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Saturday, March 14, 2026

लिएंडर पेस के पिता वेस पेस का 80 वर्ष की उम्र में निधन, 1972 ओलंपिक हॉकी में जीता था कांस्य

नई दिल्ली: 1972 म्यूनिख ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय हॉकी टीम के सदस्य और दिग्गज टेनिस खिलाड़ी लिएंडर पेस के पिता, वेस पेस का 80 वर्ष की आयु में निधन हो गया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, वह लंबे समय से पार्किंसन रोग से जूझ रहे थे। मंगलवार सुबह उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें शहर के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली।

वेस पेस का खेल जगत से रहा गहरा नाता

वेस पेस का भारतीय खेलों से गहरा और लंबा जुड़ाव रहा है। उनकी देखरेख में कई खिलाड़ियों को विभिन्न खेलों में डेब्यू का अवसर मिला और उन्होंने देश के खेल विकास में अहम योगदान दिया। हॉकी में वह भारतीय टीम के लिए मिडफील्डर की भूमिका निभाते थे, वहीं फुटबॉल, क्रिकेट और रग्बी जैसे कई खेलों में भी उन्होंने अपनी प्रतिभा दिखाई। वेस पेस ने 1996 से 2002 तक भारतीय रग्बी फुटबॉल संघ के अध्यक्ष के रूप में कार्य करते हुए इस खेल के प्रचार-प्रसार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

वेस पेस ने बीसीसीआई के साथ भी निभाई अहम भूमिका

खेल चिकित्सा विशेषज्ञ के रूप में वेस पेस ने एशियाई क्रिकेट परिषद, भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) और भारतीय डेविस कप टीम सहित कई प्रमुख खेल संगठनों के साथ चिकित्सा सलाहकार के रूप में काम किया। उनके योगदान ने खिलाड़ियों के स्वास्थ्य और फिटनेस को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

लिएंडर पेस ने भी अपने करियर में ओलंपिक पदक जीता

वेस पेस के ओलंपिक पदक जीतने के 24 साल बाद, उनके बेटे लिएंडर पेस ने 1996 अटलांटा ओलंपिक में भारतीय टेनिस को पहला और अब तक का एकमात्र ओलंपिक पदक दिलाया। लिएंडर ने पुरुष एकल स्पर्धा में कांस्य पदक जीता। यह 1952 के बाद भारत का ओलंपिक इंडिविजुअल स्पोर्ट्स में पहला पदक था, जब केडी जाधव ने यह उपलब्धि हासिल की थी। वेस पेस अपने बेटे की सफलता की अक्सर तारीफ करते थे और उन्होंने कहा था, “पहली बात तो लिएंडर ऐसे माहौल में पले-बढ़े हैं जिसने खेल संस्कृति को प्रोत्साहित किया। साथ ही लिएंडर में अंतर्निहित प्रतिभा है।”

वेस लिएंडर की काफी तारीफ करते थे

वेस पेस ने अपने बेटे लिएंडर की मेहनत और जिद को हमेशा सराहा। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा था, “लिएंडर टेनिस कोर्ट पर काफी तेज हैं और मुझे यह भी लगता है कि वह जिद्दी भी हैं। वह हफ्ते में छह दिन, रोजाना तीन घंटे ट्रेनिंग करते थे। अगर आप चैंपियन बनना चाहते हैं तो आपको इसे जारी रखना होगा।” वहीं, लिएंडर पेस का मानना है कि ‘कभी हार न मानने’ का रवैया उनके परिवार में विरासत में मिलता है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा, “यह सब विरासत में मिलता है।” खुद पिता होने के नाते लिएंडर ने यह भी बताया कि उनकी बेटी अयाना में भी ये गुण नजर आते हैं। उन्होंने कहा, “आपको मेरी बेटी पर गौर करना चाहिए। वह मेरे पिता से बहुत मिलती-जुलती है।”

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