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Wednesday, March 11, 2026

महिला वनडे विश्व कप में अंपायरिंग पर उठे सवाल

कोलंबो. महिला वनडे विश्व कप 2025 में अंपायरिंग के स्तर पर सवाल उठने लगे हैं। टूर्नामेंट के पहले ढाई हफ्तों में कई विवादित फ़ैसलों ने खेल की विश्वसनीयता पर असर डाला है। सबसे ज़्यादा चर्चा डीआरएस (Decision Review System) को लेकर है, जो महिलाओं के क्रिकेट में सीमित रूप से इस्तेमाल होता है। इस वजह से अंपायरों के अनुभव और तकनीकी समझ की कमी सामने आई है।

इंग्लैंड-बांग्लादेश मैच से शुरू हुआ विवाद

इंग्लैंड और बांग्लादेश के बीच हुए मैच में कप्तान हेदर नाइट से जुड़ा फ़ैसला सबसे ज़्यादा सुर्खियों में रहा। बांग्लादेश की शोरना अख्तर ने उनका लो कैच पकड़ा था, लेकिन तीसरे अंपायर गायत्री वेणुगोपालन ने उसे “अपर्याप्त साक्ष्य” बताते हुए नॉट आउट करार दिया। इससे पहले एक कॉट-बिहाइंड का फ़ैसला भी टीवी अंपायर ने पलट दिया था। नाइट ने इसके बाद नाबाद 79 रन बनाकर इंग्लैंड को जीत दिलाई। ब्रॉडकास्टर नासिर हुसैन ने कहा कि नाइट खुद को आउट मानकर पवेलियन लौट रही थीं, लेकिन निर्णय बदलने से खेल में भ्रम की स्थिति बन गई।

भारत-पाकिस्तान और अन्य मैचों में भी विवाद

भारत-पाकिस्तान मैच में पाकिस्तान की सलामी बल्लेबाज़ मुनीबा अली का रन आउट फ़ैसला भी अजीब हालात में हुआ। टीवी अंपायर ने पहले उन्हें नॉट आउट बताया, फिर अन्य एंगल देखने के बाद निर्णय बदलकर आउट कर दिया। इस दौरान मैदान पर काफी भ्रम फैल गया और कप्तान फ़ातिमा सना को चौथे अंपायर से सफाई मांगनी पड़ी। भारत-साउथ अफ़्रीका मैच में सुने लूस के एलबीडब्ल्यू फ़ैसले को लेकर भी विवाद हुआ, जबकि भारत-ऑस्ट्रेलिया मुकाबले में अलीसा हीली का कैच तीसरे अंपायर ने पहले नकारा और फिर मान्य कर दिया। लगातार बदलते फ़ैसलों ने खिलाड़ियों और दर्शकों दोनों को उलझन में डाल दिया।

अनुभव की कमी बनी बड़ी वजह

अब तक इस विश्व कप में 10 अंपायर टीवी अंपायर की भूमिका निभा चुके हैं, लेकिन उनमें से केवल तीन के पास डीआरएस का पर्याप्त अनुभव है। कई अंपायरों ने इससे पहले कभी भी वनडे मैच में डीआरएस के साथ काम नहीं किया था। आंकड़ों के मुताबिक अब तक 36 पारियों में 25 फ़ैसले पलटे गए हैं, यानी प्रति पारी लगभग 0.67 बार। यह दर 2023 के पुरुष विश्व कप से ज़्यादा है, जहां यह 0.46 थी। विशेषज्ञों का कहना है कि तकनीकी प्रशिक्षण की कमी और डीआरएस की सीमित समझ इन गलतियों की बड़ी वजह हैं। आईसीसी ने इस पर अब तक कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।

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