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Saturday, March 14, 2026

‘अनबीलिबेबल क्रिकेटर, लेकिन मूडी कप्तान’ – रोहित शर्मा पर पूर्व क्रिकेटर का बयान चर्चा में

नई दिल्ली : रोहित शर्मा का भारत के कप्तान के रूप में कार्यकाल शनिवार (4 अक्टूबर) को समाप्त हो गया, जब चयन समिति के अध्यक्ष अजीत अगरकर ने शुभमन गिल को नया एकदिवसीय कप्तान घोषित किया। शुभमन गिल दो हफ्ते बाद ऑस्ट्रेलिया में भारतीय टीम की कमान संभालेंगे। रोहित शर्मा के नेतृत्व में भारत ने इस साल की शुरुआत में चैंपियंस ट्रॉफी जीतकर शानदार प्रदर्शन किया था, और अब टीम 50 ओवर के क्रिकेट में अपना पहला मैच नए कप्तान के नेतृत्व में खेलने जा रही है।

2021 में सीमित ओवरों की टीम की कप्तानी संभालने के बाद से रोहित शर्मा का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में प्रदर्शन बेहद शानदार रहा है। उनके नेतृत्व में टीम का जीत प्रतिशत 73.5% रहा, जो 100 अंतरराष्ट्रीय मैचों में कप्तानी करने वाले खिलाड़ियों में सर्वश्रेष्ठ आंकड़ा है। रोहित ने भारत को छह महीने के भीतर टी20 विश्व कप और चैंपियंस ट्रॉफी जिताने में अहम भूमिका निभाई, और 2023 में विश्व कप खिताब जीतने के बेहद करीब पहुंचे। हालांकि, करियर की शुरुआत में उन्हें सक्षम कप्तान के रूप में नहीं माना जाता था, लेकिन समय के साथ उन्होंने अपनी नेतृत्व क्षमता साबित की और टीम को लगातार सफलता दिलाई।

‘पागल और मूडी’ कप्तान

भारत के पूर्व सहायक कोच और घरेलू क्रिकेट में रोहित शर्मा के साथ खेल चुके अभिषेक नायर ने हाल ही में एक दिलचस्प खुलासा किया। उन्होंने बताया कि रोहित को उनके करियर के शुरुआती दिनों में मुंबई के क्रिकेट जगत में एक ‘पागल और मूडी’ कप्तान के रूप में खारिज कर दिया गया था। 13 साल पहले की यह घटना है तब रोहित भारत की वनडे और टेस्ट टीमों का स्थायी हिस्सा नहीं थे। नायर ने बताया कि कैसे रोहित को उस सीजन चोटिल अगरकर की जगह मुंबई रणजी ट्रॉफी की कप्तानी बनाया गया। फिर उन्हें 2 मैच बाद ही हटा दिया गया था।

क्रिकेटर अविश्वसनीय, लेकिन कप्तान मूडीरोहित शर्मा की कप्तानी पर खुलासा

नायर ने हाल ही में आशीष कौशिक के साथ एक पॉडकास्ट शो में बताया कि जब रोहित शर्मा मुंबई रणजी ट्रॉफी टीम के कप्तान थे, तो उन्हें कप्तानी से हटा दिया गया था। उस साल टीम ने जीत हासिल की थी। नायर ने कहा कि अजीत अगरकर कप्तान थे, लेकिन चोटिल हो जाने के कारण रोहित ने दो मैचों में कार्यवाहक कप्तानी संभाली। नायर ने आगे बताया, “ये पागल है। मुंबई में यही धारणा थी कि क्रिकेटर अविश्वसनीय है, लेकिन कप्तान मूडी है। मैंने उनकी जगह कप्तान बना और वे मेरे अंडर खेले। जब अजीत वापस आए तो वह कप्तान बन गए, और जब वह हटे तो मैंने फिर से कप्तानी की जिम्मेदारी संभाली।”

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