विशाखापट्टनम. महिला विश्व कप में भारत ने लगातार दो जीत दर्ज की हैं, जिससे वह आठ टीमों की अंकतालिका में शीर्ष पर है। लेकिन कप्तान हरमनप्रीत कौर ने पाकिस्तान के खिलाफ 88 रन की जीत के बाद साफ कहा कि टीम को अभी कई मोर्चों पर सुधार की जरूरत है। अगले तीन मुकाबले साउथ अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड जैसी मजबूत टीमों से हैं। इन मैचों में भारत का प्रदर्शन तय करेगा कि वह सेमीफाइनल तक पहुंच सकेगा या नहीं।

सही गेंदबाजी संयोजन की तलाश
अब तक भारत सिर्फ पांच मुख्य गेंदबाजों के साथ मैदान में उतरा है, जिनमें दो ऑलराउंडर शामिल हैं। श्रीलंका और पाकिस्तान के खिलाफ यह रणनीति सफल रही, लेकिन मजबूत बल्लेबाजी लाइन-अप के सामने यह जोखिम भरी हो सकती है। हरमनप्रीत चाहती हैं कि घरेलू पिचों पर टीम को सही संयोजन समझने में आसानी हो। अमनजोत कौर की चोट और रेणुका सिंह की शानदार गेंदबाजी ने चयन को और मुश्किल बना दिया है। अगर अमनजोत फिट हो भी जाती हैं, तो रेणुका को बाहर करना आसान नहीं होगा।
बाएं हाथ के स्पिनरों से दिक्कत
भारत की बल्लेबाजों को अब तक बाएं हाथ के स्पिनरों के खिलाफ संघर्ष करना पड़ा है। श्रीलंका की इनोका रणवीरा ने गुवाहाटी में जेमिमा रॉड्रिग्स और हरलीन देओल को जल्दी आउट कर भारत को दबाव में डाल दिया था। पाकिस्तान की सादिया इकबाल ने भी अपनी लाइन-लेंथ और टर्न से भारतीय बल्लेबाजों को बांधे रखा। अब विशाखापट्टनम में भारत का सामना साउथ अफ्रीका की नॉनकुलुलेको म्लाबा से होगा, जिन्होंने न्यूजीलैंड के खिलाफ चार विकेट लेकर शानदार गेंदबाजी की थी। अगर भारतीय बल्लेबाजों ने उनसे पार नहीं पाया तो यह मैच मुश्किल हो सकता है।

फील्डिंग में ढिलाई बढ़ी चिंता
इंग्लैंड के खिलाफ ऐतिहासिक सीरीज में भारत की फील्डिंग शानदार रही थी, लेकिन विश्व कप में वही लय नजर नहीं आई। कई आसान कैच छूटे और मिसफील्ड की वजह से विपक्षी टीमों को रन बनाने के मौके मिले। पाकिस्तान मैच में पहले 25 ओवरों में ही हरमनप्रीत और स्मृति मंधाना से तीन मिसफील्ड हुईं। यह स्थिति आने वाले मैचों में भारी पड़ सकती है, खासकर तब जब विपक्ष में तेज रन बनाने वाली टीमें हों।
बल्लेबाजी की धीमी शुरुआत
भारत की सबसे बड़ी समस्या पावरप्ले में रन गति की कमी है। पहले दो मैचों में टीम ने शुरुआती 10 ओवरों में क्रमशः 43 और 54 रन ही बनाए। स्मृति मंधाना की फॉर्म में गिरावट ने टीम की रन रफ्तार को प्रभावित किया है। उन्होंने श्रीलंका और पाकिस्तान के खिलाफ क्रमशः 8 और 23 रन बनाए। प्रतिका रावल और हरलीन देओल की जोड़ी स्थिर तो है, लेकिन उनका स्ट्राइक रेट बहुत कम है। रावल 83 के स्ट्राइक रेट से खेल रही हैं, जबकि हरलीन का औसत सिर्फ 77 है। इससे टीम की रन गति बीच के ओवरों में रुक जाती है।
मध्यक्रम का लगातार ढहना
भारत का मध्यक्रम इस टूर्नामेंट में कमजोर कड़ी साबित हो रहा है। श्रीलंका के खिलाफ 124 रन पर छह विकेट गिर गए थे, जबकि पाकिस्तान के खिलाफ पांचवां विकेट 159 पर गया। निचले क्रम ने दोनों बार टीम को संभाला, लेकिन बड़े मुकाबलों में यह रणनीति काम नहीं आएगी। टीम को मंधाना, हरमनप्रीत और रॉड्रिग्स से बड़ी पारियों की उम्मीद है। तीनों के बीच अब तक सबसे बड़ा स्कोर सिर्फ 32 रहा है। आने वाले मैचों में इन खिलाड़ियों का प्रदर्शन भारत की विश्व कप यात्रा तय करेगा।

