नई दिल्ली : टी20 वर्ल्ड कप 2026 में मौजूदा चैंपियन भारत खिताब जीतने के प्रबल दावेदार के रूप में मैदान में उतरेगी, लेकिन इस बार टीम के पास रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे दिग्गज खिलाड़ी नहीं होंगे। इस टूर्नामेंट का पहला संस्करण 2007 में खेला गया था, जब महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में भारत ने खिताब जीता था। तब से 2024 तक हर टूर्नामेंट में भारतीय टीम में कम से कम रोहित या विराट में से कोई न कोई खिलाड़ी हमेशा मौजूद रहा है।
साल 2024 में भारत को खिताब जिताने वाले रोहित शर्मा हर संस्करण का हिस्सा रहे हैं। वहीं, विराट कोहली ने 2012 में इस टूर्नामेंट में पहली बार हिस्सा लिया और अपने प्रदर्शन से नाम कमाया। रोहित और विराट इस टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी हैं और टॉप-2 बल्लेबाज के रूप में हमेशा छाए रहे हैं। हालांकि, रोहित-विराट की गैरमौजूदगी टीम इंडिया के लिए एक चुनौती हो सकती है, लेकिन यह अभिषेक शर्मा और तिलक वर्मा जैसे युवा खिलाड़ियों को भारतीय क्रिकेट में अगला स्टार बनने का मौका भी प्रदान करती है।
गंभीर और सूर्यकुमार की कप्तानी का भविष्य दांव पर
कोच गौतम गंभीर और कप्तान सूर्यकुमार यादव दोनों ही इस समय काफी कुछ खोने और पाने की स्थिति में हैं। टी20 वर्ल्ड कप 2026 उनके लिए भाग्य तय करने वाला साबित हो सकता है। इस टूर्नामेंट के नतीजों से यह भी स्पष्ट हो जाएगा कि भारतीय टीम की नेतृत्व की सत्ता किसके हाथ में होगी और भविष्य में किसकी राय को ज्यादा तवज्जो दी जाएगी। भारतीय क्रिकेट में पावर शिफ्ट तेजी से होता है; एक टूर्नामेंट आपको हीरो बना सकता है, वहीं दूसरा आपको जीरो साबित कर सकता है।
भारतीय क्रिकेट में पावर शिफ्ट कैसे होती है?
पावर शिफ्ट की बानगी 2024 टी20 वर्ल्ड कप से पहले ही देखने को मिली। ऑस्ट्रेलिया की मेजबानी में हुए 2022 टी20 वर्ल्ड कप में भारतीय टीम सेमीफाइनल में इंग्लैंड से 10 विकेट की शर्मनाक हार के साथ बाहर हुई। इसके बाद रोहित शर्मा, विराट कोहली और केएल राहुल जैसे सीनियर खिलाड़ी लंबे वक्त तक टी20 इंटरनेशनल से दूर रहे।
साल 2023 में तीनों एक भी टी20 नहीं खेले। हार्दिक पंड्या कप्तानी करते दिखे। यशस्वी जायसवाल और रिंकू सिंह जैसे युवा खिलाड़ियों को मौका मिला, लेकिन 2024 टी20 वर्ल्ड कप में रोहित शर्मा-विराट कोहली की वापसी हुई। इसमें 2023 वनडे वर्ल्ड कप बड़ा फैक्टर रहा, जिसने 2022 टी20 वर्ल्ड कप और 2023 वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल की विफलताओं को ढक दिया।
क्रिकेट पावर सेंटर: रोहित और द्रविड़ का साम्राज्य
वर्ल्ड कप के दौरान ही हार्दिक पंड्या चोटिल हो गए, जिससे भारतीय टीम में लीडरशिप क्राइसिस पैदा हो गई। इस बीच, रोहित शर्मा ने टूर्नामेंट में अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से टीम का मनोबल बढ़ाया। हालांकि भारत फाइनल हार गया, लेकिन आक्रामक खेल और नेतृत्व की कमी ने रोहित को टी20 टीम में वापसी का मौका दिलाया। उनकी वापसी से विराट कोहली को भी अवसर मिला और कोच राहुल द्रविड़ का कार्यकाल भी बढ़ गया। उस समय टीम इंडिया का पावर सेंटर रोहित-द्रविड़ के पास था।
रोहित-द्रविड़ की पसंद से खिलाड़ियों को चुना जा रहा था। यही कारण था कि सड़क दुर्घटना के कारण सालभर से ज्यादा समय तक मैदान से दूर रहे ऋषभ पंत को सीधे भारत की टी20 वर्ल्ड कप टीम में मौका मिल गया। केएल राहुल को बतौर विकेटकीपर साउथ अफ्रीका दौरे पर टेस्ट सीरीज में मौका मिला। मानसिक थकान के कारण इशान किशन टीम से बाहर हुए। वह अपना सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट तक गंवा बैठे।
गौतम गंभीर का क्रिकेट में दबदबा बढ़ा
