नई दिल्ली: आखिरकार वह जादुई लम्हा आ ही गया, जिसका इंतजार भारतीय क्रिकेट प्रेमियों को पिछले 11 वर्षो से था। 2013 की आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी जीतने के बाद से भारतीय दर्शक इस अद्भुत पल के लिए तरस रहे थे। पिछले साल एकदिवसीय विश्व कप के फाइनल में ऑस्ट्रेलिया के हाथों मिली पराजय के बाद इनके सब्र का बांध भी टूटने लगा था। 2013 के बाद भारतीय टीम आईसीसी टूर्नामेंट्स में लगातार अच्छा प्रदर्शन तो कर रही थी, (2021 के टी20 विश्व कप को छोडक़र) पर टीम का सफर सेमीफाइनल या फाइनल में जाकर थम जा रहा था। टीम दबाव से पार नहीं पा रही थी और बिखर जा रही थी। 2023 के विश्व कप फाइनल में भारत की अप्रत्याशित हार इस श्रृंखला की इंतिहा थी।दुनियाभर में भारतीय क्रिकेट को चाहने वाले दर्शक और यहां तक कि तमाम खेल समीक्षक भी इस बात से हताश और निराश थे।
सब हैरान थे कि पूरे टूर्नामेंट में सभी टीमों को तकरीबन कुचलने के अंदाज से पराजित करती आई टीम फाइनल में कैसे लडख़ड़ा गई। बड़े मैच का दबाव कैसे इतना हावी हुआ कि पूरी टीम ही बिखर गई। इस बात की कसक रोहित शर्मा और उनके तमाम साथियों के अंदर थी। इधर रोहित शर्मा की कप्तानी पर भी सवाल उठाए जा रहे थे। रही सही कसर मुंबई इंडियंस के मैनेजमेंट ने रोहित को कप्तानी से हटाकर पूरी कर दी थी। उस वक़्त रोहित भारी दबाव में थे। इसके बावजूद बीसीसीआई ने कोच राहुल द्रविड़ और रोहित शर्मा पर भरोसा बनाये रखा। 2023 विश्व कप के बाद राहुल द्रविड़ का कॉन्ट्रैक्ट समाप्त हो गया था, पर इसे बीसीसीआई का अच्छा कदम कहना चाहिए कि उन्होंने राहुल द्रविड़ एवं उनसे जुड़े सपोर्टिंग स्टाफ को टी20 विश्व कप तक टीम को संभालने के लिए राजी कर लिया। इस भरोसे का नतीजा सबके सामने है।
इस बार दबाव में प्रदर्शन को निखारा
इससे पहले भारतीय टीम नॉक आउट जैसे मंच पर दबाव वाली परिस्थितियों से उबर नहीं पाती थी और ताश के पत्तों की तरह बिखर जाती थी। मगर इस बार फाइनल मैच में पहले 6 ओवरों के अंदर 34 रनों पर 3 बड़े विकेट गंवा देने के बावजूद भारतीय टीम ऐसे स्कोर तक पहुँचने में कामयाब रही, जिसने गेंदबाजों को दक्षिण अफ्रीकी टीम पर दबाव डालने का पूरा मौका मिला। पूरे टूर्नामेंट में खामोश रहनेवाला विराट का बल्ला इस दबाव के हालात में खूब चला। उन्होंने अपने शानदार कैरियर की एक और अहम पारी खेली और यह जताया कि क्यों उन्हें व्हाइट बॉल क्रिकेट का सर्वश्रेष्ठ बैटर माना जाता है। रोहित ने टॉस जीतकर बिना किसी झिझक के पहले बल्लेबाजी का निर्णय लिया। विकेट बल्लेबाजी के लिए काफी अच्छा लग रहा था। पहली 9 गेंदों में 5 चौके और 23 रन बोर्ड पर लगाकर रोहित और विराट ने पारी को जबर्दस्त शुरुआत दी थी। विराट के बल्ले से बड़े ही अच्छे चौके निकल रहे थे। लग रहा था कि भारतीय टीम पहले छह ओवरों में तगड़ा स्कोर करके दक्षिण अफ्रीका पर हावी हो जाएगा। मगर तभी दक्षिण अफ्रीकी कप्तान एडन मार्क्रम ने खब्बू स्पिनर केशव महाराज को गेंदबाजी में लगा दिया। एक तरह से यह एक गैम्बल ही था, क्योंकि रोहित शर्मा के आगे स्पिन गेंदबाजी को डालने का निर्णय एक बड़ी ग़लती भी साबित हो सकता था। मगर महाराज ने अगली 3 गेंदों में रोहित और पंत के विकेट लेकर भारतीय टीम को बैकफुट पर धकेल दिया। और फिर इसके 2 ओवर बाद ही रबाडा के एक बाउंसर ने सूर्या को आउट कर अफ्रीकी टीम भारत से टॉस जीतने की बढ़त छीनकर वापसी कर चुकी थी।
