MS Dhoni: 2020 में आज ही के दिन धोनी ने कहा था अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा

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नई दिल्ली: 15 अगस्त 2020 को जब देश आजादी का जश्न मना रहा था, उसी दिन शाम को भारतीय क्रिकेट में एक युग का शांत अंत हुआ। इंस्टाग्राम पर एक वीडियो के साथ बैकग्राउंड में गाना ‘पल दो पल मेरी कहानी है’ बज रहा था, और इसी के साथ महेंद्र सिंह धोनी ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया। न प्रेस कॉन्फ्रेंस, न कोई औपचारिक ऐलान—सिर्फ अपनी सादगी और विनम्रता के अंदाज में उन्होंने करियर की यादों से भरा वीडियो पोस्ट किया और लिखा कि 15 अगस्त 2020 के बाद उन्हें अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से रिटायर्ड समझा जाए।

फैंस धोनी के संन्यास की खबर को समझ ही रहे थे कि महज आधे घंटे बाद एक और झटका लगा। उनके करीबी दोस्त और भारतीय क्रिकेट के शानदार बल्लेबाज सुरेश रैना ने भी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया। इन दो बड़े फैसलों ने फैंस को हैरान और भावुक कर दिया, मानो एक ही दिन में भारतीय क्रिकेट का सुनहरा अध्याय खत्म हो गया हो। धोनी और रैना की गहरी दोस्ती जगजाहिर रही है, और ‘मिस्टर आईपीएल’ के नाम से मशहूर रैना ने चेन्नई सुपर किंग्स के लिए माही के साथ कई सालों तक शानदार साझेदारी निभाई।

सुरेश रैना ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में भारत के लिए 18 टेस्ट, 226 वनडे और 78 टी20 मुकाबले खेले। टेस्ट क्रिकेट में उन्होंने 26.48 की औसत से 768 रन बनाए, जिसमें एक शतक और सात अर्धशतक शामिल हैं। वनडे में उनका रिकॉर्ड 35.31 की औसत से 5615 रन का रहा, जिसमें पांच शतक और 36 अर्धशतक दर्ज हैं, जबकि टी20 में उन्होंने 134.79 के स्ट्राइक रेट से 1190 रन बनाए, जिसमें एक शतक और पांच अर्धशतक शामिल हैं। रैना उन चुनिंदा भारतीय बल्लेबाजों में हैं जिन्होंने तीनों प्रारूप में शतक जड़े हैं। गेंदबाजी में भी उन्होंने योगदान दिया, टेस्ट में 13 विकेट, वनडे में 36 विकेट और टी20 में 13 विकेट हासिल किए। 2005 में श्रीलंका के खिलाफ वनडे से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू करने वाले रैना ने अपना आखिरी मैच जुलाई 2018 में इंग्लैंड के खिलाफ हेडिंग्ले में खेला था।

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने से पहले महेंद्र सिंह धोनी लंबे समय तक भारतीय टीम से बाहर रहे थे। उनका आखिरी मैच 2019 वनडे विश्व कप के दौरान न्यूजीलैंड के खिलाफ सेमीफाइनल था, जिसके बाद वह लगभग गुमनामी में चले गए और किसी को अंदाजा भी नहीं हुआ कि आगे क्या होने वाला है। धोनी सिर्फ एक कप्तान नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों के सपनों और उम्मीदों के प्रतीक थे। 2007 टी20 वर्ल्ड कप की ऐतिहासिक ट्रॉफी, 2011 वनडे वर्ल्ड कप में लगाया गया वह यादगार छक्का, 2013 चैंपियंस ट्रॉफी की जीत—ये सभी उनके करियर की स्वर्णिम उपलब्धियां हैं। लेकिन इन उपलब्धियों के पीछे छिपा था उनका शांत स्वभाव, दबाव में भी अडिग रहना और टीम को परिवार की तरह संभालने की अद्भुत क्षमता।

धोनी की शांतचित्त कप्तानी, बिजली जैसी तेज स्टंपिंग और दबाव के पलों में मैच खत्म करने की अद्भुत क्षमता ने उन्हें ‘कैप्टन कूल’ की उपाधि दिलाई। भले ही वह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह चुके हों, लेकिन उनका असर और प्रेरणा आज भी टीम इंडिया के खिलाड़ियों और करोड़ों प्रशंसकों के दिलों में गहराई से बसी हुई है। हाल ही में एक पॉडकास्ट में जब उनसे पूछा गया कि चेन्नई सुपर किंग्स के लिए खिताब जीतना और देश के लिए खेलना—इनमें से कौन सा पल वह चुनेंगे, तो माही ने बिना झिझके और पूरी सादगी से कहा, “देश हमेशा पहले आता है।”

