नई दिल्ली : रियो ओलंपिक 2016 के महिला एकल बैडमिंटन फाइनल में पीवी सिंधू को हराकर स्वर्ण पदक जीतने का सपना तोड़ने वाली स्पेन की स्टार खिलाड़ी कैरोलिना मारिन ने संन्यास ले लिया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार दिग्गज बैडमिंटन खिलाड़ी ने सोशल मीडिया पर एक भावुक संदेश साझा करते हुए बताया कि वह अपने होमटाउन हुएलवा में होने वाली यूरोपियन चैंपियनशिप में हिस्सा नहीं लेंगी। इस टूर्नामेंट में उन्हें वाइल्ड कार्ड एंट्री मिली थी, लेकिन चोटों और स्वास्थ्य कारणों के चलते उन्होंने प्रतियोगिता में भाग लेने से इनकार कर दिया।
“इंस्टाग्राम वीडियो के जरिए मारिन ने किया भावुक संदेश साझा”
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मारिन ने इंस्टाग्राम पर जारी एक वीडियो में कहा, आज मैं सीधे-सीधे बात करना चाहती हूं। प्रोफेशनल बैडमिंटन में मेरा सफर समाप्त हो गया है इसलिए मैं हुएलवा की यूरोपियन चैंपियनशिप में हिस्सा नहीं लूंगी। मैं चाहती थी कि हम आखिरी बार कोर्ट पर मिलें, लेकिन सिर्फ आखिरी बार कोर्ट पर दिखने के लिए मैं अपने शरीर को जोखिम में नहीं डालना चाहतीं। चोटों की वजह से संन्यास का फैसला लेना पड़ा है। मैं अपने फैसले पर कायम हूं।
महिला बैडमिंटन की टॉप स्टार: मारिन की सफलता का सफर
कैरोलिना मारिन को बैडमिंटन के इतिहास की सबसे सफल महिला खिलाड़ियों में से एक माना जाता है। वह तीन बार की वर्ल्ड चैंपियन और कई बार की यूरोपियन चैंपियन रह चुकी हैं। मारिन ओलंपिक में बैडमिंटन में गोल्ड जीतने वाली पहली स्पेनिश खिलाड़ी भी हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अपने करियर और रिटायरमेंट के बारे में मारिन ने कहा, “मेरा आखिरी मैच अनजाने में पेरिस ओलंपिक 2024 में हुआ, जहां घुटने की चोट लगने के बाद मैं सेमीफाइनल से हट गई थी। मैंने उसी समय रिटायरमेंट ले लिया था, बस तब हमें इस बात का पता नहीं था। मुझे कभी गिरने न देने के लिए, मेरे साथ खड़े रहने के लिए और सबसे मुश्किल पलों में मेरा साथ देने के लिए आप सबका शुक्रिया। आपके बिना शर्त प्यार के लिए धन्यवाद।”
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार कैरोलिना मारिन ने कहा, “मैं अपने जुनून को अलविदा कह रही हूं और मुझे इस बात पर बहुत गर्व है कि मैंने जो कुछ भी हासिल किया है, वह सिर्फ खिताबों के लिए नहीं, बल्कि खेल की दुनिया में सम्मान पाने के लिए किया है। अब मैं एक नए रास्ते पर चलूंगी, जहां मैं कोशिश करूंगी कि मुझे जो भी समर्थन मिला है, उसे वापस लौटा सकूं और खेल के मूल्यों की रक्षा करती रहूं।”


