नई दिल्ली : राष्ट्रमंडल स्पोर्ट के अध्यक्ष डोनाल्ड रुकारे 2030 में अहमदाबाद में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारियों से संतुष्ट नजर आए। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा कि भारत में आयोजित होने वाले इन खेलों में लगभग 17 खेलों को शामिल किए जाने की उम्मीद है। यह आयोजन अपेक्षाकृत छोटा लेकिन सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण होगा, जिसका उद्देश्य वैश्विक आकर्षण और स्थानीय भावनाओं के बीच संतुलन स्थापित करना है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली में शुक्रवार को उन्होंने यह भी बताया कि खेलों की अंतिम सूची 2027 के मध्य तक तय कर ली जाएगी।
उस समय 2030 राष्ट्रमंडल खेलों का पूरा प्रोग्राम जारी किया जाएगा। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद है कि बहुत जल्द हम लगभग 16 से 17 खेलों के पूरे प्रोग्राम की घोषणा कर पाएंगे। 2027 के मध्य में हम आपको खेलों और हमारी शुरुआत के बारे में पक्का जवाब दे पाएंगे। प्रस्तावित लिस्ट की एक खास बात होगी, जिन खेलों को 2022 में बर्मिंघम खेलों में हटा दिया गया था, उसे इसमें जोड़ा जाएगा क्योंकि वे खेल भारतीय दर्शकों के लिए भावनात्मक महत्व रखते हैं।
प्रमुख खेलों की संभावित वापसी
भारतीय आयोजक अहमदाबाद में खेलों की एक पूरी लिस्ट शामिल करने की कोशिश कर रहे हैं, जिन्हें बर्मिंघम 2022 से हटा दिया गया था और जो दो महीने बाद होने वाले ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में भी शामिल नहीं होंगे। बर्मिंघम में निशानेबाजी और तीरंदाजी को हटा दिया गया था। इस साल ग्लास्गो में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों में बैडमिंटन, क्रिकेट, हॉकी, निशानेबाजी, स्क्वाश, टेबल टेनिस और कुश्ती जैसे नौ मुख्य खेलों को हटा दिया गया है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार रुकारो ने कहा कि हमने जो देखा है, उससे यह साफ है कि भारत में कई तरह के खेलों की मेजबानी करने की क्षमता मौजूद है। इसमें कोई शक नहीं है कि भारतीय ओलंपिक संघ, अंतरराष्ट्रीय खेल महासंघों और मेजबान के साथ सभी जरूरी बातचीत पूरी करने के बाद ऐसा शानदार व असरदार कार्यक्रम बनकर आएगा जो सभी की जरूरतों को पूरा करेगा। मालूम हो कि 2030 राष्ट्रमंडल खेलों में टी-20 प्रारूप का पुरुष व महिला क्रिकेट और हॉकी शामिल हो सकता है।
आयोजन स्थलों का निरीक्षण और जायजा
ये तीन विचाराधीन टीम खेलों में मुख्य हैं। इनकी लोकप्रियता और व्यावसायिक संभावनाएं बहुत ज्यादा है। पारंपरिक खेलों की श्रेणी में योगासन को भी एक पदक-स्पर्धा के तौर पर पेश किया जा रहा है। रुकारो के साथ सीईओर केटी सैडलियर और गेम्स व एश्योरेंस के निदेशक डैरेन हाल ने आठ और नौ को अहमदाबाद, गांधीनगर, वड़ोदरा और एकता नगर में बुनियादी ढांचे व खेल स्थलों का जायजा किया। इसके बाद ये तीनों शुक्रवार को दिल्ली पहुंचे। राष्ट्रमंडल खेलों के प्रतिनिधिमंल ने खेलों की तैयारियों पर संतोष व्यक्त किया।
रुकारे ने राष्ट्रमंडल खेल आंदोलन के सामने मौजूद व्यापक चुनौतियों को स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि बढ़ती लागत और जनता की घटती रुचि के कारण हाल के मेजबान शहरों को अपने खेल कार्यक्रमों का आकार छोटा करना पड़ा है और कई बार खेल स्थलों की संख्या भी सीमित करनी पड़ी है। इन दबावों ने राष्ट्रमंडल खेलों की दीर्घकालिक प्रासंगिकता और निरंतरता को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि एथलीट और सदस्य देश अभी भी इन खेलों को एक महत्वपूर्ण आयोजन मानते हैं, लेकिन भागीदारी और रुचि के स्तर में कुछ उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनका लक्ष्य है कि ये खेल प्रासंगिक, जवाबदेह और सभी के लिए एक पसंदीदा विकल्प बने रहें।


