खाटू श्याम दर्शन के बाद नई उड़ान, अंतिम पंघाल की नजर ओलंपिक चैंपियन पर

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नई दिल्ली : खाटू श्याम मंदिर से दर्शन कर लौटते समय अंतिम पंघाल को इस बात का ज़रा भी एहसास नहीं था कि उसी शाम उनकी ज़िंदगी का सबसे बड़ा मोड़ आने वाला है। प्रो कुश्ती लीग की नीलामी में यूपी डोमिनेटर्स ने उन पर 52 लाख रुपये की बड़ी बोली लगाई, जिसके साथ ही वह देखते ही देखते लीग की सबसे चर्चित भारतीय महिला पहलवानों में शुमार हो गईं। अब 21 साल की यह जुझारू पहलवान दुनिया की सबसे मजबूत मानी जाने वाली टोक्यो ओलंपिक की गोल्ड मेडलिस्ट युई सुसाकी को मात देने के सपने के साथ मैट पर उतरने के लिए तैयार हैं। प्रो कुश्ती लीग (PWL) का 2026 सीजन 15 जनवरी से नोएडा इंडोर स्टेडियम में शुरू होने जा रहा है।

मोबाइल स्क्रीन पर सुसाकी, मैदान में जीत का जुनून

अंतिम पंघाल इस समय प्रो कुश्ती लीग की तैयारियों में पूरी तरह जुटी हुई हैं। उनके मोबाइल फोन पर रोजाना दो बार ओलंपिक की दो बार की मेडलिस्ट युई सुसाकी के मुकाबलों के वीडियो चलते रहते हैं, जिससे उन्हें अपनी रणनीति तय करने में मदद मिल सके। पीडब्ल्यूएल में अंतिम का सामना जापान की इस स्टार पहलवान से होना तय है। युई सुसाकी को मौजूदा दौर की दुनिया की सबसे ताकतवर महिला पहलवानों में गिना जाता है।

PWL 2026: इतिहास बदलने के इरादे से उतरेगी अंतिम पंघाल

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अंतिम पंघाल ने कहा, “वह दुनिया की सबसे बेहतरीन पहलवान हैं और उनके पास मुझसे कहीं ज्यादा अनुभव है। हालांकि वह 50 किग्रा वर्ग में खेलती हैं, जबकि मैं 53 किग्रा वर्ग की हूं। उम्र में मुझसे छोटी होने के कारण मैं उनके मुकाबलों को बेहद ध्यान से देख रही हूं—यह समझने के लिए कि वह किस तरह खेलती हैं, कैसे डिफेंस करती हैं और कौन-सी गलतियों से वह हमेशा बचती हैं।” चार बार की विश्व चैंपियन युई सुसाकी (पेरिस ओलंपिक की ब्रॉन्ज मेडलिस्ट) को महिला 53 किग्रा वर्ग में हरियाणा थंडर ने 60 लाख रुपये में खरीदा जिससे वह हाल में हुई पीडब्ल्यूएल नीलामी में बिकने वाली सबसे महंगी खिलाड़ी बन गईं। यूपी डोमिनेटर्स ने 21 साल की अंतिम पंघाल को 52 लाख रुपये में खरीदा था।

भारतीय पहलवान को भी इस बात का एहसास है कि इस मजबूत प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ जीत हासिल करना आसान नहीं होगा। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अंतिम ने कहा, “उनका डिफेंस बेहद सख्त है और वह पैरों से मिलने वाले अंक आसानी से नहीं देने देतीं। वह आमतौर पर पहले हमला करती हैं और मौके का इंतजार करती हैं, ऐसे में मुझे मजबूत बचाव के साथ ज्यादा आक्रामक होना होगा। मुझे यह सुनिश्चित करना है कि उन्हें मुकाबले पर हावी होने का कोई मौका न मिले।”

सीख भी, तैयारी भी: हर फ्रेम से सीख, हर दांव में दम

युई सुसाकी का सीनियर स्तर पर दबदबा सिर्फ एक बार कमजोर पड़ा, जब 2024 पेरिस ओलंपिक में उनका सामना विनेश फोगाट से हुआ। अंतिम पंघाल ने उस मुकाबले को फ्रेम-दर-फ्रेम देखा है। अंतिम ने बताया, “वह मुकाबला शानदार था। मैं यह समझने की कोशिश कर रही हूं कि विनेश ने किस तरह मजबूत बचाव किया और आखिर में उन्होंने निर्णायक हमला कैसे किया।”

