(NST News) भोपाल. चीन में आयोजित 23वीं एशियन कैडेट, जूनियर और अंडर-21 कराते चैम्पियनशिप 2025 में मध्यप्रदेश की खिलाड़ी रूषा तंबत ने शानदार प्रदर्शन कर व्यक्तिगत वर्ग में रजत पदक जीता। यह भारत के लिए इस वर्ग का पहला रजत पदक है। रूषा की इस उपलब्धि ने न सिर्फ देश का मान बढ़ाया, बल्कि मध्यप्रदेश को अंतरराष्ट्रीय खेल मानचित्र पर नई पहचान दिलाई। उनका नाम अब चीन से लेकर भोपाल तक गूंज रहा है।
राज्य कराते अकादमी की खिलाड़ी
रूषा तंबत फिलहाल राज्य कराते अकादमी, भोपाल की डे बोर्डिंग योजना के अंतर्गत प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। वे लंबे समय से कठोर परिश्रम, अनुशासन और निरंतर अभ्यास के जरिए अपने खेल को निखार रही हैं। विशेषज्ञ कोचों के मार्गदर्शन और अकादमी की आधुनिक सुविधाओं का लाभ उठाकर उन्होंने यह मुकाम हासिल किया। विशेषज्ञों का कहना है कि यह उपलब्धि भारतीय कराते के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ती है और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी।

खेल मंत्री ने दी शुभकामनाएं
मध्यप्रदेश के खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने रूषा तंबत को इस ऐतिहासिक सफलता के लिए हार्दिक बधाई दी। उन्होंने कहा कि रूषा ने यह साबित किया है कि मेहनत और लगन से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। यह उपलब्धि पूरे देश को गौरवान्वित करती है। मंत्री ने भरोसा जताया कि रूषा आगे भी अपने प्रदर्शन से भारत का तिरंगा अंतरराष्ट्रीय मंच पर ऊंचा फहराती रहेंगी।
विभागीय अधिकारियों की प्रतिक्रिया
खेल एवं युवा कल्याण विभाग के संचालक राकेश गुप्ता ने भी रूषा को बधाई देते हुए कहा कि उनकी सफलता आने वाले खिलाड़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि इस तरह की उपलब्धियां साबित करती हैं कि प्रदेश में खिलाड़ियों को दी जा रही सुविधाएं और प्रशिक्षण का स्तर अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरा उतर रहा है। यह उपलब्धि भविष्य में और अधिक खिलाड़ियों को खेलों से जुड़ने के लिए प्रेरित करेगी।
युवाओं में नई ऊर्जा और उत्साह
रूषा तंबत की इस ऐतिहासिक जीत से मध्यप्रदेश के युवाओं में खेलों के प्रति नई ऊर्जा और उत्साह का संचार होगा। राज्य सरकार खिलाड़ियों को अत्याधुनिक प्रशिक्षण सुविधाएं, अनुभवी कोचों का मार्गदर्शन और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतियोगिताओं में भाग लेने का अवसर प्रदान कर रही है। यही कारण है कि प्रदेश के खिलाड़ी लगातार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। रूषा की सफलता से साफ है कि प्रतिभा और अवसर मिलने पर मध्यप्रदेश के खिलाड़ी किसी भी मंच पर इतिहास रच सकते हैं।