इसके बाद विराट अपने चिर परिचित एंकर रोल धारण कर चुके थे। उन्हें अच्छा साथ मिला अक्षर पटेल का, जिन्होंने विराट पर बाउंडरी शॉट का दबाव नहीं आने दिया। जहाँ एक तरफ विराट सिंगल डबल से स्कोर बोर्ड को धीरे धीरे आगे बढ़ाते रहे, वही अक्षर ने बीच बीच में बाउंडरी शॉट लगाकर रन रेट को लगातार सुदृढ़ बनाएं रखा। अक्षर के आउट के होने के बाद शिवम दुबे ने विराट का बखूबी साथ दिया और वे 16 गेंदों पर 27 रन बनाकर आउट हुए। विराट ने अंतिम दो ओवरों में 11 गेंदों में 26 रन बनाकर टीम के स्कोर को 160 के पार पहुचा दिया था। 176 रन इस मैदान पर एक अच्छा स्कोर था। टी20 विश्व कप के फाइनल के इतिहास में कोई भी टीम इतने स्कोर से आगे बढक़र नहीं जीत पाई थी। विकेट बल्लेबाजी के लिए अनुकूल था। अफ्रीका की शुरुआत बड़ी ही खराब रही। बुमराह ने पारी के दूसरे ओवर में हेंड्रिकस और अर्शदीप ने तीसरे ओवर में कप्तान मार्करम को वापस भेजकर अफ्रीकी टीम को दबाव में ला खड़ा किया। यहाँ से टीम इंडिया का प्रयास यही था कि बीच के ओवरों में स्पिनर्स के सहारे मैच में अपनी पकड़ मजबूत की जाए।
पर विकेट में स्पिनर्स के लिए कुछ खास नहीं था और स्टब्स एवं डी कॉक ने स्पिन गेंदबाजों को जमने नहीं दिया और संतुलित आक्रमण कर अफ्रीका का रन रेट अच्छा बनाए रखा। लगता है अफ्रीकी बल्लेबाज हमारे स्पिनरों का मुकाबला करने काफी होमवर्क करके आए थे। यह भी कहना पड़ेगा कि अफ्रीकी बल्लेबाजों ने जब अक्षर पटेल और कुलदीप यादव पर हमला किया तो वे अपनी लाइन लेंथ पर नियंत्रण खो बैठे थे। क्लासेन ने आते ही स्पिन गेंदबाजों की धज्जियां उड़ा दी। मैच जब नितांत बराबरी पर चल रहा था, अक्षर के एक ओवर में 24 रन बटोरकर क्लासेन ने मैच दक्षिण अफ्रीका की गिरफ्त में डाल दिया। फाइनल में भारतीय स्पिनर्स अच्छे खासे महंगे साबित हुए और 9 ओवर की गेंदबाजी में उन्होंने 106 रन खर्च कर दिए। अक्षर पटेल को पारी का 15 वां ओवर देना एक बेहद गलत निर्णय साबित हो चुका था। दक्षिण अफ्रीका को 30 गेंदों में सिर्फ 30 रनों की जरूरत थी। पराजय सामने खड़ी थी और करोड़ों भारतीय दर्शक एक बार फिर निराशा की ओर बढ़ रहे थे।
ऐसी विकट स्थिति में कप्तान रोहित ने दिमाग ठंडा रखते हुए अद्भुत कुशलता का परिचय दिया और उन्होंने पारी का 16वा ओवर बुमराह को सौंप दिया। इस ओवर में बुमराह ने सिर्फ 4 रन देकर अफ्रीकियों पर थोड़ा दबाव बनाया। इसी दबाव के फलस्वरूप 17वे ओवर की पहली गेंद पर हार्दिक ने क्लासेन का विकेट लेकर अफ्रीका पर और ज़्यादा दबाव वापस शिफ्ट कर दिया। 18वे ओवर में बुमराह का जादू सर चढक़र बोला। उन्होंने इस ओवर में सिर्फ 2 रन दिए और यानसेन को बोल्ड करके अफ्रीका को संकट में डाल दिया। उसके बाद नौजवान अर्शदीप ने अद्भुत कुशलता का परिचय देते हुए 19वे ओवर में सिर्फ 4 रन दिए, जिससे अंतिम ओवर में अफ्रीका को 16 रनों की दरकार थी। मैच अफ्रीका की पकड़ से बाहर हो चुका था।