माही की लोकप्रियता का आलम यह है कि आज भी जब वह आईपीएल में मैदान पर उतरते हैं, तो स्टेडियम में फैंस का उत्साह चरम पर पहुंच जाता है। उनके बल्ले की धार भले ही अब पहले जैसी न रही हो, लेकिन उनकी एक झलक ही दर्शकों के चेहरे पर मुस्कान ला देती है। धोनी खुद मान चुके हैं कि वह अपने करियर के अंतिम पड़ाव पर हैं। 44 साल की उम्र में उनका अगला सीजन खेलना तय नहीं है, और फैंस के मन में यही सवाल है कि कहीं उन्होंने धोनी को आखिरी बार खेलते हुए तो नहीं देख लिया। इसके बावजूद उम्मीदें बरकरार हैं कि माही एक बार फिर मैदान में उतरेंगे और चेन्नई सुपर किंग्स को एक और खिताबी जीत दिलाएंगे।

धोनी के नेतृत्व में भारतीय टीम ने सभी प्रारूपों में शीर्ष स्थान हासिल किया। उनकी कप्तानी में दिसंबर 2009 से शुरू होकर 18 महीनों तक भारत टेस्ट रैंकिंग में नंबर एक पर बना रहा। माही की जीवनगाथा क्रिकेट इतिहास की सबसे प्रेरणादायक कहानियों में से एक है—रेलवे स्टेशन पर टिकट कलेक्टर के रूप में काम करने वाले इस युवा ने मेहनत, धैर्य और अदम्य संकल्प के दम पर देश के सबसे बड़े ट्रॉफी कलेक्टर का दर्जा हासिल किया। 2004 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू करने वाले धोनी ने अपने करियर में ऐसी उपलब्धियां जोड़ीं, जिन्हें आने वाली पीढ़ियां याद रखेंगी।

चेन्नई सुपर किंग्स में ‘थाला’ के रूप में जाने जाने वाले धोनी ने भारत के लिए 98 टी20 खेले, जिसमें 126.13 के स्ट्राइक रेट से 37.60 की औसत से 1,617 रन बनाए। उनके नाम इस प्रारूप में दो अर्धशतक हैं। उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर 56 रन है। टेस्ट की बात करें तो धोनी ने 90 मैच खेले, जिसमें 38.09 की औसत से 4,876 रन बनाए। उन्होंने 224 के सर्वश्रेष्ठ स्कोर के साथ छह शतक और 33 अर्धशतक बनाए। वह टेस्ट में भारत के लिए 14वें सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी हैं। एक कप्तान के रूप में उन्होंने 60 टेस्ट मैचों में भारत का नेतृत्व किया, जिसमें से उन्होंने 27 मैच जीते, 18 हारे और 15 ड्रॉ रहे। सच कहें तो धोनी के ‘पल दो पल की यह कहानी’, आने वाले कई युगों तक सुनाई जाएगी।

धोनी बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में ऑस्ट्रेलिया को व्हाइटवॉश करने वाले एकमात्र भारतीय कप्तान भी हैं। ऐसा उन्होंने 2010-11 और 2012-13 की सीरीज में किया था। भारत ने 72 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में भारत की अगुआई करते हुए 41 में जीत दर्ज की और 28 हारे, एक बराबरी पर रहा जबकि दो नतीजे हासिल करने में नाकाम रहे। उनका जीत प्रतिशत 56.94 है। आईसीसी खिताब के लिए भारत का मार्गदर्शन करने के अलावा, उन्होंने इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) और चैंपियंस लीग टी20 में चेन्नई सुपर किंग्स (सीएसके) को फ्रेंचाइजी का गौरव भी दिलाया है।

उन्होंने सीएसके को 2010, 2011, 2018, 2021 और 2023 में पांच आईपीएल खिताब दिलाए हैं। धोनी की कप्तानी में सीएसके ने 2010 और 2014 में चैम्पियंस लीग टी20 का खिताब जीता है। धोनी ने 2016 से 2017 में सीएसके के बैन होने पर राइजिंग पुणे सुपरजाएंट्स के लिए खेले थे। आईपीएल में धोनी ने 278 मैच खेले हैं। इनमें उन्होंने 38.30 की औसत और 137.45 के स्ट्राइक रेट से 5,439 रन बनाए हैं। उन्होंने टूर्नामेंट में 24 अर्धशतक भी लगाए हैं। उनके नाम 158 कैच और 47 स्टंपिंग भी हैं।

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