देहरादून/दिल्ली। देशभर के सभी जिलों को जोड़ते हुए रविवार को 61वां फिट इंडिया संडे ऑन साइकिल (SOC) कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस राष्ट्रीय पहल के तहत करीब 1000 स्थानों पर हजारों नागरिकों ने साइक्लिंग के जरिए फिटनेस और स्वस्थ जीवनशैली का संदेश दिया। मुख्य आयोजन उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में हुआ, जबकि दिल्ली में कार्यक्रम का आयोजन नजफगढ़ क्षेत्र में किया गया। फिट इंडिया मूवमेंट की शुरुआत वर्ष 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा फिटनेस को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने के उद्देश्य से की गई थी। इसी क्रम में केंद्रीय युवा कार्य एवं खेल मंत्री मनसुख मंडाविया की पहल पर फिट इंडिया संडे ऑन साइकिल कार्यक्रम की परिकल्पना की गई, ताकि साइक्लिंग को बढ़ावा देकर मोटापे और प्रदूषण जैसी चुनौतियों से निपटा जा सके। दिल्ली के नजफगढ़ में आयोजित कार्यक्रम में स्थानीय नागरिकों के साथ कई नामचीन खिलाड़ी भी शामिल हुए। अर्जुन पुरस्कार विजेता कबड्डी खिलाड़ी साक्षी पुनिया, एमएमए फाइटर और फिट इंडिया चैंपियन पवन मान ने आम लोगों के साथ साइक्लिंग कर फिटनेस के प्रति जागरूकता का संदेश दिया। कार्यक्रम को शहर के बाहर आयोजित करने का उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों को इस पहल से जोड़ना रहा। उधर देहरादून के ऐतिहासिक परेड ग्राउंड में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में एक हजार से अधिक साइक्लिस्टों ने भाग लिया। पहाड़ों, हरियाली और ठंडी सुबह के बीच यह आयोजन फिटनेस, संस्कृति और सामुदायिक सहभागिता का उत्सव बन गया। स्कूली छात्र, युवा, महिलाएं और वरिष्ठ नागरिक बड़ी संख्या में इसमें शामिल हुए।
कार्यक्रम में महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल एवं उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी ने युवाओं से अनुशासित जीवनशैली अपनाने और सकारात्मक कार्य संस्कृति से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। इस अवसर पर कई अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी भी मौजूद रहे, जिनमें भारतीय बॉक्सर नूपुर श्योराण, पूर्व भारतीय महिला हॉकी गोलकीपर योगिता बाली, अर्जुन पुरस्कार विजेता बास्केटबॉल खिलाड़ी विशेष भृगुवंशी और ओलंपियन रेस वॉकर मनीष सिंह रावत शामिल रहे। इन खिलाड़ियों ने प्रतिभागियों का उत्साह बढ़ाते हुए फिट रहने के महत्व पर जोर दिया। पिछले एक वर्ष में फिट इंडिया संडे ऑन साइकिल एक जन आंदोलन का रूप ले चुका है। 61वें संस्करण ने यह स्पष्ट कर दिया कि फिटनेस अब केवल व्यक्तिगत लक्ष्य नहीं, बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी बन चुकी है।