डेविड मिलर अफ्रीका की आखिरी उम्मीद थे। हार्दिक ने ऑफ स्टंप के काफी बाहर फुल टॉस गेंद डाली, जिसे मिलर ने लांग ऑफ पर खेला। टाइमिंग अच्छी नहीं थी। एकबारगी लगा कि गेंद बाउंड्री पार कर जाएगी, पर सूर्यकुमार ने रोप के नजदीक ही कैच लपक लिया। पर जब उनका बैलेंस गड़बड़ाया तो उन्होंने गेंद को अपने शरीर के हवा में रहते ही आगे उछाल दिया और उन्होंने वापस रिबाउंड में कैच को पकड़ लिया। यह सब इतनी जल्दी और इतने अच्छे तरीके से हुआ कि इसे शब्दों में बयान कर पानबेहद मुश्किल है। इस ऐतिहासिक कैच ने ट्रॉफी भारत की झोली में डाल दी। यह एक अद्भुत, अविस्मरणीय और अद्वितीय विजय है। आधे घंटे पहले जो मुकाबला पूरी तरह अफ्रीका के पाले में नजर आ रहा था, उसे भारत ने जिस अंदाज से अफ्रीका से छीना, उसे बरसों बरस याद किया जाएगा। इसे अगर टी20 विश्व कप के इतिहास का सर्वाधिक रोमांचकारी सर्वश्रेष्ठ फाइनल भी कहा जा सकता है।रोहित शर्मा की जोरदार कप्तानी
विश्व कप 2023 की फाइनल में मिली हार के बाद रोहित शर्मा एक कप्तान के रूप में काफी हताश थे। टीम ने पूरे टूर्नामेंट में विश्व चैंपियन जैसा खेल दिखाया था, पर फाइनल जैसे बड़े मैच का दबाव टीम पर हावी हो गया। इसके बाद रोहित शर्मा कुछ समय तक टीम से दूर हो गए थे। यह वो दौर था, जब उन्होंने आत्म मंथन किया होगा। उनमें यह सोच आई होगी कि विश्व कप जैसी दबाव वाली प्रतियोगिता में सीनियर खिलाडिय़ों को ही मौका देना होगा। बाकी का काम बोर्ड ने किया।भारत-इंग्लैंड टेस्ट सीरीज के दौरान 14 फरवरी को एक कार्यक्रम में बीसीसीआई के सचिव जय शाह ने यह ऐलान कर दिया था कि रोहित शर्मा की कप्तानी में ही भारतीय टीम टी20 विश्व कप खेलेगी। उन्होंने कहा था – ‘अहमदाबाद में 2023 (फाइनल) में, भले ही हम 10 लगातार जीत के बाद विश्व कप नहीं जीत पाए, लेकिन हमने दिल जीत लिए। मैं आपसे वादा करना चाहता हूँ कि 2024 (टी 20 विश्व कप) में बारबाडोस (फाइनल का स्थल) में हम रोहित शर्मा की कप्तानी में ट्रॉफी उठाएंगे। हम भारत का झंडा गाड़ेंगे।’ आखिर जय शाह की कामना फलीभूत हुई और हमने बारबाडोस में तिरंगा गाड़ दिया।
इस टूर्नामेंट में रोहित की कप्तानी की सबसे अच्छी बात थी कि वे शांत चित्त थे और साथी खिलाडिय़ो से मस्ती मजाक में अपनी बात उन तक पहुचा देते थे। साथ ही उन्होंने जो निर्णय लिए उसे सही तरीके से क्रियान्वित किया। टीम चयन के बाद एक सवाल आया था कि 4 स्पिनर्स क्यों लेकर जा रहे हैं, पर उन्होंने सिर्फ यही कहा था कि यह वक़्त आने पर पता लग जाएगा। टीम ने जब अमेरिका में मैच खेले, तो एक अतिरिक्त तेज गेंदबाज था। पर वेस्टइंडीज पहुँचते ही टीम कॉम्बिनेशन में एक अतिरिक्त स्पिनर को शामिल किया गया। विराट कोहली जब सलामी बल्लेबाज के तौर पर रन नहीं बना पाए, तो यह बात लगातार सामने आ रही थी कि उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नंबर 3 पर रहा है, तो उस पर छेड़छाड़ नहीं करना था। फिर भी वे अपने निर्णय पर अटल थे और विराट ने सलामी बल्लेबाज के तौर पर ही पूरा टूर्नामेंट खेला।
