नई दिल्ली: 64 खानों के खेल के मैदान पर भारतीय प्रतिभाओं की तीव्र प्रगति ने 5 बार के विश्व चैंपियन विश्वनाथन आनंद को यह विश्वास दिलाया है कि जल्द ही ऐसी स्थिति आ सकती है, जहां दो भारतीय विश्व चैंपियन के ताज के लिए एक-दूसरे के खिलाफ खेल रहे होंगे। मंगलवार 16 जुलाई 2024 को चेन्नई में ‘एक्सप्रेस अड्डा’ में आनंद ने भविष्यवाणी की कि वे (भारतीय खिलाड़ी) कुछ वर्षों में (विश्व शतरंज चैंपियनशिप में) एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी हो सकते हैं। ‘एक्सप्रेस अड्डा’ आनंद पत्नी अरुणा और भारत के शीर्ष रैंक वाले शतरंज खिलाड़ी अर्जुन एरिगैसी के साथ मुख्य अतिथि थे।
मीडिया रिपोर्ट अनुसार, विश्वनाथन आनंद ने कहा, ‘शतरंज के खिलाड़ियों की यह मौजूदा भारतीय पीढ़ी शीर्ष के इतने करीब है कि वे ज्यादातर चीजों को सूंघ रहे हैं। जाहिर है, सबसे अधिक बाजी (विश्व चैंपियनशिप में) के साथ खेलना एक ऐसा अनुभव है, जिसका आपको बहुत ही प्राकृतिक तरीके से सामना करना पड़ता है, ताकि आप यह समझ सकें (कि वहां दबाव कैसा होता है)।’ देश के पहले ग्रैंडमास्टर आनंद ने देश में शतरंज क्रांति की अगुआई की। इसी का नतीजा है कि तीन भारतीय अर्जुन एरिगैसी (विश्व नंबर 4), डी गुकेश (विश्व नंबर 7) और आर प्रज्ञानंद (विश्व नंबर 8) मौजूदा शीर्ष 10 रैंक में जगह बना पाए हैं। गुकेश इस साल के अंत में विश्व चैंपियन के ताज के लिए डिंग लिरेन को चुनौती देंगे। अगर वह चीनी ग्रैंडमास्टर से खिताब छीनने में कामयाब हो जाते हैं, तो वह सबसे कम उम्र के विश्व चैंपियन बन जाएंगे।
विश्वनाथन आनंद ने कहा, ‘भारतीय अब बहुत सारे खेलों का आनंद ले रहे हैं। हम कुछ नया चाहते हैं इसलिए पिछले साल हमारे पास ग्लोबल शतरंज लीग थी, जो खेल को आयोजित करने का एक नया भारतीय तरीका था। कुल मिलाकर, मैं कहूंगा कि आज भारत में खिलाड़ी बनना 20 साल पहले की तुलना में बहुत आसान है। अब आपको प्रशिक्षण, उपकरण और दर्शकों से बहुत समर्थन मिलता है।’ यह पूछे जाने पर कि क्या वह भारतीय खिलाड़ियों की अगली पीढ़ी में खुद की और अपनी “अच्छे आदमी” की छवि की झलक देखते हैं, विश्वनाथन आनंद ने जवाब दिया, ‘उन्होंने मुझे बड़ा होते देखा है और शायद इसने एक भूमिका निभाई है। लेकिन ईमानदारी से कहूं तो वे पहले से ही इसके लिए तैयार थे। उम्र का इतना अंतर है कि वे मुझे हर समय ‘सर’ कहकर बुलाते थे। कभी-कभी, एक ही वाक्य में सात बार। यह अजीब लगता है। मैंने उन्हें एक बार रोकने की कोशिश की तो उन्होंने पूछा- क्या आप अंकल कहलाना पसंद करेंगे? वे बहुत अच्छे से पले-बढ़े हैं।’
विश्वनाथन आनंद ने कहा, ‘मैंने हाल ही में उनके साथ बहुत ज्यादा नहीं खेला है। मैंने 6 साल पहले एक मैच में प्रज्ञानंद के साथ खेला था। मैंने पिछले साल गुकेश के साथ खेला था। यह कभी-कभार होता है। इवेंट में भी वे बहुत विनम्र होते हैं, लेकिन बोर्ड पर नहीं। वे बोर्ड पर बहुत प्रतिस्पर्धी होते हैं। मुझे अच्छा लगता है। वे बोर्ड पर आपको हराने की इच्छा से आते हैं, चाहे आप कोई भी हों। खेल के बाद, वे अविश्वसनीय रूप से विनम्र हो जाते हैं।’ विश्वनाथन आनंद की पत्नी अरुणा ने मानसिकता में आए बदलाव के बारे में बात की, जो अब खेल में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। आनंद की मैनेजर के रूप में, वह खुद को शतरंज की वैश्विक शासी संस्था FIDE और अन्य शीर्ष ग्रैंडमास्टर्स के साथ लगातार बैटल ऑफ विट्स (बल के बजाय बुद्धि का इस्तेमाल कर एक-दूसरे के साथ प्रतिस्पर्धा करना) में पाती थीं। अरुणा पत्नी होने के साथ आनंद की प्रोफेशनल जर्नी में दशकों से उनकी मैनेजर हैं।
