भोपाल (nst news) दुनिया के सर्वाधिक लोकप्रिय खेलों में से एक क्रिकेट की शोहरत दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। और बढ़े भी क्यों ना, अपने तीनों फॉर्मेट टेस्ट, वनडे और टी-20 के रूप में यह खेल दिन और रात दोनों समय में आकर्षक बन गया है। इसका रोमांच, प्रतियोगिता और हर गेंद पर बल्ले की चोट दर्शकों को मोहित कर लेती है। और फिर इसका जेंटलमैन रूप भी सभी को भाता है। बहरहाल अब तक हमने कमेंटेटर, खिलाड़ी और दर्शकों के नजरिए से क्रिकेट को जाना और समझा है। पर आज मैच रेफरी के नजरिए से जानते हैं कि क्रिकेट का सफर किस ओर जा रहा है। दरअसल पिछले दिन इंटरनेशनल क्रिकेट कमेटी (आइसीसी) के मैच रेफरी निषित पुंजा अपनी पत्नी के साथ ओमान से भोजपुर क्लब पहुंचे और यहां चल रही क्रिकेट की नर्सरी को देख अभिभूत हो गए।
उन्होंने यहां की स्पोर्ट्स फैसिलिटी को लेकर एएस सिंहदेव (एसपीजी चेयरमैन) से चर्चा की और कहा- इस तरह के क्लब से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों का निकलना रोचक है। उनका इशारा कीर्ति गौड़, अनिकेत वर्मा, मोहनिश मिश्रा, समय श्रीवास्तव, अयान मो. खान जैसे खिलाड़ियों की ओर था। क्रिकेट को लेकर उनका नजरिया समझने के प्रयास की प्रस्तुत है उनके साथ की गई बातचीत के अंश:
-भोजपुर क्लब को खेल की दुनिया में कितना महत्व देते हैं
आज के समय में भोजपुर क्लब जैसे संस्थान खेलों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। न सिर्फ क्रिकेट, बल्कि टेबल टेनिस, बैडमिंटन, फुटबॉल, जैसे खेल नहीं, बल्कि यहां पिकल बॉल जैसे खेलों का अभ्यास देखकर काफी अच्छा लगा। और फिर खिलाड़ियों को फिट रखने के लिए योग और जुंबा क्लासेस भी यहां की रौनक को बढ़ाते हैं।
-ओमान में क्रिकेट को लेकर लोगों की क्या सोच है। ओमान और दूसरे छोटे देशों में क्रिकेट कितना आगे बढ़ रहा है?
-अभी तो ओमान क्रिकेट में लेबल 2 पर है और वहां से काफी आगे जाना है। वह अभी तक लेबल 1 यानी आइसीसी के स्तर तक नहीं पहुंचा है। परंतु वहां क्रिकेट को चाहने वाले और खेलने वाले दोनों की संख्या बढ़ रही है। खासकर व्हाइट बॉल क्रिकेट में उनकी तरक्की हो रही है। उन्होंने 50 ओवर और टी-20 वर्ल्ड कप में क्वालीफाइ किया है, परंतु उनको अभी काफी लंबा सफर तय करना है।
-ओमान में भारत और पाकिस्तान दोनों देशों के खिलाड़ी होने का कितना फायदा मिलता है?
-हां, ओमान की टीम में कई भारतीय और पाकिस्तानी खिलाड़ी होने से वहां क्रिकेट की अलग समझ दिखाई देती है। खासकर भारत के जो क्रिकेट खिलाड़ी हैं, उनकी समझ बहुत अच्छी है और फिर ओमान क्रिकेट में उभरती हुई टीम है। उन्हें काफी मेहनत करनी होगी।
-भारतीय क्रिकेट टीम अभी जो नये सितारे उभरे हैं, उन्हें लेकर आपका क्या विचार है?