कैसा रहा टीम इंडिया का फाइनल तक का सफर
भारतीय टीम के ग्रुप स्टेज के सभी मैच अमेरिका की धरती पर थे। इसके लिए खासकर न्यूयॉर्क के नासाऊ काउंटी स्टेडियम को विकसित किया गया था। पहले मैच में भारत ने आयरलैंड को एकतरफा अंदाज में हराकर टूर्नामेंट की शुरुआत की थी। उसके बाद भारत ने चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान के विरुद्ध 119 रन का स्कोर बनाकर भी उसे डिफेंड किया था। हालांकि विकेट बल्लेबाजी के लिए बहुत मुश्किल था फिर भी टीम इंडिया का 119 रन का स्कोर मैच जीतने वाला स्कोर नहीं था। यहाँ तारीफ़ होनी चाहिए भारतीय गेंदबाजो, खासकर बुमराह की, जिन्होंने पिच का पूरी तरह से फायदा उठाया और पाकिस्तान को 113 रनों पर रोककर यह मैच 6 रनों से अपने नाम किया। फिर भारत ने अमेरिका पर आसान जीत हासिल की। कनाडा के विरुद्ध मैच बारिश से धुल गया था।
सुपर आठ में भारत ने बांग्लादेश एवं अफगानिस्तान को हराकर सेमीफाइनल की ओर कदम बढ़ा लिया था, पर ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध मैच जीतना जरूरी था। इसलिए कि ग्रुप में 3 जीत के बाद यदि सेमीफाइनल बारिश से प्रभावित होता, जिसकी आशंका पहले जताई गई थी, तो उन परिस्थितियों में भारतीय टीम को फाइनल में प्रवेश कर जाने का मौका मिलता। भारत ने ऑस्ट्रेलिया को न सिर्फ हराया, अपितु उन्हें इस विश्व कप बाहर कर 2023 विश्व कप की फाइनल की हार का हिसाब चुकता कर दिया। इस मैच को रोहित शर्मा की आतिशी बल्लेबाजी के लिए भी याद किया जाएगा। उन्होंने इस तरह की बल्लेबाजी की, जिससे यह झलक रहा था कि उनमें ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध फाइनल में मिली हार की कसक अभी बाकी है।
सेमीफाइनल में मुकाबला इंग्लैंड से था, जिनसे हम 2022 टी20 सेमीफाइनल 10 विकेट से हारे थे। यहां पर टीम इंडिया ने इंग्लैंड को एकतरफा अंदाज में 68 रनों से मात देकर फाइनल में प्रवेश किया। विकेट में स्पिनर्स के लिए मददगार थी और इंग्लैंड के बल्लेबाज कुलदीप, अक्षर और जडेजा की फिरकी के आगे नतमस्तक नजर आए।पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया बुरी तरह असफल
पिछले टी20 विश्व कप की उपविजेता पाकिस्तान इस बार ग्रुप राउंड में अमेरिका और फिर भारत से हारकर सुपर आठ में भी प्रवेश नहीं कर पाई। पाकिस्तानी टीम गुट में बंटी हुई नजर आई। यह कहा गया कि बाबर आजम एवं शाहीन अफरीदी के अलग अलग गुट है, जिससे आपसी खींचतान बढ़ गई है और यही उनके प्रदर्शन में देखने को मिला।
