जीनियस बेटी ने पढ़ाई और क्रिकेट दोनों में दिखाया कमाल, पूरा किया पिता का सपना

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नई दिल्ली: भारतीय महिला क्रिकेट टीम की स्टार बैटर प्रतिका रावल आज किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं। हर क्रिकेट प्रेमी उनके नाम से परिचित है। लेकिन डेढ़ साल पहले तक शायद ही किसी ने इस नाम के बारे में सुना था। प्रतिका के पिता प्रदीप रावल, जो खुद एक क्रिकेटर बनना चाहते थे, अपनी बेटी के माध्यम से अपने अधूरे सपने को पूरा करने की राह पर निकल पड़े। हालांकि, एक समय उन्हें भी लगने लगा था कि आखिर कब आएगा वह वक्त जब प्रतिका का नाम चमकेगा।

कहते हैं न, भगवान के घर देर होती है पर अंधेर नहीं — मेहनत करने वालों को उनका हक़ एक न एक दिन ज़रूर मिलता है। यही हुआ प्रतिका रावल के साथ। पिछले साल जब उन्हें शेफाली वर्मा की जगह वेस्टइंडीज सीरीज के लिए बतौर ओपनर टीम में शामिल किया गया, तो वह पल उनके पिता प्रदीप रावल के लिए सपनों के पूरे होने जैसा था। मां रजनी रावल की आंखें खुशी से नम थीं, जबकि भाई शाश्वत रावल के चेहरे पर गर्व साफ झलक रहा था। लेकिन इस सफलता के पीछे छिपा है वर्षों की मेहनत, समर्पण और संघर्ष — जो एक पिता ने अपनी बेटी के साथ मिलकर किया।

पढ़ाई में जीनियस, क्रिकेट में स्टार: प्रतिका रावल की प्रेरक कहानी

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार आमतौर पर जब कोई व्यक्ति एक करियर पर ध्यान केंद्रित करता है, तो पढ़ाई पर असर पड़ता है, लेकिन प्रतिका रावल के साथ ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने सिर्फ 12 साल की उम्र में क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया था, फिर भी पढ़ाई और खेल के बीच संतुलन कभी नहीं बिगड़ा। प्रतिका के भाई के अनुसार, “उन्होंने 10वीं और 12वीं दोनों बोर्ड परीक्षाओं में 92 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल किए। वह हमेशा पढ़ाई और खेल को साथ लेकर चलती थीं। स्कूल के दिनों में भी वह लगभग हर खेल में हिस्सा लेती थीं। धीरे-धीरे उन्होंने क्रिकेट को अपना मुख्य खेल बनाया और वहीं से उनकी स्टार बनने की यात्रा शुरू हुई।”

बेटी ने पूरा किया पिता का अधूरा सपना

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार प्रतिका रावल के 52 वर्षीय पिता प्रदीप रावल ने बताया, “मैंने अपने यूनिवर्सिटी के दिनों तक क्रिकेट खेला था। मैं एक ऑलराउंडर था — तेज गेंदबाज भी और हार्ड-हिटर भी। लेकिन उस समय मुझे सही दिशा और मौका नहीं मिल पाया। इसलिए मैंने ठान लिया कि अपने अधूरे सपने को अपने पहले बच्चे के ज़रिए पूरा करूंगा। जब प्रतिका सिर्फ तीन साल की थी, तभी मैंने उसे बैट पकड़ना सिखाया था। बाद में मैं बीसीसीआई का लेवल-1 अंपायर बना और प्रतिका अक्सर मेरे साथ मैदान में जाकर मैच देखा करती थी। उसे बास्केटबॉल में भी दिलचस्पी थी और उसने मॉडर्न स्कूल की ओर से नेशनल स्तर पर गोल्ड मेडल भी जीता। लेकिन जब वह 10 से 12 साल की हुई, तो हमने तय किया कि क्रिकेट ही उसके भविष्य की सही दिशा होगी।”

लॉकडाउन में नहीं रुकी मेहनत: घर की छत पर किया अभ्यास

प्रतिका रावल के क्रिकेट करियर की नींव उनके पिता प्रदीप रावल ने रखी। उन्होंने अपनी बेटी को एक सफल क्रिकेटर बनाने के लिए हर संभव प्रयास किया। प्रदीप रावल के अनुसार, कोविड का दौर प्रतिका के करियर के लिए सबसे मुश्किल समय था। लॉकडाउन की वजह से न सिर्फ अभ्यास ठप हो गया, बल्कि उसके पेशेवर सफर की शुरुआत भी कुछ समय के लिए रुक गई।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने अपने पुराने घर की छत की एक तस्वीर को लेकर बताया,”यह हमारा घर हुआ करता था लेकिन उस वक्त वहां कोई नहीं रहता था। इसी कारण मैंने छत पर पोल लगाए और वहां नेट बना दिया। मैं प्रतिका को यहां सुबह एक घंटे और शाम को एक घंटे प्रैक्टिस करवाता था। वो जब तक अपना अभ्यास नहीं करती थी ना खाती थी ना ही सोती थी। मैं अपने समय में बॉलिंग करता था तो मैं उसका थ्रोडाउन स्पेशलिस्ट था। दिन में तकरीबन 400-500 गेंदों का सामना वो करती थी।”

एक साल के भीतर बना स्टार

प्रतिका रावल ने पिछले साल वनडे में अपना डेब्यू किया था। 22 दिसंबर 2024 को पहली बार प्रतिका रावल ब्लू जर्सी में खेलती नजर आई थीं। अभी एक साल भी नहीं हुआ है और वह वनडे वर्ल्ड कप 2025 में शानदार प्रदर्शन करती नजर आ रही हैं। उन्होंने न्यूजीलैंड के खिलाफ 134 बॉल पर 122 रन की बेहतरीन पारी खेली जिसमें 13 चौके और 2 छक्के शामिल थे।

इसके साथ ही प्रतिका रावल ने अपने 23वें वनडे मैच की 23वीं पारी में 1000 रन का आंकड़ा पार किया और इस मामले में सबसे तेज महिला क्रिकेटर बन गईं। वहीं, वनडे वर्ल्ड कप में उन्होंने अपना पहला शतक और ओवरऑल दूसरा वनडे शतक भी पूरा किया। इससे पहले ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उन्होंने 75 रनों की शानदार पारी खेली थी।

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