-हाल के दिनों में भारतीय टीम में जो युवा खिलाड़ी आए हैं, उनका खेल श्रेष्ठ है। शुभमन गिल, तिलक वर्मा, अभिषेक और खासकर अंडर-19 की टीमों के वैभव सूर्यवंशी, आयुष म्हात्रे जैसे खिलाड़ियों की क्रिकेट तो बेहतरीन है।
-अभी बीते दिनों भारतीय महिला क्रिकेट ने भी दुनिया में अपना परचम लहराया है। आपके हिसाब से क्रिकेट का यह नया रूप कितना अनूठा है?
-भारत की महिला क्रिकेट टीम को तो मैं पिछले चार-पांच वर्षों से फॉलो कर रहा हूं। गजब की टीम है। विश्व कप विजेता बनना भी बड़ी उपलब्धि है। और फिर यह ज्यादा मायने रखता है कि केवल बड़े शहरों या राज्यों ही नहीं, बल्कि छोटे शहरों व कस्बों से भी खिलाड़ी टीम हैं। मप्र से भी क्रांति गौड़ और आयुषी शर्मा टीम में हैं। यह बड़ी बात है।
-भोजपुर क्लब को लेकर आपका क्या कहना है। यहां की फैसिलिटी को लेकर क्या सोचते हैं?
-मैं जब बचपन में यहां आता था तो बैडमिंटन खेलता था। अब तो करीब-करीब सारे खेल यहां खेले जाने लगे हैं। यहां का सेटअप और स्टाफ बेहतरीन हैं। खास बात यह है कि यहां खिलाड़यों को एक बेहतर माहौल मिलता है। जिससे खेल को सुधारने का अवसर मिलता है।
-अब टी-20 विश्व कप करीब है और टीमों में खिलाड़ियों के चयन को लेकर चर्चाएं चल रही हैं। ऐसे में विराट और रोहित का क्या भविष्य है?
-भारतीय टीम बेहतर पोजीशन में है। खेल के तीनों फॉर्मेट में गेंदबाजी, बल्लेबाजी और फील्डिंग में टीम बेहतरीन है। युवा खिलाड़ी भी कमर कसकर तैयार हैं। परंतु बात करें रोहित और विरोट के टी-20 विश्व कप खेलने की तो यह यक्ष प्रश्न बन चुका है। हां मैं यह जरूर कहूंगा कि दोनों आज भी क्रिकेट के तीनों फॉर्मेट में खेलने के योग्य हैं और टी-20 के लिए भी डिजर्व करते हैँ।
मप्र में क्रिकेट तेजी से आगे बढ़ रहा है: मोहनिश
क्रिकेट और मध्यप्रदेश का रिश्ता काफी पुराना है। यहां से न केवल अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खिलाड़ी निकले हैं, बल्कि खेल के बाद भी उन्होंने क्रिकेट से जुड़े रहकर युवाओं के लिए हमेशा पथ प्रदर्शक का काम किया है। शायद यही वजह है कि आज मप्र क्रिकेट का नाम अंतरराष्ट्रीय पटल पर भी चमक रहा है। खास बात यह है कि यहां से अब महिला क्रिकेट खिलाड़ी भी उभर रही हैं। बहरहाल मप्र क्रिकेट को विश्व के फलक तक ले जाने में दूसरे खिलाड़ियों के साथ मोहनिश मिश्रा का भी बड़ा योगदान है। मोहनिश न केवल अच्छे खिलाड़ी रहे हैं, बल्कि अपने हुनर से वह आज भी नई पौध को सींच रहे हैं। मोहनिश अभी मप्र की अंडर-19 टीम के कोच हैं और यहां के क्रिकेट को लेकर उन्हें काफी उम्मीद है। पेश है बातचीत:
-बतौर क्रिकेटर मप्र का क्या भविष्य नजर आता है?
