2036 ओलंपिक में भारत को टॉप 10 में लाने की रणनीति तय: खेलो भारत कॉन्क्लेव में डॉ. मंडाविया का विजन

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  • 2036 ओलंपिक में टॉप-10 की रैंकिंग लक्ष्य, 2047 तक वैश्विक खेल शक्ति बनने की तैयारी

  • खेलो भारत नीति 2025 के अंतर्गत स्पोर्ट्स गवर्नेंस बिल मानसून सत्र में होगा पेश

  • डॉ. मंडाविया बोले – अहं त्यागकर साथ मिलकर काम करें, तभी बनेगा ‘विकसित भारत’

नई दिल्ली. केंद्रीय युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया ने गुरुवार को खेलो भारत कॉन्क्लेव में भारत को 2036 ओलंपिक और पैरालंपिक में शीर्ष 10 देशों में शामिल करने की रणनीति साझा की। इस एकदिवसीय कार्यक्रम में भारतीय ओलंपिक संघ, पैरा ओलंपिक समिति, राष्ट्रीय खेल महासंघों, कॉर्पोरेट घरानों और खेल प्रशासकों समेत देशभर से शीर्ष हस्तियों ने भाग लिया।

कॉन्क्लेव में ‘खेलो भारत नीति 2025’ के तहत कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई, जिनमें खेल प्रशासन में सुधार, एक कॉर्पोरेट-एक खेल योजना, मैडल रोडमैप और खेलों में अच्छा शासन जैसे विषय शामिल रहे। साथ ही डॉ. मंडाविया ने यह भी कहा कि मॉनसून सत्र में राष्ट्रीय खेल प्रशासन विधेयक संसद में पेश किया जाएगा।

डॉ. मंडाविया ने कहा, “खेल एक जनआंदोलन है। अगर हमें लक्ष्य हासिल करना है तो अहं छोड़कर मिलकर काम करना होगा। प्रधानमंत्री मोदी जी का भी यही विजन है कि भारत एकजुट होकर खेलों में दुनिया की शक्ति बने।”

राज्य मंत्री श्रीमती रक्षा निकिल खडसे ने बताया कि खेलो भारत नीति ज़मीनी हकीकतों और चुनौतियों के अध्ययन के बाद तैयार की गई है और यह नीति रोजगार, युवा मार्गदर्शन और खेलों को मनोरंजन का साधन बनाने की दिशा में मदद करेगी।

सरकार ने एक तीन-स्तरीय टैलेंट डेवलपमेंट पिरामिड की भी योजना बनाई है, जिसमें स्कूल स्तर से ओलंपिक प्रशिक्षण केंद्रों तक खिलाड़ियों को मार्ग मिलेगा। इसके अंतर्गत आवासीय स्पोर्ट्स स्कूल, इंटरमीडिएट लेवल और अंततः इंटरनेशनल मेडल संभावित खिलाड़ियों के लिए एलीट डिविजन की व्यवस्था की जाएगी।

डॉ. मंडाविया ने सभी खेल महासंघों से अगस्त तक 5-वर्षीय नीति दस्तावेज देने की मांग की है, ताकि उसके आधार पर 10-वर्षीय दीर्घकालीन योजना तैयार की जा सके। साथ ही प्रदर्शन आधारित अनुदान देने की बात भी कही गई है ताकि ज़िम्मेदारी के साथ परिणाम भी सुनिश्चित हों।

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