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Friday, March 13, 2026

जिसे मौका नहीं मिलता था, वही बने विजय हजारे ट्रॉफी के मैच विजेता

नई दिल्ली : कभी टीम की संयोजन के कारण उन्हें बेंच पर बैठना पड़ता था, तो कभी शानदार फॉर्म होने के बावजूद प्लेइंग इलेवन में उनका चयन नहीं होता था। फिर भी, क्रिकेट में यह मान्यता है कि जो खिलाड़ी कठिन परिस्थितियों में भी अपने आप पर भरोसा बनाए रखते हैं, वही मौका मिलने पर इतिहास रचने में सफल होते हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अमन मोखाड़े की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। 2024-25 का सीजन उनके करियर का सबसे कठिन दौर रहा, जहां रन बनाने के बावजूद उन्हें लगातार मौके नहीं मिल पा रहे थे। हालांकि, 2025-26 की विजय हजारे ट्रॉफी में वही अमन मोखाड़े विदर्भ के सबसे भरोसेमंद बल्लेबाज बनकर उभरे।

अमन मोखाड़े ने गुरुवार, 15 जनवरी को सेमीफाइनल में शतक लगाकर विदर्भ को पहली बार कर्नाटक के खिलाफ जीत दिलाई और टीम को विजय हजारे ट्रॉफी 2025‑26 के फाइनल में पहुँचाया। इसके साथ ही वह इस टूर्नामेंट के सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज भी बने। अमन मोखाड़े ने कुल 9 मैचों में 97.62 के औसत और 111.57 के स्ट्राइक रेट से 781 रन बनाए, जिसमें उनके पांच शतक भी शामिल हैं। अमन मोखाड़े के बारे में कहना गलत नहीं होगा कि जिस खिलाड़ी को कभी टीम से बाहर बैठना पड़ता था, वही अब विदर्भ के इतिहास का सबसे बड़ा हीरो बन चुका है। यह कहानी सिर्फ रनों की नहीं, बल्कि सब्र, मेहनत और खुद पर भरोसे की जीत की है।

अवसर नहीं मिल रहे थे

अमन मोखाड़े के लिए पिछला सीजन किसी परीक्षा से कम नहीं था। विदर्भ की टीम में अथर्व तायडे, यश राठौड़, करुण नायर और दानिश मलिवार जैसे बल्लेबाज मौजूद थे, जिससे उन्हें लगातार बाहर बैठना पड़ा। प्रैक्टिस मैचों में रन बनाने के बावजूद टीम कॉम्बिनेशन उनके खिलाफ जा रहा था। अमन खुद मानते हैं कि यह दौर मानसिक रूप से बेहद कठिन था। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अमन मोखाड़े ने कहा था, ‘मैं प्रैक्टिस मैचों में खूब रन बना रहा था, लेकिन टीम कॉम्बिनेशन (टीम संयोजन) और प्रतिस्पर्धा के चलते मुझे लगातार मौके नहीं मिले।’

करुण नायर से मिली महत्वपूर्ण सीख

दिलचस्प बात यह रही कि जिस खिलाड़ी के कारण अमन मोखाड़े को टीम में जगह नहीं मिल रही थी, वही उनके लिए प्रेरणा का स्रोत भी बन गया। करुण नायर के साथ हुई बातचीत ने न केवल उनके खेल बल्कि उनकी सोच को भी बदल दिया। करुण नायर ने उन्हें समझाया कि हर बल्लेबाज की शैली अलग होती है और हर खिलाड़ी को अपने खेल का रास्ता खुद खोजने की जरूरत होती है। यही सीख अमन के करियर का अहम टर्निंग पॉइंट साबित हुई।

करुण नायर पिछला सीजन विदर्भ के लिए खेले थे। उन्होंने पिछले सीजन विदर्भ को विजय हजारे ट्रॉफी के फाइनल तक पहुंचाने और रणजी ट्रॉफी जिताने में अहम भूमिका निभाई थी। करुण नायर ने व्यक्तिगत कारणों से विदर्भ का साथ छोड़ दिया और 2025-26 के घरेलू सीजन के लिए गृह राज्य कर्नाटक लौट गए।

रणजी ट्रॉफी में जबरदस्त वापसी

जब करुण नायर कर्नाटक लौटे और दानिश मलिवार चोटिल हुए, तब अमन को मौका मिला और दाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने उसे दोनों हाथों से लपक लिया। रणजी ट्रॉफी में 577 रन, 96 से ज्यादा का औसत और टॉप-5 रन स्कोरर में जगह। अमन ने साबित कर दिया कि वह सिर्फ मौके का इंतजार कर रहे थे।

विजय हजारे ट्रॉफी के बने नए सितारे

इसके बाद विजय हजारे ट्रॉफी 2025-26 में मौका मिला। अमन मोखाड़े ने विजय हजारे ट्रॉफी 2025-26 में खुद को घरेलू क्रिकेट के सबसे बड़े सितारों में शामिल कर लिया। नतीजा यह है कि अब वह टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाजों की सूची में शीर्ष पर हैं। अमन मोखाड़े मानते हैं कि टीम के अंदर मुकाबला हमेशा से कड़ा रहा है। आप अपनी जगह को कभी भी हल्के में नहीं ले सकते।

पढ़ाई के साथ क्रिकेट का संघर्ष

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अमन मोखाड़े के लिए यहां तक पहुंचने का सफर आसान नहीं रहा। उनके परिवार में डॉक्टर, इंजीनियर और प्रोफेसर हैं, जहां खेल को करियर के रूप में देखना आम बात नहीं थी। अमन ने माता-पिता से वादा किया था कि क्रिकेट के साथ पढ़ाई भी पूरी करेंगे। यही वजह है कि क्रिकेट में पहचान बनाने के साथ-साथ वह मास्टर्स की पढ़ाई भी कर रहे हैं।

एक विचार जिसने सब कुछ बदल दिया

अमन मोखाड़े आज भी सिर्फ आंकड़ों के पीछे नहीं भागते। उनका मानना है कि हर गेंद पर पूरी तरह से ध्यान केंद्रित करना उनकी सबसे बड़ी ताकत है। अमन जानते हैं कि जब उन्होंने भविष्य की चिंता की, तो आउट हो गए, लेकिन जब उन्होंने केवल गेंद पर ध्यान दिया, तो इतिहास रचने में सफल हुए। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अमन मोखाड़े की कहानी सिर्फ क्रिकेट तक सीमित नहीं है। यह उन सभी युवाओं की कहानी है जिन्हें कभी नजरअंदाज किया गया, जिन्हें कम मौके मिले, लेकिन जिन्होंने खुद पर विश्वास करना कभी नहीं छोड़ा। आज वही अमन मोखाड़े विदर्भ को विजय हजारे ट्रॉफी के फाइनल में पहुँचाने वाले नायक हैं और उन्होंने यह साबित कर दिया है कि कड़ी मेहनत कभी व्यर्थ नहीं जाती।

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