नई दिल्ली : अफगानिस्तान के अनुभवी ऑलराउंडर मोहम्मद नबी पर बुधवार, 11 फरवरी को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में साउथ अफ्रीका के खिलाफ खेले गए आईसीसी पुरुष टी20 विश्व कप 2026 के ग्रुप डी मैच के दौरान आईसीसी की आचार संहिता का लेवल 1 उल्लंघन करने के आरोप में कार्रवाई की गई। उन्हें आचार संहिता के अनुच्छेद 2.4 का उल्लंघन करने का दोषी पाया गया और इसके चलते उन्हें मैच फीस का 15 प्रतिशत जुर्माना अदा करना पड़ा।
अनुच्छेद 2.4 खिलाड़ियों और प्लेयर सपोर्ट स्टाफ के लिए है। यह अंतरराष्ट्रीय मैच के दौरान अंपायर के निर्देश को न मानने से जुड़ा है। मैदानी अंपायर जयरामन मदनगोपाल और शरफुद्दौला इब्ने शाहिद, थर्ड अंपायर नितिन मेनन और फोर्थ अंपायर केएन अनंथापद्मनाभन ने नबी पर आरोप लगाए थे। मोहम्मद नबी के अनुशासनात्मक रिकॉर्ड में एक डिमेरिट पॉइंट भी जोड़ा गया है। यह पिछले 24 महीने में मोहम्मद नबी का पहला अपराध था। यह घटना अफगानिस्तान की पारी के 14वें ओवर की शुरुआत में हुई, जब मोहम्मद नबी की अंपायरों के साथ गेंदबाज लुंगी एनगिडी के रिस्ट बैंड को लेकर लंबी बहस हुई।
मोहम्मद नबी ने अपने अपराध को स्वीकार कर लिया और आईसीसी के इंटरनेशनल पैनल ऑफ मैच रेफरी डेविड गिल्बर्ट द्वारा निर्धारित जुर्माने को भी मान लिया, जिससे औपचारिक सुनवाई की आवश्यकता नहीं पड़ी। लेवल 1 के उल्लंघन में नियम के अनुसार कम से कम आधिकारिक फटकार और अधिकतम खिलाड़ी की मैच फीस का 50 प्रतिशत तथा एक या दो डिमेरिट पॉइंट्स लग सकते हैं।
ये है नियम
- जब कोई खिलाड़ी 24 महीने के समय में चार या उससे ज्यादा डिमेरिट पॉइंट्स तक पहुंच जाता है, तो उसे सस्पेंशन पॉइंट्स में बदल दिया जाता है और खिलाड़ी पर बैन लगा दिया जाता है।
- दो सस्पेंशन पॉइंट्स का मतलब है एक टेस्ट या दो ODI या दो T20I से बैन (जो भी खिलाड़ी के लिए पहले आए)।
- डिमेरिट पॉइंट्स खिलाड़ी या प्लेयर सपोर्ट स्टाफ के डिसिप्लिनरी रिकॉर्ड में उनके लगने के चौबीस (24) महीने तक रहेंगे, जिसके बाद उन्हें हटा दिया जाएगा।

