नई दिल्ली : 2026 एशियन रेसलिंग चैंपियनशिप के ट्रायल्स के दौरान मैट पर ऐसा जबरदस्त उलटफेर देखने को मिला, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया। फाइट के आखिरी पलों में सालों की मेहनत और कॉन्फिडेंस की असली परीक्षा हुई, जहां मीनाक्षी ने शानदार डिफेंस को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाते हुए आखिरी 20 सेकंड में पूरी बाजी पलट दी और अंतिम पंघाल को हासिल के ऑफेंसिव दांव से चित कर दिया। लंबे समय से नेशनल सर्किट पर दबदबा कायम रखने वाली अंतिम पंघाल इस अचानक हार के बाद कुछ देर तक मैट पर ही स्तब्ध पड़ी रहीं और समझ नहीं पाईं कि आखिर यह पलटवार कैसे हुआ। वहीं दूसरी ओर मीनाक्षी ने इस दमदार जीत के साथ चैंपियनशिप के लिए अपनी दावेदारी मजबूत कर दी।
मीनाक्षी ने अंतिम पंघाल से चुकाया पुराना हिसाब
इस जीत से मीनाक्षी ने न सिर्फ अपनी पुरानी हारों का हिसाब चुकता किया, बल्कि साबित किया कि बड़े मंच पर आत्मविश्वास और सही रणनीति किस तरह मैच की तस्वीर बदल सकती है। पिछले कुछ समय से डिफेंस और फिटनेस पर काम कर रही मीनाक्षी ने ट्रायल्स में जिस संयम और आक्रामकता का संतुलन दिखाया, उसने भारतीय महिला कुश्ती में नए समीकरण बनाए हैं।
नामुमकिन को मुमकिन: मीनाक्षी की ऐतिहासिक जीत
ट्रायल्स के दौरान मुकाबले में सिर्फ 20 सेकंड बाकी थे तभी 25 साल की मीनाक्षी ने कुछ ऐसा करने की कोशिश की जिसकी हिम्मत भारतीय कुश्ती में लंबे समय से किसी ने नहीं की थी। जींद की इस लड़की ने दो बार की विश्व चैंपियनशिप पदक विजेता अंतिम पंघाल को चित कर दिया। इस तरह U23 में विश्व चैंपियन रह चुकीं अंतिम पंघाल को तीन साल से भी ज्यादा समय में राष्ट्रीय सर्किट पर पहली हार का सामना करना पड़ा।
गलतियों पर काम करने से मिली सफलता
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मीनाक्षी ने मुकाबले के बाद बताया, ‘मुझे मजा आ रहा है। मैं पिछले कई वर्षों से 53 किग्रा कैटेगरी में फिट होने की तैयारी कर रही थी। मैंने अपनी पिछली गलतियों पर काम किया। पहले मैं स्कोर करने के लिए दूसरे पीरियड का इंतजार करती थी। मैं अनुभवी पहलवानों के खिलाफ मैच हार जाती थी। मैंने अंतिम की चालों का मुकाबला करने के लिए अपने डिफेंस पर भी काम किया।’
अंतिम की पहुंच से दूर रखा अपना पांव
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मीनाक्षी ने कहा, ‘मैंने अपनी चालों का इतनी बार अभ्यास किया है कि मसल मेमोरी के कारण मेरा डिफेंस मजबूत बना रहा। मैंने उसे अपना पैर नहीं दिया। हर बार जब उसने हमला किया तो मेरा पैर उसकी पहुंच से दूर पीछे हट गया। मैं अंतिम पंघाल से तीन बार (अलग-अलग ट्रायल्स में) हार चुकी थी। मुझे पता था कि वह अपना हमेशा वाला आक्रामक खेल ही खेलेगी, इसीलिए मैं अपना डिफेंस आजमाना चाहती थी।’
“अभी करना होगा सुधार” — अजय मलिक का साफ संदेश
अपने करियर की सबसे बड़ी जीतों में से एक हासिल करने के बाद भी मीनाक्षी के कोच अजय मलिक ने एशियन चैंपियनशिप से पहले सुधार के कुछ अहम क्षेत्रों की पहचान की है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अजय मलिक ने साफ कहा, “आज सब कुछ ठीक चल रहा है, लेकिन कुछ चीजों में अभी भी सुधार की गुंजाइश है। उसके पैरों की मूवमेंट असरदार नहीं थी, और भारत छोड़ने से पहले हम इसी पहलू पर खास काम करेंगे।”
मीनाक्षी का करियर भी संघर्ष और धैर्य की मिसाल रहा है। उन्होंने 2018 में कठुआ वर्ल्ड चैंपियनशिप में रजत और कठुआ एशियन चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता था, लेकिन सीनियर स्तर पर अंतरराष्ट्रीय पदक हासिल करने में उन्हें करीब 8 साल का लंबा इंतजार करना पड़ा। हाल ही में उन्होंने तिराना में आयोजित मुम्मेट मालो रैंकिंग सीरीज में रजत पदक अपनी वापसी का दमदार संकेत दिया है।
खत्म की मानसिक रुकावट, बड़ी जीत से बदली कहानी
मीनाक्षी ने अपनी सफलता के पीछे छिपी मानसिक लड़ाई को खुलकर साझा किया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा, “यह एक मानसिक रुकावट थी। अच्छी तैयारी होने के बावजूद मैं बड़े नामों से हार जाती थी, लेकिन इस बार मैंने ऐसा नहीं होने दिया। मुझे अपनी क्षमता पर शक होता था, जिसके कारण से परीक्षणों में मेरा प्रदर्शन खराब रहता था, लेकिन अब मैंने उस पर काबू पा लिया है।”
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने आगे बताया कि इस सफर में उनका परिवार सबसे बड़ा सहारा रहा। “मेरे परिवार ने हमेशा मुझसे खुद और अपनी समझ पर भरोसा रखने को कहा। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मेरे पिता ने साफ कहा कि नतीजों की चिंता किए बिना पूरी हिम्मत से मुकाबला करो,” मीनाक्षी ने कहा। अपने पहले बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट की तैयारी को लेकर उन्होंने उत्साह जताते हुए कहा, “काफी समय से मैं किसी अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट का अनुभव लेना चाहती थी। मेरे पास अंतरराष्ट्रीय स्तर का ज्यादा अनुभव नहीं है, लेकिन मुझे पता है कि मुकाबला कैसे करना है और मैं उसी आत्मविश्वास के साथ उतरूंगी।”

