नई दिल्ली : खेत की कच्ची सड़कों से अंतरराष्ट्रीय ट्रैक तक का सफर तय करने वाली प्राची चौधरी ने अपने परिवार का नाम गर्व से रोशन किया है। प्राची चौधरी को प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में रानी लक्ष्मीबाई पुरस्कार से सम्मानित किया। प्राची पहले ही पेरिस ओलंपिक में भाग ले चुकी हैं और उन्होंने एशियन गेम्स में मेडल जीते अपनी खेल प्रतिभा साबित की है। प्राची चौधरी ने साल 2012 में इंटर की परीक्षा सहारनपुर के सरसावा इंटर कॉलेज से पास की. इसके बाद उनका प्रवेश पटियाला यूनिवर्सिटी में हुआ, जहां उन्होंने दौड़ में टॉप किया और एनआईएस पटियाला में जगह बनाई. वहीं से उन्होंने अपनी प्रोफेशनल प्रैक्टिस की शुरुआत की.
गांव से निकलकर एशियन गेम्स में भारत का परचम लहराने तक दिन-रात मेहनत करने वाली प्राची चौधरी का जन्म साल 1996 में सहारनपुर जिले के गांव झबीरण में किसान जयवीर सिंह के घर हुआ. वह अपने भाई-बहनों में तीसरे नंबर की हैं. उनके बड़े भाई अंकित और छोटे भाई प्रियांशु हैं. अंकित की शादी हो चुकी है और वह प्राइवेट कंपनी में कार्यरत हैं. प्राची का बचपन से ही ओलंपिक में खेलने का सपना था. कक्षा 6 से ही स्कूल में आयोजित खेलों में उन्होंने दौड़ना शुरू किया, जिसका नतीजा यह हुआ कि आज प्राची देश के लिए ओलंपिक में खेल चुकी हैं. अब वह आने वाले अंतरराष्ट्रीय गेम्स के लिए जी-तोड़ मेहनत कर रही हैं.
साल 2023 में हुए एशियन गेम्स में प्राची चौधरी की टीम ने सिल्वर मेडल जीतकर इतिहास रचा. उन्होंने 4×400 मीटर रिले में हिस्सा लिया था, और उनकी टीम स्वर्ण पदक मात्र 0.2 सेकेंड से चूक गई. प्राची रेलवे की 400 मीटर दौड़ में रिकॉर्डधारी भी हैं, उन्होंने 400 मीटर की दौड़ मात्र 52.09 सेकेंड में पूरी की थी. प्राची चौधरी ने अपने करियर की शुरुआत 2018 में स्टेट लेवल पर 200 और 400 मीटर दौड़ में गोल्ड मेडल जीतकर की. उसी साल सीनियर इंटर स्टेट ब्रांच में उन्होंने ओपन नेशनल सिल्वर मेडल भी हासिल किया. 2019 में उन्होंने दोहा, कतर में हुए एशियन चैम्पियनशिप में सिल्वर मेडल जीता और रेलवे में सीनियर क्लर्क, पटियाला में नियुक्त हुईं. इसी साल उन्होंने चेक रिपब्लिक में 2 गोल्ड और 1 सिल्वर मेडल भी अपने नाम किए. प्राची ने जापान वर्ल्ड रिले में भाग लिया और टर्की और सपाला, पोलैंड में प्रशिक्षण प्राप्त किया. 2023 में 19वीं एशियन गेम्स में उनकी टीम ने 4×400 मीटर रिले रेस में सिल्वर मेडल जीतकर इतिहास रचा.
प्राची साल 2018 में आयोजित एशियन गेम्स में हिस्सा नहीं ले पाईं, लेकिन इसके बाद उन्होंने दोहा में आयोजित एशियन चैम्पियनशिप में सिल्वर मेडल हासिल किया. वहीं, नेशनल गेम्स में उन्होंने तीसरा स्थान प्राप्त किया. प्राची फिलहाल त्रिवेंद्र में रहकर आगामी एशियन और कॉमनवेल्थ खेलों की तैयारी में जुटी हुई हैं. खेतों की मेड़ से अंतरराष्ट्रीय ट्रैक तक का सफर तय करने वाली प्राची चौधरी को हाल ही में लखनऊ में पुरस्कृत किया गया. उन्हें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रानी लक्ष्मीबाई पुरस्कार से सम्मानित किया. इससे पहले सरकार ने उन्हें जिला युवा कल्याण और प्रादेशिक विकास दल अधिकारी के पद पर भी नियुक्त किया था.


