कोलकाता. भारतीय विकेटकीपर-बल्लेबाज़ ऋचा घोष ने पिछले कुछ वर्षों में अपने खेल और व्यक्तित्व दोनों में बदलाव किए हैं। कभी टॉप ऑर्डर में उतरने वाली ऋचा अब मिडिल ऑर्डर में टीम की फिनिशर बन चुकी हैं। वह कहती हैं, “जब मैं छोटी थी तो मुझे छक्के मारना अच्छा लगता था, लेकिन अब मैंने सीखा है कि मैच जिताने के लिए सिर्फ बड़े शॉट काफी नहीं हैं। स्ट्राइक रोटेट करना और लंबे समय तक टिकना भी उतना ही जरूरी है।”
फिनिशर की नई पहचान
कोच अमोल मजूमदार ने उन्हें अलग-अलग पोज़िशन पर आज़माया, लेकिन 2025 वर्ल्ड कप के लिए भारत ने उन्हें नंबर छह पर खेलने का फैसला किया है। ऋचा के नाम सिर्फ 43 वनडे में 24 छक्के हैं, जो स्मृति मांधना और हरमनप्रीत कौर के बाद भारत में तीसरा सर्वाधिक आंकड़ा है। WPL में भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया है। बेंगलुरु की ओर से खेलते हुए उन्होंने 27 गेंदों पर नाबाद 64 रन की पारी खेलकर टीम को रिकॉर्ड चेज़ दिलाया था।
दबाव में बेहतर खेल
ऋचा का मानना है कि दबाव की स्थिति में शांत रहना उनकी सबसे बड़ी ताकत है। वह कहती हैं, “मैदान पर अगर कोई मुझे स्लेज करता है तो मुझे मज़ा आता है। मैं चुप्पी और आक्रामकता दोनों का आनंद लेती हूं। गेंद को देखकर खेलना ही मेरा मंत्र है।” उनकी यह सोच और बैटिंग स्टाइल भारत को मुश्किल हालात में जीत दिला सकता है।
भारत की वर्ल्ड कप उम्मीद
भारत ने अंडर-19 स्तर पर तो ट्रॉफी जीती है, लेकिन सीनियर वर्ल्ड कप अभी बाकी है। ऋचा कहती हैं, “ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड को ट्रॉफी उठाते देखा है, अब मैं चाहती हूं कि भारत भी यह खुशी महसूस करे।” स्मृति मांधना और हरमनप्रीत कौर की मौजूदगी के बावजूद इस बार भारत की नज़रें ऋचा पर होंगी। 22 साल की उम्र में उनका बल्ला और विकेटकीपिंग दोनों टीम इंडिया को वर्ल्ड कप जिताने में अहम साबित हो सकते हैं।

