नई दिल्ली : ICC मेन्स टी20 वर्ल्ड कप 2026 के फाइनल के दौरान अर्शदीप सिंह और न्यूजीलैंड के बैट्समैन डेरिल मिशेल के बीच हुए थ्रो विवाद से माहौल गर्म हो गया था। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मैच के बाद अर्शदीप सिंह ने मिशेल से माफी मांग ली, लेकिन टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर का बयान है कि उन्हें इसके लिए सॉरी कहने की जरूरत नहीं थी।
अर्शदीप के समर्थन में गंभीर: मैदान पर आक्रामकता जरूरी
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार गंभीर ने कहा कि पहले भी ऐसी घटनाएं हुई हैं, लेकिन सोशल मीडिया के जमाने में उन पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है और इस तरह की बातों पर ज्यादा नजर रखी जाती है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार गंभीर ने एएनआई पॉडकास्ट पर कहा कि ये सही था। आप अपने देश को रिप्रेजेंट कर रहे हैं और आपका अग्रेशन दिखाना तो बनता ही है। अगर आप थ्रो बैक करते हैं तो इसमें गलत क्या है। कोई भी बॉलर दो छक्के खाना पसंद नहीं करता और मैं अपने प्लेयर्स से ऐसा ही रिस्पॉन्स देखना चाहता हूं। इसमें कुछ भी गलत नहीं है साथ ही अगर उसने सॉरी नहीं भी कहा होता तो भी मुझे कोई दिक्कत नहीं थी। वैसे उसे सॉरी कहने की जरूरत नहीं थी।
टीम और देश के लिए जीत ही सबसे बड़ी प्राथमिकता
गौतम गंभीर ने आगे कहा कि वैसे ये अच्छा बी है कि उन्होंने माफी मांगी, लेकिन क्रिकेट के मैदान पर कोई दोस्त या दुश्मन नहीं होता। आपका काम अपने देश को रिप्रेजेंट करना है अपने देश के लिए मैच जीतना है। ये चीजें पहले भी होती थीं, लेकिन सोशल मीडिया के जमाने में चीजें बढ़ जाती हैं जिसकी मुझे लगता है कि कोई जरूरत नहीं है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, आपको बता दें कि यह घटना न्यूजीलैंड के रन चेज के दौरान हुई जब मिचेल ने अर्शदीप को लगातार दो छक्के मारे। जवाब मे, भारतीय पेसर ने बैटर को क्रीज से थोड़ा बाहर देखकर रन-आउट करने की कोशिश की, लेकिन थ्रो स्टंप से चूककर मिचेल की जांघ पर लगा जिसके बाद मैदान पर दोनों खिलाड़ियों के बीच थोड़ी बहस हुई।
फाइनल के बाद अर्शदीप सिंह पर पेनल्टी
इस घटना को लेकर इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल ने अर्शदीप सिंह पर मैच फीस का 15 प्रतिशत जुर्माना लगाया। ICC के अनुसार अर्शदीप ने आर्टिकल 2.9 के तहत कोड ऑफ कंडक्ट के लेवल-1 का उल्लंघन किया, जो किसी इंटरनेशनल मैच के दौरान किसी खिलाड़ी की ओर या उसके पास खतरनाक या अनुचित तरीकों से बॉल आईपीएल से जुड़ी है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जुर्माने के अलावा अर्शदीप के अनुशासनात्मक रिकॉर्ड में एक डिमेरिट अंक भी जोड़ा गया। यह 24 महीने के भीतर उनका पहला अपराध था। ICC ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी औपचारिक सुनवाई की ज़रूरत नहीं पड़ी, क्योंकि भारतीय तेज गेंदबाज ने मैच रेफरी एंडी पाइक्रॉफ्ट द्वारा सुझाए गए दंड को स्वीकार कर लिया था।