अरुणा ने कहा, ‘दुनिया अब एक महिला के भूमिका निभाने को स्वीकार रही है। जब मैंने शुरुआत की थी तो मुझसे लगातार सवाल पूछे जाते थे: ‘एक महिला के रूप में, क्या आप यह जानती हैं?’ या ‘आप सिर्फ पत्नी हैं’ लेकिन अब, कोई भी आपके जेंडर पर सवाल नहीं उठाता। लेकिन 2010 और 2011 में ज्यादातर समय मैं 50 पुरुषों के साथ कमरे में अकेली महिला होती थी। आनंद मेरा मजाक उड़ाते थे और कहते थे, ‘क्या तुमने इन बड़े हॉलीवुड टाइप के लोगों को देखा है? उसमें लंबे-तगड़े बॉडीगार्ड होते हैं और एक छोटा दिखने वाला आदमी होता है। और आपको छोटे आदमी से डरना होगा, क्योंकि वह आदमी परेशान करता है! इसलिए मैंने तुमसे शादी की! तुम वही छोटे आदमी हो।’ पेशेवर सेटिंग में जीवनसाथी के साथ काम करने के रहस्य के बारे में पूछे जाने पर, अरुणा ने कहा, ‘यह वास्तव में विश्वास पर आधारित है।
आनंद बहुत यात्रा करते हैं, इसलिए मुझे घर पर बहुत ज्यादा मदद करनी पड़ती है। हमारा बेटा अभी अपनी किशोरावस्था में प्रवेश कर रहा है। आनंद जानते हैं कि जब वह घर लौटेंगे तो उन्हें मुझसे ज्यादा बेटे अखिल पर ध्यान देना होगा। इन चीजों के बारे में जागरूक होना बहुत जरूरी है। ज्यादातर यह विश्वास पर काम करता है। यह जेंडर-विशिष्ट भूमिकाओं पर काम नहीं करता है।’ अरुणा ने बताया, ‘बस जब हम कोई निर्णय लेते हैं, तो हम समझते हैं कि यह एक सामान्य निर्णय है जो हम दोनों के लिए काम करता है। सच कहा जाए तो हमारे रिश्ते में, मैं ही एकमात्र इंसान हूं जो अपना आपा खो देती हूं। आनंद भी आपा खोते हैं, लेकिन 1 ही सेकंड में उनका गुस्सा गायब हो जाता है। मैं अपना आपा खो देती हूं तो तीन तक रहता है। उसके बाद उन्हें बहुत मेहनत करनी पड़ती है।’
इस बीच, अर्जुन ने भारतीय शतरंज सर्किट में उनके, गुकेश, प्रज्ञानंद और विद्धुत गुजराती जैसे अन्य लोगों के बीच स्वस्थ प्रतिद्वंद्विता के बारे में बात की। उन्होंने कहा, ‘हमारे बीच थोड़ी प्रतिद्वंद्विता है, लेकिन यह बहुत स्वस्थ है। यह दूसरों को कड़ी मेहनत करने और बेहतर करने के लिए प्रेरित करती है। यह (दूसरों की उपलब्धियों से) ईर्ष्या महसूस करने को लेकर नहीं है। हमारे पास अभी जो है वह बहुत अच्छा है और अगर यह ऐसा ही रहे तो यह सभी के लिए सबसे अच्छा है, क्योंकि इससे सभी को मदद मिलती है।’ भारतीय प्रतिभाओं का सामना करते समय शीर्ष खिलाड़ियों की मानसिकता कैसे बदल गई है, इस बारे में बात करते हुए अर्जुन ने कहा, ‘2020 में, हमें मैग्नस कार्लसन या अन्य के खिलाफ खेलने के बहुत अधिक मौके नहीं मिले। लेकिन अगर हम उनके साथ खेलते, तो वे शायद हमारे खिलाफ अधिक जोखिम उठाते। लेकिन वे अब हमारे साथ खेलते समय वैसे जोखिम नहीं उठाएंगे, क्योंकि वे जानते हैं कि हम उन पर धावा बोलने में सक्षम हैं, इसलिए अब हमें पर्याप्त सम्मान मिलता है।’