-मप्र ने शुरू से ही क्रिकेट को बेहतरीन खिलाड़ी दिए हैं। एक ओर नरेंद्र हिरवानी, राजेश चौहान, अमय खुरासिया जैसे खिलाड़ियों ने देश के खेलकर प्रदेश का गौरव बढ़ाया, वहीं रजत पाटीदार, वेंकटेश अय्यर, जैसे खिलाड़ी हमारे भविष्य हैं। दरअसल पिछले पांच वर्षों में मप्र का क्रिकेट ग्राफ एकदम से ऊपर चढ़ा है। और फिर अनिकेत वर्मा, आशुतोष, मंगेश यादव, शिवांश कुमार जैसे खिलाड़ियों में काफी संभावनाएं भी दिखाई देती है। आइपीएल में तो इन खिलाड़ियों ने बाजी मारी ही है, साथ ही देश के भी अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं।
-एमपीएल जैसे आयोजन से कितना फायदा हो रहा है?
-वाकई एमपीएल जैसी प्रतियोगिताओं से न केवल नये चेहरे सामने आते हैं, बल्कि उनकी क्षमताओं का भी पता चलता है। जिस तरह से टूर्नामेंट का आयोजन होता है, वह अदभुत है। इतना ही नहीं, एमपीएल से ही निकले करीब 11-12 खिलाड़ी आइपीएल तक पहुंचे हैं। यह टूर्नामेंट की सफलता बताता है।
-हाल ही में महिला खिलाड़ियों ने सफलता की जो इबारत लिखी है, उसमें मप्र कहां ठहरता है?
-हमारी महिलाओं ने तो वह कर दिखाया है, जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती है। और इसमें मप्र की खिलाड़ियों का योगदान होना हमारे लिए प्रतिष्ठा की बात है। क्रांति गौड़ तो प्रदेश की उभरती हुई खिलाड़ियों के लिए आइकॉन बन चुकी हैं। जबकि आयुषी शर्मा जैसी खिलाड़ियों में शिखर छूने की ललक बताती है कि हमारे यहां क्रिकेट को काफी अच्छी तरह सींचा जा रहा है। इसके लिए बीसीसीआइ को भी धन्यवाद दिया जाना चाहिए, जिसकी ओर से क्रिकेट को आगे बढ़ाने के लिए काफी प्रयास किए जा रहे हैं। यह तो बीसीसीआइ का ही प्रयास है कि छोटे गांव, शहर और कस्बों की प्रतिभाएं हमारी पुरुष और महिला क्रिकेट में दिखाई दे रही हैं।
प्रोफाइल-
जानिए अपने हुनरमंद को
मोहनिश मिश्रा ने स्कूल लेवल से आइपीएल तक क्रिकेट खेली है। इसके बाद भी क्रिकेट के लिए उनका उमड़ता प्यार इस बात का गवाह है कि वह अभी मप्र की अंडर-19 टीम को भविष्य के लिए तैयार कर रहे हैं। मोहनिश का खुद का रिकॉर्ड भी बेहतरीन रहा है। बतौर दायें हाथ के बल्लेबाज और ऑफ ब्रेक बॉलर उनहोंने डेक्कन चार्जर्स, दिल्ली जायंट्स, पुणे वॉरियर और अर्बनाइजर्स हैदराबाद के लिए आइपीएल खेला है।
वर्जन…..
भोपाल और प्रदेश के खिलाडिय़ों के लिए नेट्स की सुविधाएं मुहैया कराई गई हैं, इसी का परिणाम है कि आज यहां निधि, क्रांति गौड़, अनिकेत वर्मा, मध्यप्रदेश अंडर- 19 टीम के कोच मोहनीश मिश्रा, पूर्व भारतीय खिलाड़ी जे.पी. यादव, समय श्रीवास्तव, अयाज मोहम्मद खान (ओमान टीम) जैसे कई प्लेयर यहां भोजपुर क्लब से निकलकर देश का नाम रोशन कर रहे हैं। आपको यह बताना जरूरी है कि जब बरसात में खेल बंद हो जाते हैं, तो प्रदेश और शहर के नामी खिलाड़ी यहां भोजपुर क्लब में आकर लगातार प्रैक्टिस कर अपना खेल निखारते हैं जबकि शहर की क्रिकेट की बेहतरी के लिए भोजपुर क्लब ये सुविधाएं उपलब्ध कराता रहा है।
– पूर्व एडीजी सुशोभन बेनजी, भोजपुर क्लब क्रिकेट कमेटी के अध्यक्ष


