नई दिल्ली : जहां खिलाड़ियों को हर दिन अपना ठिकाना बताना होता है और बिना किसी पूर्व सूचना के डोपिंग टेस्ट किए जा सकते हैं, वहां भारत के दिग्गज भाला फेंक खिलाड़ी नीरज चोपड़ा और उभरते सितारे सचिन यादव को एथलीट्स इंटीग्रिटी यूनिट (AIU) के पंजीकृत परीक्षण पूल (Registered Testing Pool/RTP) में शामिल किया गया है। यह न सिर्फ दोनों खिलाड़ियों की अंतरराष्ट्रीय पहचान को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि RTP में एंट्री का क्या मतलब होता है और इसे क्यों खास माना जाता है।
RTP में नीरज चोपड़ा का पहले भी रहा अनुभव
दो बार के ओलंपिक पदक विजेता नीरज चोपड़ा इस RTP सूची में नियमित रूप से शामिल होते रहे हैं, जबकि पिछले साल विश्व चैंपियनशिप में चौथे स्थान पर रहने वाले सचिन यादव को पहली बार इसमें जगह मिली है। एशियाई चैंपियनशिप के रजत पदक विजेता सचिन यादव ने विश्व चैंपियनशिप में नीरज चोपड़ा को पीछे छोड़ दिया था, जब चोपड़ा फिटनेस संबंधी समस्याओं के कारण आठवें स्थान पर रहे थे।
भाला फेंक में उभरता नाम: सचिन यादव
सचिन यादव ने 86.27 मीटर भाला फेंककर अपना व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए न केवल नीरज चोपड़ा को बल्कि पाकिस्तान के मौजूदा ओलंपिक चैंपियन अरशद नदीम को भी पीछे छोड़ा था। अरशद नदीम 10वें स्थान पर रहे थे। उत्तर प्रदेश के 26 वर्षीय खिलाड़ी सचिन यादव को भाला फेंक का अगला स्टार माना जा रहा है।
RTP में शामिल होने का क्या मतलब है?
पंजीकृत परीक्षण पूल (RTP) अंतरराष्ट्रीय या राष्ट्रीय स्तर के शीर्ष एथलीटों का समूह होता है। इस सूची में शामिल खिलाड़ियों का डोपिंग टेस्ट बिना किसी पूर्व सूचना के किया जा सकता है। RTP में शामिल एथलीटों को अपने घर के पते सहित सभी ठिकानों की जानकारी नियमित रूप से देनी होती है, साथ ही उन्हें प्रतिदिन 60 मिनट का ऐसा समय भी निर्धारित करना होता है, जिसके दौरान वे डोपिंग परीक्षण के लिए उपलब्ध रहेंगे।
आरटीपी की नई सूची में इथियोपिया, केन्या और अमेरिका के एथलीटों का दबदबा देखने को मिला है। वहीं पिछले आरटीपी में शामिल भारत के भाला फेंक खिलाड़ी किशोर जेना, स्टीपलचेजर अविनाश साबले, महिला भाला फेंक खिलाड़ी अनु रानी, लंबी कूद के एथलीट मुरली श्रीशंकर और जेस्विन एल्ड्रिन को नए साल के पहले तीन महीनों की सूची में जगह नहीं मिल सकी है।

