खेल रत्न-अर्जुन अवॉर्ड की चयन प्रक्रिया में होगा बदलाव, थोक में पुरस्कार के खिलाफ मंत्रालय

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नई दिल्ली : राष्ट्रीय खेल पुरस्कारों में पारदर्शिता बढ़ाने और हर साल उठने वाले विवादों को कम करने के उद्देश्य से खेल मंत्रालय ने मेजर ध्यानचंद खेल रत्न, अर्जुन अवॉर्ड और द्रोणाचार्य अवॉर्ड की चयन प्रक्रिया में बदलाव की तैयारी शुरू कर दी है। इसके तहत चयन प्रणाली को अधिक स्पष्ट और निष्पक्ष बनाने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि योग्य खिलाड़ियों और कोचों को ही सम्मान मिल सके। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, नई नीति को इस तरह से तैयार किया जा रहा है, जिसमें अवॉर्ड पाने के योग्य उम्मीदवारों को आवेदन की जरूरत नहीं पड़े। जिस तरह ओलंपिक और एशियाई खेलों में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को मंत्रालय तत्काल तय नकद अवॉर्ड मुहैया कराता है, उसी तरह ओलंपिक, विश्व चैंपियनशिप और एशियाई खेलों में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को अंकों के आधार पर अवॉर्ड के लिए प्राथमिकता दी जाएगी।

अब प्रदर्शन से मिलेगा सम्मान, अंक प्रणाली होगी लागू

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अवॉर्ड चयन नीति में होने वाला परिवर्तन जल्द आधिकारिक होगा। नीति इस तरह की होगी, जिसमें खिलाड़ियों के प्रदर्शन के आधार पर उनके अंक निर्धारित किए जाएंगे। फिर इन्हें मंत्रालय की ओर से गठित चयन समिति के सामने रखा जाएगा। मौजूदा नीति के अनुसार सभी खिलाड़ियों को अर्जुन और खेल रत्न के लिए आवेदन करना होता है। आवेदन के आधार पर मंत्रालय की ओर से गठित चयन समिति खिलाड़ियों का चयन कर खेल मंत्रालय को उन्हें पुरस्कार देने की सिफारिश करती है।

खेल पुरस्कारों की दोबारा जांच, बड़े बदलाव के संकेत

इस बार के राष्ट्रीय खेल पुरस्कार अब तक नहीं दिए गए हैं। चयन समिति ने 24 खिलाड़ियों को अर्जुन पुरस्कार देने की सिफारिश की थी। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, चयनित अडियों की सूची खेल मंत्री के पास है, लेकिन इनका पुनर्मूल्यांकन किया जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मंत्रालय का कहना है कि अर्जुन पुरस्कार प्रतिष्ठित पुरस्कार है और इसे हर किसी को नहीं दिया जाना चाहिए। इसी को ध्यान में रखते हुए ही मंत्रालय ने चयन नीति को बदलने का फैसला लिया है।

भारत में फिर दौड़ेगी F-1 कारें, मांडविया ने किया संकेत

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने सोमवार को कहा, ‘2027 में ग्रेटर नोएडा के बुद्ध इंटरनेशमान सर्किट (बीईसी) पर एक बार फिर फार्मूला-1 रेस का आयोजन किया जाएगा। एफ-१ का कहना है. इस रेस के लिए भारत महत्वपूर्ण बाजार है, लेकिन 2027 में यहां कोई रेस निर्धारित नहीं की गई है।’ मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मांडविया ने कहा, ‘पश्चिम एशिया में तनाव के चलते तीन कंपनियों ने देश में एफ-1 कराने की इच्छा जताई है। टैक्स की जटिलताएं दूर की जाएंगी। उम्मीद है कि 2027 में बीआईसी पर एफ-1 का आयोजन होगा।’ अदाणी ग्रुप की और से कर्ज में डूबे जेपी समूह की संपतियों का अधिग्रहण हो रहा है, जिनमें बीआईसी का फॉर्मूला-1 ट्रैक भी शामिल है।

योग से कबड्डी तक, राष्ट्रमंडल में जगह बनाने की दौड़ तेज

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार खेल मंत्री ने बताया कि 2030 के राष्ट्रमंडल खेलों में योग, खो-खो, कबड्डी और मलखंब जैसे पारंपरिक भारतीय खेलों में से दो को शामिल किया जाएगा। इसके अलावा टीम खेलों की श्रेणी में क्रिकेट और हॉकी को भी जगह दी जाएगी, जिससे इन खेलों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और बढ़ावा मिल सके।

एशियाड के लिए तैयार मुख्य हॉकी टीम

एशियाई खेल और हॉकी विश्व कप के बीच कम समय का अंतर होने के कारण एक ही टीम का दोनों टूर्नामेंट में हिस्सा लेना मुश्किल माना जा रहा है। ऐसे में रणनीति के तहत दो अलग-अलग टीमें उतारने की योजना बनाई जा रही है, जिसमें मुख्य टीम एशियाई खेलों में हिस्सा लेगी, जबकि दूसरी टीम विश्व कप में मैदान पर उतरेगी।

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