नई दिल्ली: कोलकाता टेस्ट में वह नज़ारा देखने को मिला जिसकी उम्मीद शायद किसी ने नहीं की थी। पूरे मैच के दौरान भारतीय टीम साउथ अफ्रीका पर हावी रही, और जब जीत के लिए 124 रनों का लक्ष्य मिला, तो लगा कि मुकाबला आसानी से भारत के पक्ष में जाएगा। लेकिन टेम्बा बावुमा की दमदार कप्तानी ने मैच का रुख बदल दिया। उनकी रणनीति और खिलाड़ियों की अनुशासित गेंदबाज़ी ने भारत को मात्र 93 रन पर ऑलआउट कर दिया। नतीजतन, साउथ अफ्रीका ने 30 रन से एक यादगार जीत दर्ज की और सीरीज़ में 1-0 की बढ़त हासिल कर ली।
15 साल बाद भारत में साउथ अफ्रीका की ऐतिहासिक टेस्ट जीत
पहले टेस्ट मैच के दौरान भारतीय तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह ने टेम्बा बावुमा को बौना तक कह दिया था, लेकिन वो शायद भूल गए थे कि इसी बौने ने साउथ अफ्रीका को वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप का खिताब दिलाया था और वो टेस्ट चैंपियन टीम के खिलाफ खेल रहे थे। टेम्बा ने दिखा दिया कि उनकी टीम का चैंपियन बनना महज एक संयोग नहीं था और वो मैच जीतना जानते हैं।
साउथ अफ्रीका ने कोलकाता टेस्ट मैच जीतने से पहले भारत में अपना आखिरी टेस्ट मैच 2010 में नागपुर में जीता था। इसके बाद साउथ अफ्रीका को भारत में कोई टेस्ट मैच जीतने के लिए 15 साल लग गए, लेकिन आखिरी में टेम्बा की कप्तानी में साउथ अफ्रीका ने अपनी हार का सिलसिला भारत में तोड़ ही दिया।
कप्तान के रूप में टेम्बा बावुमा का यह 11वां टेस्ट मैच था, और उल्लेखनीय बात यह है कि उन्होंने अब तक 10 टेस्ट में जीत दर्ज की है, जबकि एक मुकाबला ड्रॉ रहा है। यानी बावुमा ने कप्तानी में अभी तक एक भी टेस्ट मैच नहीं हारा। कोलकाता टेस्ट में भी उन्होंने चुनौतीपूर्ण और कठिन पिच पर दूसरी पारी में बेहद मूल्यवान कप्तानी पारी खेलते हुए नाबाद 55 रन जोड़े। उनकी यह पारी साउथ अफ्रीका की जीत और भारत की हार का निर्णायक कारण बनी। इसके बाद टीम के गेंदबाज़ों ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत को पूरी तरह दबाव में ला दिया और मैच में जीत सुनिश्चित कर दी।


