क्रिकेट प्रशासन पर सुप्रीम कोर्ट की फटकार, खिलाड़ियों की अनदेखी पर जताई चिंता

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नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने क्रिकेट संघों के प्रबंधन में पूर्व खिलाड़ियों की अनदेखी पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने साफ कहा कि क्रिकेट संघों का संचालन पूर्व क्रिकेटरों के हाथ में होना चाहिए, न कि ऐसे लोगों के पास जिन्हें खेल की बुनियादी समझ भी नहीं है। भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने मंगलवार (3 फरवरी) को महाराष्ट्र क्रिकेट संघ के चुनाव से जुड़े मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। उल्लेखनीय है कि ये चुनाव 6 जनवरी को प्रस्तावित थे, जिन पर हाईकोर्ट ने रोक लगाई थी।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, हाई कोर्ट की पीठ—जिसमें चीफ जस्टिस चंद्रशेखर और जस्टिस गौतम अंखड शामिल हैं—ने कहा कि ‘भाई-भतीजावाद’ और ‘पक्षपात’ के आरोपों से घिरी महाराष्ट्र क्रिकेट संघ (एमसीए) की चुनाव प्रक्रिया में कोर्ट का हस्तक्षेप ‘आवश्यक’ है। हाई कोर्ट की ओर से लगाई गई रोक को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत ने 2023 के बाद एसोसिएशन के सदस्यों की संख्या में अचानक हुई बढ़ोतरी पर सवाल उठाया। उन्होंने टिप्पणी की, “1986 से 2023 तक आपके पास 164 सदस्य थे और 2023 के बाद आपने बंपर ड्रॉ कर दिया?”

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत को बताया कि एक सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में गठित समिति ने 48 सदस्यों को बाहर किया था और नए सदस्यों को शामिल किया गया। इस दौरान सीजेआई ने यह भी सवाल किया कि प्रत्येक सदस्य ने व्यक्तिगत रूप से कितना दान दिया था। इस पर सिंघवी ने जवाब दिया कि पदाधिकारियों के रिश्तेदारों में से एक व्यक्ति ने 2000 एकड़ जमीन दान में दी थी। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने यह भी बताया कि चैरिटी कमिश्नर ने कैबिनेट से परामर्श किए बिना ही एसोसिएशन के लिए संचालक नियुक्त कर दिया।

मशहूर क्रिकेटरों को मिलनी चाहिए थी मेंबरशिप, सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी

सीजेआई ने संघ में अनुभवी खिलाड़ियों को शामिल करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा, ‘यह एक ऐसा देश है जहां बेहतरीन क्रिकेटर हैं, जो रिटायर हो चुके हैं और वे अपने समय के सबसे अच्छे खिलाड़ी थे। अगर आपने 300 मेंबरशिप खोलीं तो उन सभी मशहूर क्रिकेटरों को मेंबरशिप देना चाहिए था। आप किसे ला रहे हैं? जिन्हें क्रिकेट का खेल भी नहीं आता, जिन्हें बल्ला पकड़ना भी नहीं आता। जो कुछ हो रहा है, उस पर हमें अपनी भावनाएं ज्यादा जाहिर करने पर मजबूर न करे।’

केदार जाधव ने एमसीए के खिलाफ दायर की याचिका

महाराष्ट्र क्रिकेट एसोसिएशन के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट में भारत के पूर्व खिलाड़ी और भाजपा नेता केदार जाधव ने याचिका दायर हुई है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उनकी ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि हाई कोर्ट में मूल रिट याचिका एक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खिलाड़ी (केदार जाधव) ने दायर की थी।

कोर्ट का सख्त संदेश: पदाधिकारियों से नहीं, खेल से है क्रिकेट

सीजेआई ने यह भी कहा कि सिर्फ क्रिकेट ही नहीं, बल्कि सभी खेलों के लिए एक स्वतंत्र फोरम या ट्रिब्यूनल की आवश्यकता है। उन्होंने भारतीय खिलाड़ियों के हालिया शानदार प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कहा कि कम से कम उन्हें इतना सम्मान तो मिलना ही चाहिए कि उन्हें एसोसिएशन के मामलों को देखने का अवसर दिया जाए। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सीजेआई ने दो टूक शब्दों में कहा, “क्रिकेट पदाधिकारियों की वजह से नहीं है, यह क्रिकेटरों की वजह से है। हॉकी एसोसिएशन किसके लिए जानी जाती है? हॉकी खिलाड़ियों की वजह से।”

क्रिकेट संघ विवाद में सुप्रीम कोर्ट का निर्देश, पदाधिकारी दें हाई कोर्ट में जवाब

सीजेआई ने आदेश दिया कि चूंकि यह मामला 4 फरवरी को हाई कोर्ट के समक्ष सूचीबद्ध है, इसलिए पदाधिकारियों को अपनी सभी दलीलें वहीं पेश करनी चाहिए। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि हाई कोर्ट इन दलीलों पर विचार करेगा और उनसे अनुरोध किया कि मामले का यथाशीघ्र निपटारा किया जाए। इसके साथ ही पीठ ने याचिकाकर्ताओं को अपनी याचिका वापस लेने और कानून के अनुसार किसी भी निर्देश में बदलाव के लिए हाई कोर्ट का रुख करने की अनुमति भी दी।

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