Deepthi ने देश का नाम रोशन किया लेकिन जब उनका जन्म हुआ तब उनके पिता को यह सलाह दी गई कि वह अपनी बेटी को अनाथालय में दे आएं

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नई दिल्ली: भारतीय एथलीट दीप्ति जीवानजी ने सोमवार को वर्ल्ड एथलेटिक पैरा चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया। यह भारत का इन खेलों के ट्रैक इवेंट में पहला गोल्ड मेडल है। आज दीप्ति ने देश का नाम रोशन किया लेकिन जब उनका जन्म हुआ तब उनके पिता को यह सलाह दी गई कि वह अपनी बेटी को अनाथालय में दे आएं। बेटी के रूप को लेकर उन्हें ताने भी दिए गए लेकिन माता-पिता ने दुनिया की परवाह नहीं की और आज उनकी बेटी एक वर्ल्ड चैंपियन है।

दीप्ति घर का पहला बच्चा थी। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जब वह पैदा हुईं तो माता-पिता को पता चला कि उनकी बेटी मानसिक रूप से कमजोर है। जन्म के समय दीप्ति बेटी का सिर बहुत छोटा था और उनके होंठ और नाक सामान्य नहीं थे। दीप्ति को देखकर लोगों ने उसे बंदर और पागल तक कहा। दीप्ति के परिवार को कहा गया कि वह बेटी को किसी अनाथालय में दे आएं लेकिन दीप्ति के पिता ने ऐसा कुछ नहीं किया।

दीप्ति का बचपन भी गरीबी में बिता। दिप्ति के दादा की मौत के बाद परिवार तो जमीन बेचनी पड़ी। इसके बाद पिता दिन में 100 से 150 रुपए कमाते थे। दीप्ति की मां और बहन भी परिवार चलाने के लिए काम करती थीं। गांव वाले बड़े होने पर भी दीप्ति को लगातार ताने मारते थे। परिवार वाले कोशिश करते थे कि दीप्ति इन सब चीजों पर ध्यान न दें। दीप्ति की प्रतिभा को सबसे पहले पीटी कोच बियानी वेंकटेशवारापू ने पहचाना। रूरल डेवेलपमेंट फाउंडेशन के तहत उन्होंने गांव में दीप्ति की प्रतिभा को पहचाना। दीप्ति को ट्रेन करने के लिए एक खास कोच की जरूर थी। यह कोच उन्हें हैदराबाद के साई सेंटर में मिला। दीप्ति के परिवार के पास बेटी को हैदराबाद भेजने तक के पैसे नहीं थे। हालांकि एन रमेश ने परिवार को समझाया और अपनी जिम्मेदारी पर दीप्ति को ले गए। साई सेंटर में दीप्ति को उन्ही के स्तर पर जाकर रेस और उसके नियम समझाएं।

दीप्ति के करियर में अगला बड़ा मोड़ आया जब नेशनल बैडमिंटन कोच गोपीचंद ने स्टेडियम में उन्हें अभ्यास करते देखा। उन्होंने रमेश को सलाह दी कि दीप्ति को सिकंदराबाद भेजा जाए जहां दीप्ति जैसे एथलीट्स को खास ट्रेनिंग दी जाती है। गोपीचंद की माइटाह फाउंडेशन की मदद से दीप्ति अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिए तैयार हो गईं। दीप्ति के कोच का कहना है कि यह एथलीट बहुत शांत रहती है। कभी थकान को लेकर शिकायत नहीं करती। कोच की हर बार मानती हैं।

जापान के कोबे में दीप्ति ने सभी की मेहनत को सोने में बदल दिया। अपने ऐतिहासिक प्रदर्शन से उन्होंने हर उस इंसान को मुंह बंद कर दिया जो कि दीप्ति को उनके रंग-रूप, मानसिक कमजोरी पर आंक रहे थे। दीप्ति ने पेरिस पैरालंपिक के लिए क्वालिफाई कर लिया है और देश को उनसे खेल के सबसे बड़े मंच पर गोल्ड की उम्मीद होगी।

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