पेरिस: भारतीय महिला बैडमिंटन खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पेरिस पैरालंपिक में दो पदक दिलाए। थुलासिमाथी मुरुगेसन ने महिला एकल एसयू5 वर्ग में रजत पदक अपने नाम किया, जबकि मनीषा रामदास ने इसी वर्ग में कांस्य पदक जीता। भारत इस तरह पेरिस पैरालंपिक में अब तक 11 पदक जीत चुका है। वहीं, देश को बैडमिंटन में तीसरा पदक मिला है। मुरुगेसन और मनीषा से पहले नितेश कुमार ने पुरुष एकल एसएल3 वर्ग में स्वर्ण पदक जीता था।
सबसे पहले मनीषा ने कांस्य पदक मुकाबले में डेनमार्क की कैथरीन रोसेनग्रेन को एकतरफा अंदाज में 21-12, 21-8 से हराया। इसके बाद मुरुगेसन का फाइनल में चीन की यांग क्यू जिया से सामना हुआ, जहां यह भारतीय खिलाड़ी अपनी प्रतिद्वंद्वी के सामने चुनौती पेश नहीं कर सकीं और उन्हें 17-21, 10-21 से हार का सामना कर रजत पदक से संतोष करना पड़ा।
19 वर्षीय मनीषा को रोसेनग्रेन को पछाड़ने में सिर्फ 25 मिनट लगे। मनीषा ने पूरे मैच के दौरान अपना दबदबा बनाए रखा और विपक्षी खिलाड़ी को कोई मौका नहीं दिया। उन्होंने पहले गेम में ही बढ़त बना ली थी और यह गेम 13 मिनट में अपने नाम किया। इसके बाद 12 मिनट में दूसरा गेम जीतकर कांसा लाने में सफल रहीं। मनीषा इसके साथ ही पैरालंपिक में बैडमिंटन स्पर्धा में पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बनीं। हालांकि, जल्द ही मुरुगेसन भी इस सूची में शामिल हो गईं। मनीषा को सेमीफाइनल में मुरुगेसन ने ही हराया था।
मुरुगेसन पहली भारतीय महिला हैं जो पैरालंपिक में बैडमिंटन स्पर्धा के फाइनल में पहुंची थीं। फाइनल में मुरुगेसन ने चीनी खिलाड़ी को अच्छी चुनौती दी और जल्द ही स्कोर 4-4 से बराबर किया। एक समय मुरुगेसन ने दो अंक की बढ़त भी बना ली थी, लेकिन क्यू जिया इस बढ़त को तोड़ने में सफल रहीं। चीनी खिलाड़ी ने इसके बाद मुरुगेसन के सामने कड़ी चुनौती पेश की और मुकाबला अपने नाम करने में ज्यादा देर नहीं लगाई।


