चुनौती आसान नहीं होगी

होबार्ट में 2001 के बाद भारत ने दूसरा और आखिरी खिताब 2016 में लखनऊ में जीता था। टोक्यो और पेरिस ओलंपिक में कांस्य पदक जीत चुके भारतीय टीम के मुख्य कोच पी आर श्रीजेश को बखूबी पता है कि यह पदक उनकी टीम के लिए कितना जरूरी है। उन्हें यह भी अहसास है कि सेमीफाइनल में स्पेन के खिलाफ आखिरी मिनटों में गोल गंवाकर 1-2 से हारी अर्जेंटीना की चुनौती को कमतर नहीं आंका जा सकता। दो बार की चैम्पियन अर्जेंटीना ने 2021 में फाइनल में जर्मनी को 4-2 से हराकर खिताब जीता था।

नॉकआउट चरण में हुई प्रमुख गलतियां

राउंड रॉबिन चरण में शानदार फॉर्म में रही भारतीय टीम ने कुल 29 गोल किए और एक भी गोल नहीं गंवाया, जिससे गोलकीपर और डिफेंस को कोई चुनौती नहीं मिल सकी। क्वार्टर फाइनल में बेल्जियम के खिलाफ मैच में भारत 45 मिनट तक एक गोल से पिछड़ता रहा, लेकिन तीन मिनट के भीतर कप्तान रोहित और शारदानंद तिवारी के गोलों के दम पर टीम ने बढ़त हासिल कर ली। हालांकि, आखिरी सीटी बजने से ठीक पहले एक गोल गंवाने के कारण मैच पेनल्टी शूटआउट तक चला गया।

शूटआउट में हालांकि भारत ने जीत दर्ज की लेकिन मैच निर्धारित समय के भीतर ही खत्म हो सकता था। इसके बाद डिफेंडिंग चैम्पियन जर्मनी के सामने तो भारतीय डिफेंस पूरी तरह चरमरा गया और फॉरवर्ड खिलाड़ी गोल करने के मौके ही नहीं बना सके। पूरे मैच में भारत को एकमात्र पेनल्टी कॉर्नर मिला जबकि जर्मन टीम ने ‘वन टच’ यूरोपीय हॉकी खेलकर दबाव बनाए रखा।

इस हार के बाद कोच श्रीजेश ने कहा था,‘‘ हमें अपने खेल पर नियंत्रण रखना सीखना होगा और बड़ी टीमों को इतने मौके देने से बचना होगा। विरोधी टीम के अच्छा खेलने पर दबाव में आकर हम अपने बेसिक्स ही भूल जाते हैं जिससे उबरना होगा। गोल करने के मौके बनाना और तब्दील करना जरूरी है । छोटी छोटी गलतियां ही भारी पड़ रही हैं जिनसे बचना होगा।’’

भारत की क्वार्टर फाइनल की जीत के नायक रहे गोलकीपर प्रिंसदीप सिंह ने टूर्नामेंट में अच्छा प्रदर्शन किया है लेकिन पूरे डिफेंस को एक ईकाई के रूप में अच्छा खेलना होगा। वहीं फॉरवर्ड प्लेयर्स को सर्किल के भीतर गलतियां करने , लंबे हवाई पास और गेंद पर नियंत्रण खो देने की कमी को दूर करना होगा। पूल चरण में शानदार प्रदर्शन करने वाले दिलराज सिंह, अर्शदीप सिंह, मनप्रीत सिंह और खुद कप्तान रोहित को उसी लय में खेलना होगा।

दूसरी ओर, अर्जेंटीना की टीम अपने पूल में तीन में से दो मैच जीतकर शीर्ष पर रही और क्वार्टर फाइनल में उसने नीदरलैंड को एक गोल से हराया। टूर्नामेंट से पहले भारत और अर्जेंटीना ने मेयर राधाकृष्णन स्टेडियम में तीन अभ्यास मैच खेले थे, जिसमें पहला मैच 1-1 से ड्रॉ रहा, दूसरा मैच भारत ने 5-3 से और तीसरा मैच अर्जेंटीना ने 2-1 से अपने नाम किया। भारत और अर्जेंटीना का यह मैच बुधवार, 10 दिसंबर को शाम 5.30 बजे से शुरू होगा, जिसके बाद फाइनल जर्मनी और स्पेन के बीच खेला जाएगा।

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

15,780FansLike
2,290FollowersFollow
5,445SubscribersSubscribe

Latest Articles