इसके बावजूद अंतिम पंघाल यह भी समझती हैं कि प्रो कुश्ती लीग में हालात और समीकरण पूरी तरह बदल जाते हैं। आखिरी एक मिनट के राउंड में ‘डबल अंक’ का नियम लागू होने से निष्क्रिय कुश्ती भारी पड़ सकती है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा, “इस लीग में आप ज्यादा देर तक शांत नहीं रह सकते। अगर आपके पास दो या चार अंक हैं, तो विरोधी को बाजी पलटने के लिए सिर्फ एक चाल की जरूरत होती है। ऐसे में यहां रणनीति भी अलग तरह की बनानी पड़ती है।”

52 लाख की बोली पर हैरान अंतिम पंघाल

भारतीय पहलवान का मानना है कि नीलामी में मिली राशि उनकी उम्मीदों से कहीं ज्यादा रही। यूपी डोमिनेटर्स टीम का स्वामित्व रुबिक्स ग्रुप के पास है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अंतिम ने कहा, “मुझे इतनी बड़ी बोली की उम्मीद नहीं थी। मुझे लगा था कि कीमत करीब 30 लाख रुपये तक जाएगी। सोचा था कि शायद इससे थोड़ी ऊपर जा सकती है, लेकिन इतनी ज्यादा होगी, यह अंदाजा नहीं था।”

जब बोली लग रही थी, तब अंतिम मंदिर से घर लौट रही थीं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा, ‘बोली करीब सात बजे शुरू हुई। मैं खाटू श्याम मंदिर से घर लौटी थी। किसी ने नहीं सोचा था कि मेरे लिए इतनी ज्यादा बोली लगेगी।’ विनेश फोगाट ने हाल में संन्यास से वापसी की घोषणा की है और जब बात सीनियर पहलवान की आती है तो अंतिम प्रतिद्वंद्विता के बजाय सहानुभूति से बात करती हैं।

विनेश फोगाट सबसे सफल भारतीय पहलवानों में से एक हैं। उन्हें पेरिस ओलंपिक में 100 ग्राम ज्यादा वजन होने के कारण 50 किग्रा फाइनल से डिस्क्वालिफाई कर दिया गया था। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अंतिम पंघाल ने कहा, ‘विनेश के पास मुझसे कहीं ज्यादा अनुभव है। अगर वह वापसी कर रही हैं तो इसका मतलब है कि वह बहुत कड़ी मेहनत करने के लिए तैयार हैं। जब कोई खिलाड़ी इस मानसिकता के साथ वापसी करता है तो वापसी हमेशा जोरदार होती है।’

जूनियर चैंपियन से सीनियर स्तर की मजबूत दावेदार बनने के सफर में अंतिम पंघाल काफी परिपक्व हुई हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा, “पहले अगर हम एक या दो अंक गंवा देते थे तो घबरा जाते थे। अब मुझे समझ आ गया है कि मुकाबला छह मिनट का होता है। अगर मैं एक अंक पीछे भी रहूं, तो भी शांत रहकर वापसी करने के लिए पूरा वक्त होता है।”

दहिया के मार्गदर्शन में बदली अंतिम पंघाल की तैयारी

अंतिम पंघाल की ट्रेनिंग में भी महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं। कोच सियाराम दहिया के पास लौटने के बाद उन्होंने वर्कलोड, रिकवरी और रिहैबिलिटेशन पर विशेष ध्यान देना शुरू किया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अंतिम ने कहा, “अब हम ओवरट्रेनिंग नहीं करते। पहले से यह तय करते हैं कि मैट पर कब अभ्यास करना है और कब आराम करना है। कोच और फिजियो मिलकर बैठकर यह तय करते हैं कि कौन-सी योजना सबसे प्रभावी होगी।”

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अंतिम पंघाल का मानना है कि राष्ट्रीय शिविर में अच्छी तैयारी होती है, लेकिन विदेशी अनुभव भी बेहद जरूरी है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने बताया, “हम जानते हैं कि भारतीय पहलवान किस तरह कुश्ती करते हैं, क्योंकि हम उनके साथ बड़े हुए हैं। वहीं, विदेशी पहलवानों में अधिक फुर्ती और अलग रणनीति होती है। उनके साथ ट्रेनिंग करने से बहुत फायदा मिलता है, इसलिए बीच-बीच में हमें विदेश में शिविर करने की जरूरत है।”

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