2023 एकदिवसीय विश्व कप विजेता टीम ऑस्ट्रेलिया टी20 विश्व कप के पिछले संस्करण में नॉक आउट स्टेज तक भी नहीं पहुँच पाई थी।इस बार भी सुपर आठ में पहले अफगानिस्तान, फिर भारत ने उसे मात देकर सेमीफाइनल की पहुँच से वंचित कर दिया। मिशेल मार्श अपनी कप्तानी से टीम को उस तरह से उत्साहित नहीं कर पाए, जैसे पैट कमिंस ने पिछले विश्व कप में टीम को कप दिलाया था। अफगानिस्तान से मिली हार ने टीम की कमजोरियां उजागर कर दी।अफगानिस्तान ने विश्व क्रिकेट में छाप छोड़ी
अफगानिस्तान के बारे में इस टूर्नामेंट में शुरुआत से ही कहा गया था कि यह टीम अच्छा करेगी। 2023 विश्व कप में भी टीम सेमीफाइनल पहुँचते-पहुँचते रह गई थी। ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध मैच में अफगानिस्तान बिल्कुल जीत की कगार पर खड़ा था, पर अकेले ग्लेन मैक्सवेल ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया था। इस बार टीम ने ग्रुप राउंड में पहले न्यूजीलैंड को, फिर सुपर आठ में ऑस्ट्रेलिया और बंगलादेश को हराकर सेमीफाइनल तक का सफर तय किया। उनके खेल की सबसे खास बात यह थी कि कोई भी जीत को आप उलटफेर भरी जीत नहीं कह सकते। जीत के लिए उन्होंने अच्छा खेल दिखाया और यह जताने में कामयाब रहे कि इस फॉर्मेट में उन्हें कमजोर समझना भूल होगी।रोहित, विराट एवं जडेजा का टी20 से संन्यास
2007 के पहले टी20 विश्व कप के दौरान रोहित शर्मा ने जिस अफ्रीकी टीम के विरुद्ध पहली बार टी20 अंतरराष्ट्रीय में बल्लेबाजी की थी और 53 रन नाबाद बनाकर टीम को सेमीफाइनल पहुचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, उसी दक्षिण अफ्रीका के विरुद्ध विश्व कप फाइनल जीतकर रोहित शर्मा ने टी20 फॉर्मेट को अलविदा कह दिया है। संन्यास के ऐलान के समय रोहित शर्मा ने कहा कि विश्व कप जीतकर इस फॉर्मेट को अलविदा कहने का इससे अच्छा मौका और कोई नहीं हो सकता। फिलहाल रोहित शर्मा 4231 रनों के साथ नंबर 1 पर हैं, साथ ही वे इस फार्मेट में 205 छक्के लगाने वाले एकलौते बल्लेबाज है।
विराट कोहली: विराट ने फाइनल खत्म होने के तुरंत बाद संन्यास की घोषणा कर दी थी, जब उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच का अवार्ड दिया जा रहा था। उनके लिए टूर्नामेंट को जीतना और फाइनल के खास मौके पर 76 रन बनाकर फाइनल का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी बनना बहुत ही खास था। 2023 विश्व कप में प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट बनना भी बहुत ही खास बात थी।मगर टूर्नामेंट हासिल नहीं कर पाने का मलाल जरूर उनके अंदर था। जब विराट इस फॉर्मेट से संन्यास का एलान कर रहे थे, तो वे इस उपलब्धि पर काफी संतुष्ट थे। जून 2010 को जिम्बाब्वे के विरुद्ध अपने टी20 कैरियर की शुरुआत करने वाले विराट 2014, 2016 एवं 2022 टी20 विश्व कप के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज रहे हैं और वे इस फॉर्मेट में रोहित के शर्मा के बाद 4188 रनों के साथ दूसरे सर्वश्रेष्ठ स्कोरर है।
