नई दिल्ली: यदि इंग्लैंड को ऑस्ट्रेलिया में होने वाली एशेज सीरीज में मजबूत प्रदर्शन करना है, तो जो रूट का फॉर्म में रहना बेहद अहम होगा। 34 वर्षीय यह अनुभवी बल्लेबाज़, जिसने टेस्ट क्रिकेट में चौथे सबसे अधिक शतक लगाए हैं, ऑस्ट्रेलियाई सरज़मीं पर अब तक खास प्रभाव नहीं छोड़ पाए हैं। रूट अभी तक यहां एक भी शतक नहीं बना सके हैं। यह उनका चौथा ऑस्ट्रेलिया दौरा होगा, और इस बार उनका भविष्य काफी हद तक उनके प्रदर्शन पर निर्भर करेगा। यह सीरीज यह तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी कि रूट आगे कितना लंबा टेस्ट करियर जारी रख पाएंगे।
अगर रूट का प्रदर्शन खराब रहता है और वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल 2025-27 (WTC Final 2025-27) में इंग्लैंड की टीम जगह नहीं बना पाती है तो इस साइकल के साथ उनका करियर भी खत्म हो सकता है। अगर एशेज में रूट नहीं चल पाए तो वह शायद ही मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर के 51 टेस्ट शतकों का रिकॉर्ड तोड़ पाएं। फिलहाल वह 39 शतक लगा चुके हैं और रिकी पोंटिंग से आगे निकलने के लिए 3 शतकों की जरूरत है।
रूट का लक्ष्य: आलोचनाओं को प्रदर्शन से करारा जवाब
इंग्लैंड और जो रूट दोनों चाहेंगे कि यह रिकॉर्ड यहीं ऑस्ट्रेलियाई धरती पर टूटे। ऐसा होने पर रूट अपने उन आलोचकों को भी शांत कर देंगे, जो उनके ऑस्ट्रेलिया में खराब प्रदर्शन की ओर लगातार इशारा करते रहते हैं। दूसरी तरफ इंग्लैंड के पास रूट के अलावा कोई ठोस विकल्प भी नहीं दिखता। टीम सिर्फ रन बनाने के लिए ही नहीं, बल्कि उम्मीदों, भरोसे और ऐतिहासिक दबाव को संभालने के लिए भी अपने सबसे बेहतरीन बल्लेबाज़ पर भारी निर्भर रहेगी।
ऑस्ट्रेलियाई सरज़मीं पर रूट का प्रदर्शन फीका
जो रूट की काबिलियत पर कोई सवाल नहीं है। 158 टेस्ट, 51.29 का औसत, 13543 रन और 39 शतक इसकी गवाही देते हैं, लेकिन ऑस्ट्रेलिया में रूट के आंकड़े काफी साधारण हैं। 14 टेस्ट में उन्होंने 35.68 के मामूली औसत से सिर्फ 892 रन बनाए हैं। उनके नाम एक भी सेंचुरी नहीं है। 2021 में गाबा में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में अपना सर्वश्रेष्ठ स्कोर 89 बनाया था।
रूट के डेब्यू के बाद इंग्लैंड को ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट जीत नहीं मिली
इसके अलावा रूट ने 2013 में एडिलेड ओवल पर 87 रन की उत्कृष्ट पारी भी खेली थी। अपनी शानदार तकनीक और क्लास के बावजूद वे ऑस्ट्रेलिया में अब तक कोई बड़ी उपलब्धि हासिल नहीं कर सके हैं। उनके टेस्ट डेब्यू के बाद से इंग्लैंड ने ऑस्ट्रेलियाई धरती पर एक भी टेस्ट मैच नहीं जीता है, एशेज सीरीज जीतना तो और भी दूर की बात रही। ऐसे में रूट की कोशिश होगी कि वे इस दौरे पर न केवल अपने प्रदर्शन से दबदबा बनाएं, बल्कि 2010-11 के बाद पहली बार ऑस्ट्रेलिया में एशेज ट्रॉफी पर भी कब्जा करने में टीम की मदद करें।