भारतीय टीम ने 2024 टी20 वर्ल्ड कप का खिताब जीता। इसके बाद रोहित शर्मा और विराट कोहली ने इस फॉर्मेट से संन्यास ले लिया, जबकि कोच राहुल द्रविड़ का कार्यकाल समाप्त हो गया। टीम इंडिया को नया कोच गौतम गंभीर मिला और टी20 फॉर्मेट में सूर्यकुमार यादव को नया कप्तान बनाया गया। नेतृत्व समूह में बदलाव के बाद टीम में पावर को लेकर लड़ाई देखने को मिली। न्यूजीलैंड के खिलाफ घर में और ऑस्ट्रेलिया दौरे पर टेस्ट क्रिकेट में विफलताओं ने कोच गौतम गंभीर और अजीत अगरकर को शक्तिशाली बनाया। रोहित शर्मा और विराट कोहली को टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेना पड़ा।
गौतम गंभीर और अगरकर पर सवाल उठे
शुभमन गिल को टेस्ट टीम का नया कप्तान बनाया गया, और उन्होंने बल्लेबाज के तौर पर शानदार प्रदर्शन किया। भारतीय टीम इंग्लैंड दौरे पर टेस्ट सीरीज को 2-2 से बराबर करने में सफल रही, जिससे गौतम गंभीर और अगरकर और भी ताकतवर हुए। वहीं, चैंपियंस ट्रॉफी में शानदार प्रदर्शन के बावजूद रोहित शर्मा और विराट कोहली के वनडे क्रिकेट में भविष्य पर सवाल उठने लगे, और इसके बाद शुभमन गिल को फटाफट वनडे टीम का कप्तान बना दिया गया।
टी20 में उन्हें उप-कप्तान के तौर पर मौका दे दिया गया। परिस्थितियां ऐसी बनी मानो ऑस्ट्रेलिया दौरे के बाद रोहित-विराट की विदाई तय है, लेकिन दोनों के प्रदर्शन और साउथ अफ्रीका से घरेलू सरजमीं पर क्लीन स्वीप ने गौतम गंभीर और अजित अगरकर को कठघरे में खड़ा कर दिया। दोनों पर लगातार सवाल उठे और इसका नतीजा यह हुआ कि गिल को टी20 वर्ल्ड कप की टीम से बाहर करना पड़ा।
गंभीर के समय में टीम इंडिया के लिए शर्मनाक पल
फिलहाल की स्थिति में रोहित शर्मा और विराट कोहली 2027 वर्ल्ड कप खेलते हुए दिखाई दे रहे हैं। दूसरी ओर, अजित अगरकर का कार्यकाल समाप्त हो चुका है। गौतम गंभीर का कार्यकाल 2027 वर्ल्ड कप तक है, लेकिन उनके कोच बनने के बाद भारतीय टीम जिस शर्मनाक स्थिति का सामना कर रही है, उसे देखकर यही लगता है कि टी20 वर्ल्ड कप 2026 में टीम का प्रदर्शन उनके भविष्य को तय करेगा।
गौतम गंभीर के कार्यकाल में भारत 27 साल बाद श्रीलंका के खिलाफ द्विपक्षीय वनडे सीरीज हारा। पहली बार न्यूजीलैंड और उसके बाद साउथ अफ्रीका से घरेलू सरजमीं पर टेस्ट सीरीज में क्लीन स्वीप झेला। न्यूजीलैंड से पहली बार वनडे सीरीज हारा। इसके अलावा भी कई शर्मनाक रिकॉर्ड बने। टी20 वर्ल्ड कप में भी ऐसी ही स्थिति रही तो फिर गंभीर की छुट्टी हो सकती है। वह बच भी गए तो निर्णय लेने की क्षमता में नहीं होंगे।
भारत वर्ल्ड कप जीतने पर क्या बदलेगा?
अगर भारत ने टी20 वर्ल्ड कप 2026 में अच्छा प्रदर्शन किया, तो गौतम गंभीर के पास भारतीय क्रिकेट को चलाने की पूरी पावर होगी। वह अपनी रणनीति के मुताबिक 2027 वर्ल्ड कप का रोडमैप तय करेंगे और रोहित शर्मा और विराट कोहली के भविष्य पर भी फैसला ले सकते हैं। इसी टूर्नामेंट के नतीजे भारतीय क्रिकेट के एक और शख्स का भाग्य भी तय करेंगे—सूर्यकुमार यादव। सूर्या की कप्तानी में भारतीय टीम ने अब तक शानदार प्रदर्शन किया है और उनकी नेतृत्व क्षमता को इसी वर्ल्ड कप में और भी परखा जाएगा।
भारत ने सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में अब तक कुल 38 में से 29 मैच जीते हैं (टाई समेत), जबकि 6 मुकाबले हार गए हैं। टी20 वर्ल्ड कप 2024 के बाद से वह इस फॉर्मेट में किसी भी सीरीज में हार का सामना नहीं कर चुके हैं। हालांकि, बतौर बल्लेबाज उनका प्रदर्शन लगातार काफी खराब रहा है और वे आलोचकों के निशाने पर रहे हैं। उन्हें अर्धशतक लगाए हुए एक साल से अधिक का समय हो गया है। अगर टी20 वर्ल्ड कप 2026 में सूर्या अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाए, तो उनके करियर पर बड़ा असर पड़ सकता है और यह समाप्त भी हो सकता है।