रविन्द्र जडेजा: विश्व के सर्वश्रेष्ठ फील्डर एवं आल राउंडर रविन्द्र जडेजा ने भी फाइनल के बाद संन्यास का एलान किया है। इस विश्व कप में उन्हें ज्यादा बल्लेबाजी एवं गेंदबाजी का मौका नहीं मिला, पर फिर भी अपनी फील्डिंग एवं उपयोगी बल्लेबाजी से वे टीम के प्रभावशाली खिलाड़ी रहे हैं। 74 टी20 मैच में 515 रन बनाने के साथ साथ उन्होंने 54 विकेट भी हासिल किए हैं।राहुल द्रविड़ का कोचिंग कार्यकाल पूरा
भारतीय क्रिकेट इतिहास में एक बल्लेबाज के तौर पर आप राहुल द्रविड़ को सर्वश्रेष्ठ 5 बल्लेबाजों में जरूर आंकेंगे। उनकी उपलब्धियां बेमिसाल रही हैं। सौरव गांगुली के बाद जब द्रविड़ ने टीम की कमान सम्हाली थी, तो उनके कप्तानी कैरियर की शुरुआत धमाकेदार रही थी। उनकी कप्तानी में एक समय टीम इंडिया ने स्कोर का पीछा करते हुए करते हुए 16 लगातार एकदिवसीय मैच जीते थे। उसके बाद उनकी कप्तानी कैरियर में ग्रहण लगा, जिसका अंत 2007 के वेस्टइंडीज में हुए एकदिवसीय विश्व कप के ग्रुप राउंड से बाहर होकर हुआ था। मगर वक्त की ताकत देखिए कि जो उपलब्धि राहुल द्रविड़ ने एक खिलाड़ी और क्रिकेटर के तौर पर हासिल नहीं की, उसे उन्होंने एक कोच के तौर पर उसी वेस्टइंडीज की सरजमी पर हासिल किया, जहाँ से उनके आईसीसी टूर्नामेंट में कप्तानी कैरियर पर पूर्ण विराम लग गया था।
इन खिलाडिय़ों ने प्रभावित किया
इस टी20 विश्व कप में गेंद और बल्ले दोनों के बीच मुक़ाबला लगभग बराबरी का रहा है इसका सबसे बड़ा उदाहरण यह भी है कि इस टूर्नामेंट में कोई भी बल्लेबाज शतक नहीं लगा पाया,हालांकि निकोलस पूरन और रोहित शर्मा इसके करीब पहुँचे पर वे तिहाई का आंकड़ा छू न सकें, कुछ बल्लेबाज जिन्होंने छाप छोड़ी उनमें मुख्य तौर पर रहमनुल्लाह गुरबाज टूर्नामेंट के सबसे सफल बल्लेबाज रहे,रोहित शर्मा,डी कॉक,ट्रेविस हेड और इब्राहिम जरदान यह बल्लेबाज टूर्नामेंट के टॉप 5 बल्लेबाज रहे। वही गेंदबाजी में सबसे सफल अर्शदीप सिंह और फज़लहक़ फारुखी 17 विकेट के साथ टॉप पर रहे। इसके बाद बुमराह,नोर्जे एवं राशिद खान ने विकेट की लिस्ट में अपना नाम टॉप 5 पर दर्ज कराया। जसप्रीत बुमराह जिन्होंने टूर्नामेंट में 15 विकेट हासिल किए उन्हें प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट के अवार्ड से नवाजा गया।
इन खिलाडिय़ों ने की संन्यास की घोषणा
रोहित शर्मा, विराट कोहली एवं रविन्द्र जडेजा ने टी20 फॉर्मेट से संन्यास लिया पर कुछ ऐसे खिलाड़ी भी है जिन्होंने इस टूर्नामेंट के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को पूर्ण तौर पर अलविदा कह दिया। इस फेहरिस्त में सबसे ऊपर नाम है डेविड वार्नर का जिन्होंने भारत के विरुद्ध मिली हार के बाद सन्यास की घोषणा की इसके अलावा न्यूजीलैंड के स्टार गेंदबाज ट्रेंट बोल्ट, नामीबिया के स्टार आल राउंडर डेविड वीजे,नीदरलैंड के मध्यम कर्म बल्लेबाज सिब्रांड एंगलब्रेटच और यूगांडा के कप्तान ब्रायन मसाबा ने टी20 फॉर्मेट को अलविदा कहा।
नितेश छाबड़ा