नई दिल्ली: भारतीय टीम ने हॉकी एशिया कप 2025 का खिताब दक्षिण कोरिया को 4-1 से हराकर अपने नाम कर लिया। पूरे मुकाबले में भारतीय खिलाड़ियों का दबदबा देखने को मिला और कोरियाई टीम टिक ही नहीं पाई। इस खिताबी जीत के साथ भारत ने न केवल एशिया कप पर कब्जा जमाया, बल्कि अगले साल होने वाले हॉकी वर्ल्ड कप 2026 के लिए भी क्वालीफाई कर लिया है। पूरे टूर्नामेंट में भारत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए एक भी मैच नहीं गंवाया और फाइनल में जांबाजों ने एकतरफा अंदाज में कोरिया को धूल चटा दी
भारतीय टीम ने मुकाबले की धमाकेदार शुरुआत की। मैच शुरू होने के कुछ ही सेकेंडों में सुखजीत सिंह ने शानदार गोल दागकर भारत को 1-0 की बढ़त दिला दी। इसके बाद भारतीय खिलाड़ियों ने आक्रामक खेल दिखाते हुए ज्यादातर समय गेंद पर कब्जा बनाए रखा। साउथ कोरिया की अनुभवी टीम भारतीय आक्रमण के आगे दबाव में नजर आई। इस दौरान जुगराज सिंह को पेनाल्टी कॉर्नर से गोल करने का सुनहरा मौका मिला, लेकिन वह इसे भुना नहीं पाए।
दूसरे क्वार्टर में भारत ने अपनी बढ़त और मजबूत कर ली। 27वें मिनट में दिलप्रीत सिंह ने शानदार गोल करते हुए टीम को 2-0 की लीड दिलाई। इस गोल से भारतीय खिलाड़ियों का जोश और भी बढ़ गया और उन्होंने लगातार आक्रामक खेल जारी रखा। वहीं, साउथ कोरिया ने भी वापसी की कोशिश करते हुए गोल के कुछ मौके बनाए, लेकिन भारतीय डिफेंस के सामने उनकी सारी कोशिशें नाकाम रहीं।
तीसरे क्वार्टर में भारतीय खिलाड़ी संजय को ग्रीन कार्ड मिलने के कारण टीम को कुछ समय तक 10 खिलाड़ियों के साथ खेलना पड़ा। इसके बावजूद भारतीयों का दबदबा कायम रहा और क्वार्टर के आखिरी मिनटों में दिलप्रीत सिंह ने अपना दूसरा गोल दागते हुए भारत को 3-0 की बढ़त दिला दी। चौथे क्वार्टर में भी भारतीय हमले जारी रहे और 49वें मिनट में अमित रोहिदास ने शानदार गोल कर स्कोर 4-0 कर दिया। दूसरी ओर कोरियाई खिलाड़ी थके और बिखरे हुए नजर आए। 50वें मिनट में सोन दियान ने कोरिया के लिए एकमात्र गोल किया, लेकिन तब तक मैच भारत की पकड़ से बाहर नहीं जा सका। आखिरकार भारत ने 4-1 से जीत दर्ज कर न केवल एशिया कप 2025 का खिताब जीता, बल्कि हॉकी वर्ल्ड कप 2026 का टिकट भी पक्का कर लिया।
भारतीय हॉकी टीम ने इतिहास रचते हुए चौथी बार एशिया कप का खिताब अपने नाम किया। इससे पहले भारत ने साल 2017, 2007 और 2003 में यह ट्रॉफी जीती थी। इस जीत के साथ भारत ने पाकिस्तान को पीछे छोड़ दिया है, जिसने अब तक केवल तीन बार (1982, 1985 और 1989) हॉकी एशिया कप का खिताब जीता है। भारत की यह उपलब्धि न सिर्फ एशियाई हॉकी में उसके दबदबे को दर्शाती है, बल्कि भविष्य के लिए उसके आत्मविश्वास को भी और मजबूत करती है।


